CAG रिपोर्ट में जल-जीवन मिशन की खामियां उजागर: सरकार ने कांग्रेस पर फोड़ा ठीकरा, डिप्टी सीएम बोले-भाजपा सरकार बनने के बाद काम में आई तेजी - Raipur News

भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन (JJM) के क्रियान्वयन में कई गंभीर खामियां उजागर की हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कमजोर योजना, खराब क्रियान्वयन, निगरानी की कमी और गलत रिपोर्टिंग के कारण ग्रामीण पेयजल योजनाओं की दीर्घ

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मार्च 2024 तक की अवधि पर आधारित 'छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन का प्रदर्शन ऑडिट' रिपोर्ट मंगलवार को वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने विधानसभा में पेश की। रिपोर्ट को लेकर राज्य सरकार ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराया। वहीं, उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि भाजपा सरकार बनने के बाद जल जीवन मिशन के कार्यों में तेजी आई है।

जल जीवन मिशन की ऑडिट रिपोर्ट वित्त मंत्री ने पेश की।

जल जीवन मिशन की ऑडिट रिपोर्ट वित्त मंत्री ने पेश की।

पढ़ें रिपोर्ट की प्रमुख बातें

CAG के अनुसार, जल जीवन मिशन में योजना बनाने की प्रक्रिया तय मानकों के अनुसार नहीं अपनाई गई। रिपोर्ट में बताया गया है कि गांव स्तर की कार्ययोजना तैयार किए बिना ही जिला कार्ययोजनाएं बना दी गईं, जबकि राज्य स्तर की कार्ययोजना तैयार ही नहीं की गई।

इसके अलावा, राज्य स्तर पर जल सुरक्षा योजना भी नहीं बनाई गई। इससे जल स्रोतों की दीर्घकालिक उपलब्धता सुनिश्चित करने और योजनाओं के रखरखाव के लिए स्पष्ट रणनीति तैयार नहीं हो सकी।

रिपोर्ट में आधा अधूरा निर्माण का जिक्र है। (फाइल फोटो)

रिपोर्ट में आधा अधूरा निर्माण का जिक्र है। (फाइल फोटो)

33% नल कनेक्शन निकले गैर-कार्यशील

रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2025 तक 50 लाख ग्रामीण परिवारों को नल कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा गया था। जनवरी 2025 तक 40.10 लाख फंक्शनल हाउसहोल्ड टैप कनेक्शन (FHTC) लगाए गए।

हालांकि, इनमें से 13.31 लाख यानी करीब 33% कनेक्शन गैर-कार्यशील पाए गए। रिपोर्ट में इसके प्रमुख कारण सूख चुके जल स्रोत, अधूरी ओवरहेड टंकियां, बिजली कनेक्शन का अभाव और सोलर पंप नहीं लगाए जाना बताया गया।

मार्च 2024 तक 'हर घर जल' प्रमाणित किया जाना था।

मार्च 2024 तक 'हर घर जल' प्रमाणित किया जाना था।

मार्च 2024 तक 'हर घर जल' प्रमाणित किया जाना था

राज्य के सभी 19,656 गांवों को मार्च 2024 तक 'हर घर जल' प्रमाणित किया जाना था, लेकिन केवल 716 गांव (3.64%) ही प्रमाणित हो सके। ऑडिट में ऐसे मामले भी मिले जहां अधूरे कार्य के बावजूद गांवों को प्रमाणित कर दिया गया।

किसी भी जिले में 100 प्रतिशत कवरेज नहीं

मार्च 2024 तक राज्य के 33 में से किसी भी जिले और 146 में से किसी भी विकासखंड में 100 प्रतिशत नल जल कवरेज नहीं था। धमतरी में सबसे अधिक 98% कवरेज दर्ज हुई। बलौदाबाजार में 76% कवरेज रही। बाकी 15 जिलों में यह आंकड़ा 56 से 74 प्रतिशत के बीच रहा।

