BRICS सम्मेलन के बीच Delhi के दामन पर दाग? 5 घंटे में 2 गोदाम जले, 3 बच्चों समेत 6 घायल, जिम्मेदार कौन?

Time Updated: Sunday, September 13, 2026, 20:09 [IST]

Delhi Massive Fire Reason: राजधानी दिल्ली में रविवार, 13 सितंबर को ब्रिक्स समिट 2026 का अंतिम दिन रहा। तमाम सुरक्षा इंतेजामों के बीच, दिल्ली में 5 घंटे के अंतराल में दो गोदाम आग की चपेट में आए। बताया जा रहा है कि पूर्वी दिल्ली के डल्लूपुरा में एक बड़े गोदाम में लगी आग पर काबू पाने के लिए 35 दमकल गाड़ियों और 200 से अधिक फायरफाइटर्स को लगाया गया, जबकि इससे पहले उत्तर-पश्चिम दिल्ली के स्वरूप नगर में एक गोदाम में आग लगने से तीन बच्चों समेत छह लोग घायल हो गए।

डल्लूपुरा में आग से उठता काला धुआं दूर-दूर तक दिखाई दिया। आग बुझाने के दौरान एक फायर अधिकारी भी धुएं की चपेट में आ गए। वहीं, स्वरूप नगर में आग की लपटें और धुआं पास की आवासीय इमारत तक पहुंच गया, जिसके बाद वहां रहने वाले लोगों को बचाने के लिए दमकल कर्मियों को मशक्कत करनी पड़ी। ऐसे में बड़ा सवाल है कि रिहायशी इलाकों के आसपास ज्वलनशील सामान से भरे गोदाम कैसे संचालित हो रहे हैं और हादसे के बाद जिम्मेदारी किसकी तय होगी?

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केस-1: डल्लूपुरा में दोपहर बाद धधका गोदाम

डल्लूपुरा में रविवार दोपहर करीब 3:29 बजे दिल्ली फायर सर्विस को आग लगने की सूचना मिली। आग खेड़ा देवत मंदिर के पास धर्मशिला अस्पताल के पीछे स्थित एक गोदाम में लगी थी। करीब 1,000 वर्ग गज में फैले इस ग्राउंड फ्लोर के गोदाम में प्लाईवुड और PVC का सामान रखा था। गोदाम का ढांचा टिन की चादरों से बना था। ज्वलनशील सामग्री की मौजूदगी के कारण आग तेजी से फैलती चली गई। कुछ ही देर में आसमान में काले धुएं का घना गुबार दिखाई देने लगा। धुआं डल्लूपुरा के साथ न्यू अशोक नगर और आसपास के इलाकों तक भी नजर आया।

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35 दमकल गाड़ियां और 200 से ज्यादा फायरफाइटर मैदान में

आग की गंभीरता को देखते हुए शुरुआती दमकल वाहनों के बाद लगातार अतिरिक्त यूनिटें मौके पर भेजी गईं। असिस्टेंट डिविजनल ऑफिसर अशोक कुमार के मुताबिक, 35 दमकल गाड़ियां और 200 से ज्यादा फायरफाइटर आग बुझाने के अभियान में लगाए गए। शुरुआत में चार वॉटर टेंडर और एक वॉटर बाउजर मौके पर भेजे गए थे। बाद में ऑपरेशन को बढ़ाया गया। शाम करीब 4:02 बजे तक आठ वॉटर टेंडर, छह वॉटर बाउजर, एक मल्टीपर्पस वाहन और एक क्विक रिस्पॉन्स वाहन भी तैनात किए जा चुके थे।

आग बुझाते समय फायर अधिकारी धुएं की चपेट में आए

डल्लूपुरा में आग बुझाने के दौरान स्टेशन ऑफिसर सुनील सागर ने धुआं अंदर खींच लिया। इसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई। दिल्ली फायर सर्विस के मुताबिक, उन्हें CATS एंबुलेंस के जरिए लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल ले जाया गया। उनकी स्वास्थ्य स्थिति के बारे में फिलहाल विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है। डल्लूपुरा की घटना में अभी तक किसी नागरिक की मौत या घायल होने की सूचना नहीं है। आग लगने की सटीक वजह का भी अभी पता नहीं चल पाया है।

