अभया दिवस पर महिला डॉक्टरों की सुरक्षा का मुद्दा उठा: गया में रात की ड्यूटी में दो महिला कर्मियों की तैनाती की मांग, CCTV-पैनिक बटन पर जोर - Gaya News

अभया दिवस पर महिला डॉक्टरों की सुरक्षा का मुद्दा उठा:गया में रात की ड्यूटी में दो महिला कर्मियों की तैनाती की मांग, CCTV-पैनिक बटन पर जोर

गया3 घंटे पहले

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फेडरेशन ऑफ ऑब्स्टेट्रिक एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटीज ऑफ इंडिया (FOGSI) के आह्वान पर मगध ऑब्स्टेट्रिक एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटी (MOGS), गया की ओर से अभया दिवस मनाया गया। इस मौके पर IMA भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई।

कार्यक्रम में वर्ष 2024 में आरजी कर मेडिकल कॉलेज, कोलकाता में ड्यूटी के दौरान युवा महिला चिकित्सक के साथ हुई जघन्य घटना को याद किया गया। श्रद्धांजलि अर्पित की गई और घटना पर संवेदना व्यक्त की गई। ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस सुरक्षा व्यवस्था की मांग की गई।

रात की पाली में दो महिला कर्मियों की तैनाती की मांग

MOGS ने कहा कि अस्पतालों में महिला डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा को लेकर किसी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। खासकर रात की पाली में किसी महिला डॉक्टर, नर्स या स्वास्थ्यकर्मी को अकेले ड्यूटी पर नहीं रखा जाए। कम से कम दो महिला कर्मियों की तैनाती हो।

सोसाइटी ने संवेदनशील स्थानों पर महिला सुरक्षा गार्ड तैनात करने की मांग की। अस्पताल परिसर में 24 घंटे CCTV निगरानी की व्यवस्था हो। सेंट्रल सिक्योरिटी कंट्रोल रूम बनाया जाए। पैनिक बटन और त्वरित सुरक्षा प्रतिक्रिया की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए।

CCTV, सुरक्षा जांच और मॉक ड्रिल पर जोर

प्रवेश द्वार पर प्रभावी सुरक्षा जांच हो। वरिष्ठ अधिकारी नियमित रूप से रात में सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण करें। किसी घटना के बाद प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई और सुधारात्मक कदमों की जानकारी संबंधित कर्मचारियों को दी जाए। सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता जांचने के लिए नियमित मॉक ड्रिल भी कराई जाए।

राष्ट्रीय अस्पताल सुरक्षा प्रोटोकॉल बनाने की मांग

MOGS ने केंद्र सरकार से उच्चस्तरीय राष्ट्रीय सुरक्षा समिति बनाने का आग्रह किया। इसमें सरकारी और निजी अस्पतालों के साथ मेडिकल कॉलेज, IMA, FOGSI और अन्य चिकित्सा संगठनों के प्रतिनिधियों को शामिल करने की मांग की गई।

सोसाइटी ने कहा कि देशभर से सुझाव लेकर एक समान राष्ट्रीय अस्पताल सुरक्षा प्रोटोकॉल तैयार किया जाए। इसे सरकारी और निजी स्वास्थ्य संस्थानों में प्रभावी रूप से लागू कराया जाए।

डॉक्टरों के सम्मान की आम लोगों से अपील

सोसाइटी ने आम लोगों से भी डॉक्टरों को सम्मान देने की अपील की। कहा कि चिकित्सा की अपनी सीमाएं होती हैं। डॉक्टर अपनी योग्यता, ज्ञान और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार मरीज को बचाने का हर संभव प्रयास करता है, लेकिन हर मरीज को बचा पाना हमेशा संभव नहीं होता।

MOGS ने कहा कि डॉक्टरों में हिंसा और प्रताड़ना का भय बढ़ने से गंभीर मरीजों के इलाज पर असर पड़ सकता है। चिकित्सक जोखिम लेने के बजाय मरीज को तत्काल रेफर करने के लिए मजबूर हो सकते हैं। इसका नुकसान अंततः मरीज और समाज को ही होगा।

सोसाइटी ने कहा कि सुरक्षित चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी ही सुरक्षित मरीज और बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था की आधारशिला हैं।

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