CAG Report: झारखंड को 327 करोड़ का राजस्व घाटा, 1.60 लाख करोड़ के खर्च का कोई हिसाब नहीं

CAG Report: सरकारी योजनाओं और राजस्व व्यवस्था की निगरानी में चूक का खामियाजा राज्य को भुगतना पड़ रहा है. नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की मंगलवार को विधानसभा के पटल पर रखी गयी रिपोर्ट में विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किये गये हैं. रिपोर्ट में बताया गया है कि राज्य में नियमों को दरकिनार कर 18 साल से कम उम्र के युवाओं को गियर वाली बाइक चलाने का लाइसेंस दे दिया गया. मनरेगा के पैसे से गाड़ियों की मरम्मत करायी गयी. पीएम आवास योजना में 6.32 लाख पात्र परिवारों को लक्ष्य नहीं मिला. जबकि, 2.90 लाख अपात्र लोगों के नाम लाभुक सूची में शामिल कर दिये गये. मनरेगा में 50 लाख से अधिक काम अधूरे पड़े हैं.

कई विभागों की व्यवस्था में खामियां

रिपोर्ट में सीएजी की रिपोर्ट में परिवहन, वाणिज्य कर, ग्रामीण विकास, पेयजल एवं स्वच्छता और उत्पाद विभाग की व्यवस्था में कई स्तर पर खामियां चिह्नित की गयी हैं. वित्तीय प्रबंधन पर भी रिपोर्ट ने सवाल उठाये हैं. बताया गया है कि मार्च 2025 तक 1.60 लाख करोड़ से अधिक की राशि से जुड़े उपयोगिता प्रमाण-पत्र लंबित थे.

खजाने से पैसा निकला, हिसाब बाकी

राज्य की वित्तीय स्थिति पर सीएजी की रिपोर्ट में पूंजीगत व्यय को लेकर चिंता जतायी गयी है. वर्ष 2024-25 में पूंजीगत व्यय पिछले साल की तुलना में 2,160 करोड़ कम हुआ. इसका असर परिसंपत्तियों के निर्माण और विकास योजनाओं की गति पर पड़ा. सबसे बड़ा सवाल उपयोगिता प्रमाण-पत्रों को लेकर है. मार्च 2025 तक 1,60,565.80 करोड़ की राशि से जुड़े उपयोगिता प्रमाण-पत्र लंबित थे. यानी, बड़ी रकम खर्च होने के बावजूद संबंधित विभाग यह प्रमाणित नहीं कर पाये थे कि राशि का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के अनुसार हुआ है.

मनरेगा : 50 लाख से ज्यादा काम अधूरे

रिपोर्ट ने मनरेगा में काम की रफ्तार और उसे पूरा करने की स्थिति को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है. 2019-24 के दौरान प्रस्तावित कार्यों में केवल 27 फीसदी काम पूरे हो सके. करीब 49 फीसदी यानी 50.21 लाख काम अधूरे रह गये. इन कार्यों पर 2,633 करोड़ खर्च हो चुके थे. काम अधूरे रहने के साथ मजदूरी भुगतान में भी देरी हुई. मार्च 2025 तक मजदूरों की 321.84 करोड़ की मजदूरी लंबित थी. रिपोर्ट में मनरेगा की राशि से वाहनों की मरम्मत और आउसोर्सिंग एजेंसियों के कर्मियों को भुगतान करने के मामले भी पकड़े गये.

जल जीवन मिशन : 24 फीसदी गांवों में एक भी नल नहीं

जल जीवन मिशन में भी लक्ष्य और उपलब्धि के बीच बड़ा अंतर मिला. राज्य के केवल 55 फीसदी ग्रामीण घरों तक नल से जल पहुंच पाया था. राष्ट्रीय औसत करीब 80 फीसदी है. वहीं, 24 फीसदी गांवों में एक भी घर में नल का कनेक्शन नहीं था. यानी योजना के बावजूद बड़ी आबादी अभी भी पाइप से पानी की सुविधा से दूर रही.