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केस-2: स्वरूप नगर में भी आग ने मचाई तबाही

डल्लूपुरा से पहले रविवार को उत्तर-पश्चिम दिल्ली के स्वरूप नगर में भी एक गोदाम आग की चपेट में आ गया था। इस हादसे में तीन बच्चों समेत छह लोग घायल हुए। यह गोदाम जिम उपकरण और रेक्सिन से जुड़े सामान के भंडारण के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। ज्वलनशील सामग्री होने के कारण आग तेजी से फैल गई और आसपास धुआं भर गया। दिल्ली फायर सर्विस को सुबह करीब 11:05 बजे आग की सूचना मिली। इसके बाद 15 दमकल इकाइयों को मौके पर भेजा गया। दोपहर करीब 1:50 बजे आग पर काबू पा लिया गया और इसके बाद कूलिंग ऑपरेशन शुरू किया गया।

बेसमेंट और दो मंजिला इमारत में बना था गोदाम

अधिकारियों के अनुसार, स्वरूप नगर की खड्डा कॉलोनी की गली नंबर 2 में करीब 200 वर्ग गज में बनी इमारत में गोदाम संचालित था। इसमें बेसमेंट के अलावा दो मंजिलें थीं। दमकल विभाग के मुताबिक, आग लगने के समय गोदाम के भीतर कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था। शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट को आग की संभावित वजह माना जा रहा है। हालांकि, अंतिम कारण विस्तृत जांच के बाद ही सामने आएगा।

रेक्सिन और जिम उपकरणों ने बढ़ाई आग की रफ्तार

गोदाम में पंचिंग बैग, दस्ताने और दूसरे जिम उपकरणों के साथ बड़ी मात्रा में रेक्सिन उत्पाद रखे थे। ये सामग्री आग पकड़ने के बाद तेजी से जलने लगी, जिससे लपटें और धुआं आसपास के इलाके में फैल गया। गोदाम के पास स्थित आवासीय इमारत तक भी आग की लपटें और विकिरण ताप पहुंचा।

पांच लोग धुएं में फंसे, तीन बच्चे भी शामिल

आग और धुएं के कारण पास के घर में रहने वाले पांच लोग फंस गए। दमकल कर्मियों ने उन्हें बाहर निकाला। घायलों में प्रियंका (28), संतोष (33) और तीन बच्चे वाणी (5), तन्वी (8) और अंशिका (8) शामिल हैं। सभी को इलाज के लिए बाबू जगजीवन राम अस्पताल ले जाया गया। वहीं, 55 वर्षीय विजय सिंह आग से बचने की कोशिश में पास की इमारत से नीचे कूद गए। इस दौरान उनके पैर में चोट आई और उन्हें इलाज के लिए बुराड़ी के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया।

आखिर इन आग की घटनाओं में जिम्मेदार कौन?

दोनों घटनाओं में आग लगने की अंतिम वजह अभी जांच के अधीन है। लेकिन इन हादसों ने गोदामों की सुरक्षा, ज्वलनशील सामान के भंडारण और रिहायशी इलाकों के आसपास व्यावसायिक गतिविधियों की निगरानी पर गंभीर सवाल जरूर खड़े किए हैं। डल्लूपुरा के गोदाम में प्लाईवुड और PVC जैसी सामग्री रखी थी, जबकि स्वरूप नगर में रेक्सिन और जिम उपकरण मौजूद थे। ऐसी सामग्री आग लगने की स्थिति में उसे तेजी से फैलाने का काम कर सकती है।

जांच में यह देखा जाना अहम होगा कि संबंधित परिसरों में अग्निशमन सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं, फायर सेफ्टी उपकरण उपलब्ध थे या नहीं और गोदाम का इस्तेमाल स्वीकृत नियमों के तहत किया जा रहा था या नहीं। इसके अलावा यह भी जांच का विषय होगा कि गोदाम रिहायशी इलाके से कितनी दूरी पर था, वहां ज्वलनशील सामान रखने की अनुमति थी या नहीं और संबंधित विभागों की ओर से समय-समय पर सुरक्षा निरीक्षण किया गया था या नहीं।