BRICS का दिल्ली डिक्लेरेशन सर्वसम्मति से पास, प्रस्ताव में क्या घोषणा और संकल्प लिए गए? जानिए सबसे बड़े फैसले
Published: Saturday, September 12, 2026, 17:17 [IST]
BRICS Delhi Declaration 2026: भारत की मेजबानी में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के समापन सत्र में 'नई दिल्ली घोषणा 2026' को सर्वसम्मति से मंजूरी मिल गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदस्य देशों के सामने इस घोषणा पत्र का मसौदा रखा। जब उन्होंने पूछा कि क्या किसी को इस पर कोई एतराज है, तो किसी भी देश ने विरोध नहीं किया। इसके साथ ही यह ऐतिहासिक प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास हो गया। यह घोषणा पत्र वैश्विक मंच पर ब्रिक्स देशों की साझा प्राथमिकताओं और भविष्य के रोडमैप को साफ तौर पर पेश करता है।
यह घोषणा सिर्फ समिट के समापन का दस्तावेज नहीं है। इसमें BRICS देशों ने आने वाले दौर में किन मुद्दों पर साथ काम करना है, वैश्विक विवादों पर उनका क्या रुख रहेगा और दुनिया की बदलती व्यवस्था में संगठन की भूमिका कैसी होगी, इसकी दिशा भी दिखाई गई है।
BRICS को संबोधित करते हुए PM मोदी ने क्या कहा?
सत्र को संबोधित करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा,
"ब्रिक्स देशों के बीच अलग-अलग मुद्दों पर विचारों में भिन्नता हो सकती है, लेकिन सहयोग को लेकर सबकी प्रतिबद्धता एक जैसी है। दुनिया बहुत तेजी से बदल रही है और हम पुराने पड़ चुके ढर्रे से आज की दुनिया को नहीं चला सकते।"
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र जैसी वैश्विक संस्थाओं में प्रतिनिधित्व, पारदर्शिता और नियम बनाने की प्रक्रिया में तुरंत सुधार की वकालत की। पीएम मोदी ने कहा,
''आज की चर्चा से यह साफ है कि बदलती दुनिया को पुराने इंस्टीट्यूशन से रेगुलेट नहीं किया जा सकता। रिप्रेजेंटेशन, रिस्पॉन्सिवनेस और रूल-मेकिंग, इन तीनों में रिफॉर्म की जरूरत है। हमने इस बात पर भी जaर दिया कि ग्लोबल साउथ को भविष्य की टेक्नोलॉजी और उन्हें कंट्रोल करने वाले रूल्स बनाने में बराबर रिप्रेजेंटेशन मिलना चाहिए। फैसलों और उनके नतीजों के बीच की दूरी को पार्टनरशिप और कलेक्टिव एक्शन के जरिए दूर करने की जरूरत है। ''
BRICS दिल्ली प्रस्ताव में क्या घोषणा और संकल्प लिए गए?
युद्ध और टकराव पर BRICS का बड़ा संदेश
दिल्ली डिक्लेरेशन में BRICS देशों ने युद्ध और टकराव रोकने के प्रयास तेज करने की बात कही है। इसके लिए सिर्फ लड़ाई रोकना काफी नहीं माना गया। घोषणा में विवादों की मूल वजहों को समझकर उन्हें दूर करने पर जोर दिया गया है।
सदस्य देशों ने अंतरराष्ट्रीय विवादों का हल बातचीत, आपसी सलाह और कूटनीति के जरिए निकालने की प्रतिबद्धता दोहराई। साथ ही बहुपक्षीय व्यवस्था में अलग-अलग देशों के नजरिए और राष्ट्रीय हितों का सम्मान करने की बात कही गई।

एकतरफा टैरिफ पर क्यों जताई चिंता?
दिल्ली डिक्लेरेशन का एक अहम हिस्सा वैश्विक व्यापार से जुड़ा है। BRICS देशों ने एकतरफा टैरिफ और गैर-टैरिफ उपायों के बढ़ते इस्तेमाल पर गंभीर चिंता जताई है। घोषणा में कहा गया कि ऐसे कदम वैश्विक व्यापार को प्रभावित करते हैं और विश्व व्यापार संगठन यानी WTO के नियमों के अनुरूप नहीं हैं। BRICS ने वैश्विक व्यापार व्यवस्था को स्थिर रखने की जरूरत बताई है। इसके साथ ही वैश्विक सप्लाई चेन और ऊर्जा की आवाजाही सुचारू रखने के लिए सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है।
परमाणु टकराव और दबाव वाले कदमों पर भी संदेश
BRICS देशों ने परमाणु खतरे और परमाणु टकराव के बढ़ते जोखिम पर भी गंभीर चिंता जाहिर की। यानी घोषणा में सुरक्षा से जुड़े उस खतरे को भी जगह मिली है, जिसका असर किसी एक देश तक सीमित नहीं रहता।
सदस्य देशों ने ऐसे एकतरफा आर्थिक और दूसरे दबाव वाले कदमों की निंदा की, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ माना जाता है। इस तरह BRICS ने बातचीत और सहयोग के रास्ते को आगे रखने का संदेश दिया है।

सीमा पार भुगतान पर क्या हुआ फैसला?
व्यापार और वित्तीय सहयोग को लेकर भी दिल्ली डिक्लेरेशन में दिशा तय की गई है। सदस्य देशों ने सीमा पार भुगतान यानी क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट को आसान बनाने के लिए बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई है।
इसके लिए व्यावहारिक समाधान तलाशने पर जोर दिया गया है। इसका मकसद BRICS देशों के बीच कारोबार और वित्तीय लेनदेन को ज्यादा सुविधाजनक बनाने की दिशा में आगे बढ़ना है।
ग्लोबल साउथ को तकनीक में बराबर हिस्सेदारी की मांग
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भविष्य की तकनीकों को लेकर ग्लोबल साउथ की भूमिका को भी सामने रखा। उन्होंने कहा कि विकासशील देशों को सिर्फ नई तकनीकों का इस्तेमाल करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्हें तकनीक बनाने और उससे जुड़े नियम तय करने की प्रक्रिया में भी बराबर भागीदारी मिलनी चाहिए।
पीएम मोदी ने वैश्विक फैसलों और जमीन पर उनके असर के बीच मौजूद दूरी को कम करने के लिए साझेदारी और मिलकर काम करने की जरूरत बताई।

BRICS के 20 साल पूरे, जारी हुए दो डाक टिकट
समिट के दौरान BRICS के 20 साल पूरे होने के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो डाक टिकट भी जारी किए। समापन भाषण में उन्होंने BRICS अध्यक्ष के तौर पर सभी सदस्य देशों के योगदान, रचनात्मक सोच और सहयोग के लिए आभार जताया। पीएम मोदी ने कहा, "नई दिल्ली घोषणा ने BRICS के साझा संकल्प और आगे की दिशा को सामने रखा है। अब अगली चुनौती इन फैसलों को जमीन पर उतारने की है।"
यानी दिल्ली डिक्लेरेशन का असली असर अब इसके क्रियान्वयन से तय होगा। युद्ध और कूटनीति से लेकर व्यापार, भुगतान व्यवस्था, तकनीक और वैश्विक संस्थानों में सुधार तक BRICS ने कई मोर्चों पर अपना साझा रुख दर्ज कराया है।
समिट के बंद कमरे के सत्र के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी हाथ मिलाया और बातचीत की। ऐसे में दिल्ली डिक्लेरेशन के साथ BRICS बैठक ने कूटनीतिक स्तर पर भी कई संकेत दिए हैं।