British War Loan Claim: 1917 में सेठ जुम्मा लाल ने अंग्रेजों को दिया था 35 हजार का 'लोन', अब परिवार ने ब्रिटेन से मांगा हिसाब! - Haribhoomi
मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के रुठिया परिवार ने प्रथम विश्व युद्ध (1917) के दौरान ब्रिटिश हुकूमत को दिए गए 35 हजार रुपये के कर्ज की वापसी के लिए ब्रिटेन सरकार से संपर्क साधा है। यूके के 'डेट मैनेजमेंट ऑफिस' ने इस दावे पर पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हुए मूल दस्तावेज व पत्राचार की प्रतियां मांगी हैं।
लोन देने के 20 साल बाद 1937 में सेठ जुम्मा लाल का निधन हो गया, लेकिन ब्रिटिश सरकार द्वारा इस कर्ज की मूल राशि या ब्याज का भुगतान आज तक नहीं किया गया।
- Published: 10 Aug 2026, 10:04 AM IST
- Last Updated: 10 Aug 2026, 10:04 AM IST
मध्य प्रदेश के सीहोर जिले से एक ऐतिहासिक और अनोखा मामला सामने आया है, जहां एक भारतीय परिवार ने ब्रिटिश हुकूमत से 109 साल पुराना कर्ज वापस मांगने के लिए कानूनी और कूटनीतिक प्रक्रिया शुरू की है।
सीहोर निवासी सेठ जुम्मा लाल रुठिया के उत्तराधिकारियों, 63 वर्षीय विवेक रुठिया और उनके बड़े भाई विनय रुठिया ने पारिवारिक दस्तावेजों की छानबीन के दौरान मिले 109 साल पुराने वार लोन प्रमाण-पत्र के आधार पर ब्रिटेन सरकार से पत्राचार किया है। लंबे समय तक चले पत्राचार और कानूनी नोटिस के बाद अब यूके (UK) के 'डेट मैनेजमेंट ऑफिस' की ओर से इस दावे पर सकारात्मक प्रतिक्रिया आई है और दावे की वैधानिकता जांचने के लिए मूल प्रमाण-पत्र मांगे गए हैं।
4 जून 1917 को प्रथम विश्व युद्ध के दौरान दिया गया था 35 हजार रुपये का 'वार लोन'मामले की पृष्ठभूमि सन् 1917 की है, जब प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश शासन ने सैनिकों के राशन, गोला-बारूद और युद्ध की अन्य जरूरतों की पूर्ति के लिए भारतीय साहूकारों व सेठों से 'वार लोन' के रूप में आर्थिक सहयोग जुटाया था।
सीहोर के तत्कालीन पॉलिटिकल एजेंट इन भोपाल डब्ल्यू. एस. डेविस द्वारा जारी ऐतिहासिक दस्तावेज के अनुसार, 'सेठ जुम्मा लाल रुठिया फार्म' और सेठ रामकिशन जसकरण रुठिया ने अंग्रेजों को 35 हजार रुपये का कर्ज दिया था। लोन देने के 20 साल बाद 1937 में सेठ जुम्मा लाल का निधन हो गया, लेकिन ब्रिटिश सरकार द्वारा इस कर्ज की मूल राशि या ब्याज का भुगतान आज तक नहीं किया गया।
लीगल नोटिस के बाद ब्रिटेन से आई आधिकारिक ईमेल, मांगे गए ओरिजिनल सर्टिफिकेट
विवेक रुठिया ने अपने अधिवक्ता श्रेयांस रानीवाला के माध्यम से यूके डेट मैनेजमेंट ऑफिस को ईमेल और हार्ड कॉपी के जरिए एक विस्तृत लीगल नोटिस भेजा था। इस नोटिस पर कार्रवाई करते हुए ब्रिटिश अधिकारियों ने हाल ही में वकील को एक ईमेल भेजा है, जिसमें 4 जून 1917 के ओरिजिनल लोन सर्टिफिकेट और उससे जुड़े सभी ऐतिहासिक पत्राचार की कॉपियां मांगी गई हैं, ताकि दावे की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके।
इस जवाब से उत्साहित रुठिया परिवार का कहना है कि यह मामला अब महज वित्तीय लेन-देन का नहीं, बल्कि उनके पूर्वजों के स्वाभिमान और ऐतिहासिक सम्मान से जुड़ा है।
5.5% चक्रवृद्धि ब्याज से कई करोड़, तो सोने के भाव से 10 करोड़ होगी रकम
परिवार के दावों और वित्तीय विशेषज्ञों के आकलन के अनुसार, यदि वर्ष 1917 से 2026 तक के 109 वर्षों के लिए 5.5 प्रतिशत वार्षिक चक्रवृद्धि ब्याज के आधार पर इस राशि का हिसाब जोड़ा जाए, तो यह रकम बढ़कर कई करोड़ रुपये हो जाती है।
वहीं, यदि इसकी तुलना 1917 के बाद से सोने की कीमतों में हुई करीब 3,000 गुना से अधिक की बढ़ोतरी के आधार पर की जाए, तो वर्तमान में इस निवेश का कुल मूल्य 10 करोड़ रुपये से भी अधिक बैठता है। यूके सरकार द्वारा मांगे गए कागजात मिलने के बाद अब देखना होगा कि ब्रिटिश वित्त मंत्रालय इस ऐतिहासिक दावे पर क्या अंतिम निर्णय लेता है।