शराब दुकानदारों पर नहीं लगा 8.35 करोड़ का जुर्माना

सीएजी को उत्पाद विभाग में भी राजस्व वसूली में चूक मिली है. निर्धारित न्यूनतम स्टॉक नहीं रखने वाले शराब विक्रेताओं पर 8.35 करोड़ का जुर्माना नहीं लगाया गया. नियमों के उल्लंघन के बावजूद विभाग ने दंडात्मक कार्रवाई नहीं की, जिससे सरकार को राजस्व का नुकसान हुआ.

पांच जिलों में 305 नाबालिगों को बाइक का लाइसेंस

परिवहन विभाग में नियमों की अनदेखी के मामले सामने आये हैं. ऑडिट के दौरान पांच जिलों में 18 वर्ष से कम उम्र के 305 आवेदकों को गियर वाली मोटरसाइकिल चलाने का लाइसेंस जारी किये जाने का पता चला. सारथी सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी के कारण जिस उम्र में कानून गियर वाली बाइक चलाने की अनुमति नहीं होती, उस उम्र में विभाग ने लाइसेंस जारी कर दिया. अस्थायी पंजीकरण (टीआर) की वैधता छह महीने के बजाय केवल एक महीने रखे जाने के कारण 327.35 करोड़ के राजस्व पर असर पड़ा. ऑडिट में 6,640 ऐसे वाहन भी मिले, जिनका अस्थायी पंजीकरण होने के बाद स्थायी पंजीकरण नहीं कराया गया. उन वाहनों से कर वसूली नहीं की जा रही है. इसके अलावा 1.24 लाख वाहनों का टैक्स बकाया मिला. इससे 11.24 करोड़ रुपये के संभावित राजस्व वसूली प्रभावित हुई.

28 फीसदी पात्र लाभुकों को नहीं मिला पीएम आवास

प्रधानमंत्री आवास योजना, ग्रामीण की ऑडिट ने लाभुकों के चयन और लक्ष्य निर्धारण दोनों पर सवाल खड़े किये हैं. राज्य ने 22.34 लाख पात्र परिवारों की पहचान की थी. लेकिन केंद्र से 16.02 लाख परिवारों का ही लक्ष्य मिला. यानी 6.32 लाख पात्र परिवारों को योजना का लाभ नहीं मिल सका. यह संख्या कुल पात्र परिवारों की करीब 28 फीसदी है. दूसरी तरफ, लाभुकों के चयन में भी बड़ी चूक हुई. एक ओर पात्र परिवार योजना के दायरे से बाहर रह गये, दूसरी ओर अपात्र लोगों के नाम सूची में पहुंच गये. सूची में 2.90 लाख अपात्र लोगों को शामिल कर दिया गया. बाद में इन नामों को हटाया गया. रिपोर्ट में बताया गया है कि योजना के तहत पूर्ण हो चुके करीब आठ फीसदी आवासों में शौचालय की सुविधा नहीं मिली. यह स्थिति तब है, जब राज्य को खुले में शौच से मुक्त घोषित किया जा चुका है.

इसे भी पढ़ें: विधानसभा में सीएम हेमंत सोरेन का बड़ा ऐलान, 14वीं JPSC और दो बैकलॉग परीक्षाएं होंगी रद्द

जीएसटी में आंकड़ों का खेल, 343.58 करोड़ की विसंगति

वाणिज्य कर विभाग में जीएसटी और ई-वे बिल के आंकड़ों की जांच में 343.58 करोड़ की कर देयता और आइटीसी से संबंधित विसंगतियां सामने आयी हैं. रिटर्न में घोषित कारोबार और ई-वे बिल के आंकड़ों में कई मामलों में मेल नहीं था. ऑडिट में 23 बड़े करदाताओं का भी मामला सामने आया. इन करदाताओं ने आयकर रिटर्न में 95.43 करोड़ की बिक्री दिखायी, लेकिन जीएसटी के तहत उनका पंजीकरण नहीं था. विभाग इन मामलों की समय पर पहचान कर कार्रवाई नहीं कर सका.

इसे भी पढ़ें: मेदिनीनगर एयरपोर्ट से जल्द शुरू होगी उड़ान सेवा, सांसद वीडी राम ने लोकसभा में उठाया मुद्दा