योजनाओं की प्रगति बेहद धीमी

रिपोर्ट के अनुसार, जल जीवन मिशन के तहत स्वीकृत 29,153 सिंगल विलेज स्कीम में से मार्च 2024 तक केवल 172 योजनाएं पूरी हुईं और इनमें से सिर्फ 32 ग्राम पंचायतों को सौंपी गईं।

वहीं 70 मल्टी विलेज स्कीम स्वीकृत होने के बावजूद मार्च 2025 तक एक भी योजना पूरी नहीं हो सकी, जिससे 9.85 लाख घरों तक सतही जल स्रोतों से पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य प्रभावित हुआ।

कैग रिपोर्ट में जल जीवन मिशन योजना की खामियों को उजागर किया गया है।

कैग रिपोर्ट में जल जीवन मिशन योजना की खामियों को उजागर किया गया है।

सोलर आधारित योजनाओं में भी खामियां

CAG ने पाया कि सोलर आधारित पेयजल योजनाओं में निर्धारित क्षमता से अधिक नल कनेक्शन जोड़ दिए गए, जिससे 28,984 परिवारों को निर्धारित मानकों के अनुसार पानी नहीं मिल पा रहा है।

वित्तीय और गुणवत्ता संबंधी कमियां

CAG के अनुसार, राज्य मिशन केंद्र और राज्य सरकार से मिलने वाले 6,480.04 करोड़ रुपए (केंद्र: 3,285.38 करोड़ और राज्य: 3,194.66 करोड़) की व्यवस्था करने में राज्य विफल रहा।

इसके अलावा मनरेगा, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण), जिला खनिज न्यास (DMF), सांसद निधि और CSR जैसी योजनाओं के संसाधनों के समन्वय के लिए भी कोई ठोस योजना नहीं बनाई गई।

जल गुणवत्ता जांच की व्यवस्था भी कमजोर

रिपोर्ट के अनुसार, राज्य की 75 जल परीक्षण प्रयोगशालाओं में से केवल 4 लैब ही सभी 13 निर्धारित जल गुणवत्ता मानकों की जांच करने में सक्षम थीं। वहीं, 37% प्रयोगशालाओं को NABL की मान्यता प्राप्त नहीं थी।

इसके अलावा स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में भी निर्धारित मानकों के अनुसार जल गुणवत्ता की जांच नहीं की जा रही थी।

CAG की प्रमुख सिफारिशें

CAG ने अपनी रिपोर्ट में लंबित कार्यों को समय पर पूरा करने और अलग-अलग विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की सिफारिश की है।

इसके साथ ही 'हर घर जल' प्रमाणन प्रक्रिया की समीक्षा करने, NABL मान्यता प्राप्त जल परीक्षण प्रयोगशालाओं की संख्या बढ़ाने और जल स्रोतों की दीर्घकालिक योजना तैयार करने पर जोर दिया गया है।

रिपोर्ट में योजनाओं के प्रभावी संचालन और रखरखाव के लिए सामुदायिक भागीदारी को भी मजबूत करने की सिफारिश की गई है।

डिप्टी सीएम अरुण साव ने जल जीवन मिशन फेल होने का कारण कांग्रेस सरकार को बताया है।

डिप्टी सीएम अरुण साव ने जल जीवन मिशन फेल होने का कारण कांग्रेस सरकार को बताया है।

सरकार ने पिछली कांग्रेस सरकार को ठहराया जिम्मेदार

CAG रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि दिसंबर 2023 में भाजपा सरकार बनने के बाद जल जीवन मिशन के कार्यों में तेजी आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली कांग्रेस सरकार मिशन को खराब स्थिति में छोड़कर गई थी, जिसके कारण योजना समय पर पूरी नहीं हो सकी।

अरुण साव ने कहा कि केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन की अवधि 2024 से बढ़ाकर 2028 तक कर दी है। उन्होंने बताया कि मार्च 2026 में केंद्र सरकार से स्वीकृत जल जीवन मिशन के दूसरे चरण को अब चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, ताकि हर ग्रामीण परिवार तक सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल पहुंचाया जा सके।