चंडीगढ़ CBI कोर्ट ने SI-ASI पर फैसला सुरक्षित रखा: गवाह को धमकाने का आरोप, जमानत रद्द की मांग, मेरे मुवक्किल ने नहीं धमकाया - Chandigarh News

चंडीगढ़ की विशेष सीबीआई अदालत में 8 साल पुराने रिश्वत मामले में आरोपी तत्कालीन सब-इंस्पेक्टर सेवा सिंह और कॉन्स्टेबल सुमित की ओर से जवाब दाखिल किया गया। बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि उनके मुवक्किलों ने किसी गवाह को न तो धमकाया है और न ही उस पर कोई दबाव

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जमानत रद्द करने की मांग रिश्वत मामले में आरोपी चंडीगढ़ पुलिस के तत्कालीन सब-इंस्पेक्टर सेवा सिंह और कॉन्स्टेबल सुमित की सीबीआई ने दोनों पर मामले के अहम गवाह को धमकाने और अपने पक्ष में बयान देने का दबाव बनाने का आरोप लगाते हुए उनकी जमानत रद्द करने की मांग की थी।

सीबीआई ने इस संबंध में 21 जुलाई को विशेष अदालत में अर्जी दाखिल की थी। इसके बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। अब बचाव पक्ष ने अदालत में अपना जवाब दाखिल कर सीबीआई के सभी आरोपों को खारिज कर दिया है।

सीबीआई का आरोप है कि दोनों आरोपी पहले से रिश्वत लेने के मामले में ट्रायल का सामना कर रहे हैं। जमानत मिलने के बाद उन्होंने केस के एक अहम गवाह पर अपने पक्ष में गवाही देने का दबाव बनाया, जो जमानत की शर्तों का उल्लंघन है। इसी आधार पर जांच एजेंसी ने अदालत से दोनों की जमानत रद्द कर उन्हें दोबारा न्यायिक हिरासत में भेजने की मांग की है।

वहीं, बचाव पक्ष ने अदालत में कहा कि आरोप पूरी तरह निराधार हैं। उनके मुवक्किलों ने किसी भी गवाह को न तो धमकाया और न ही किसी तरह का दबाव बनाया। केवल झूठे आरोप लगाकर उन्हें परेशान किया जा रहा है और उनकी जमानत रद्द करवाने की कोशिश की जा रही है। वकील ने अदालत से कहा कि यदि सीबीआई के पास कोई ठोस साक्ष्य है तो उसे अदालत में पेश किया जाए।

8 साल पुराना रिश्वत का मामला यह मामला करीब आठ साल पुराना है। शिकायतकर्ता का आरोप था कि नाका तोड़ने के मामले में कार्रवाई की धमकी देकर आरोपी पुलिसकर्मी उसके घर पहुंचे थे। कार्रवाई से बचाने के बदले उन्होंने 5 हजार रुपये रिश्वत की मांग की थी। सीबीआई ने ट्रैप लगाकर दोनों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद दोनों को निलंबित कर दिया गया था। तभी से यह मामला विशेष अदालत में विचाराधीन है।

CBI चंडीगढ़ इस मामले की जांच कर रही है।

CBI चंडीगढ़ इस मामले की जांच कर रही है।

गवाह ने CBI कोर्ट में ये शिकायत दी

एक व्यक्ति लगातार संपर्क कर रहा: मामले के गवाह ने सीधे CBI की विशेष अदालत में शिकायत देकर आरोप लगाया कि आरोपी पुलिसकर्मियों के कहने पर एक व्यक्ति लगातार उससे संपर्क कर रहा है। वह बार-बार उस पर अदालत में आरोपियों के पक्ष में गवाही देने का दबाव बना रहा है।

मानसिक रूप से परेशान हो रहा: गवाह का कहना है कि लगातार मिल रही धमकियों और दबाव के कारण वह मानसिक रूप से परेशान है। उसने अदालत से अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने और आरोपितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की।

CBI ने कोर्ट में अर्जी लगाई

शिकायत मिलने के बाद अदालत ने पहले दोनों आरोपियों से जवाब मांगा था। इसके बाद CBI ने भी अदालत में विस्तृत अर्जी दाखिल कर कहा कि आरोपी जमानत का दुरुपयोग कर रहे हैं और गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। इसलिए, उनकी जमानत तत्काल रद्द की जानी चाहिए। अदालत ने इस अर्जी पर दोनों आरोपियों को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

8 साल पहले का मामला 4 पॉइंट्स में जानिए…

रिश्वत लेते पकड़ा सब-इंस्पेक्टर: यह मामला मई 2018 का है। CBI ने 9 मई 2018 को चंडीगढ़ पुलिस के तत्कालीन सब-इंस्पेक्टर सेवा सिंह को 5 हजार रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। इस मामले में कॉन्स्टेबल सुमित भी आरोपी बनाया गया था। जांच के बाद दोनों के खिलाफ अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया गया और मामला तब से अदालत में लंबित है। हालांकि, गिरफ्तारी के करीब 7 महीने के बाद ही आरोपियों को जमानत मिल गई थी। इसके बाद से दोनों आरोपी जेल से बाहर ही हैं।

नाका तोड़ने पर पुलिसवालों ने घर पहुंचकर धमकी दी: कॉलोनी नंबर-4 के रहने वाले शिकायतकर्ता मुन्ना कुमार ने CBI को दी शिकायत में बताया था कि 6 मई 2018 को उसने कॉलोनी नंबर-4 स्थित लाइट पॉइंट के पास लगाए गए पुलिस नाके को तोड़ दिया था। इसके बाद पुलिसकर्मी उसके घर पहुंचे और उसे कार्रवाई की धमकी देने लगे।

कार्रवाई से बचाने के लिए रिश्वत मांगी: मुन्ना का आरोप था कि पुलिसकर्मियों ने कहा कि उसकी मोटरसाइकिल जब्त कर ली जाएगी और उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया जाएगा। शिकायत के अनुसार, बाद में पुलिसकर्मियों ने कार्रवाई से बचाने के बदले उससे 5 हजार रुपये रिश्वत मांगी। परेशान होकर उसने CBI से संपर्क किया और पूरी घटना की शिकायत दर्ज कराई।

CBI ने जाल बिछाकर पकड़ा: शिकायत मिलने के बाद CBI ने मामले की जांच शुरू की। रिश्वत मांगने की पुष्टि होने पर CBI ने जाल बिछाया। शिकायतकर्ता को चिह्नित नोट देकर आरोपी के पास भेजा गया। जैसे ही रिश्वत के 5 हजार रुपये लिए गए, CBI की टीम ने तत्कालीन सब-इंस्पेक्टर सेवा सिंह को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया। जांच के दौरान कॉन्स्टेबल सुमित की भूमिका भी सामने आई, जिसके बाद उसे भी इस मामले में आरोपी बनाया गया।