'ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के किसी काम नहीं आए चीनी सैटेलाइट', पूर्व CDS अनिल चौहान का बड़ा खुलासा - chinese satellites proved of no use to pakistan during operation sindoor former cds
पूर्व सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने खुलासा किया कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान पाकिस्तान ने चीनी कमर्शियल सैटेलाइट्स का इस्तेमाल कर अपने हमलों के नतीजों का पता लगाने की कोशिश की, लेकिन वह बुरी तरह विफल रहा।

ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान की मदद नहीं कर पाए चीनी सैटेलाइट

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एएनआई, नई दिल्ली। भारत के पूर्व चीफ आफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने मंगलवार को नई दिल्ली के विवेकानंद सेंटर में आयोजित 'विमर्श' कार्यक्रम के दौरान एक बेहद चौंकाने वाला और रणनीतिक सच उजागर किया है।
उन्होंने बताया कि 'आपरेशन सिंदूर' के दौरान पाकिस्तान ने अपने हमलों के नतीजों का पता लगाने के लिए चीन की कमर्शियल सैटेलाइट्स का पुरजोर इस्तेमाल करने की कोशिश की थी, लेकिन वह बुरी तरह विफल रहा।
पाकिस्तान की यह नाकामी इस बात का पुख्ता सबूत है कि उसके हमले अपने लक्ष्यों को भेदने में पूरी तरह नाकामयाब रहे थे।
'अंधेरे' में था पाकिस्तान
सात मई, 2025 को पहलगाम में हुए कायरतापूर्ण आतंकी हमले के जवाब में भारत ने 'आपरेशन सिंदूर' को अंजाम दिया था। जनरल चौहान के मुताबिक, इस आपरेशन के बाद पाकिस्तान पूरी तरह से 'अंधेरे' में था और उसे यह तक पता नहीं था कि उसके हमलों का क्या परिणाम निकला है।
10 से 12 मई के बीच पाकिस्तानी हुक्मरान और सेना किसी भी तरह यह साबित करने के लिए सैटेलाइट तस्वीरों की तलाश कर रहे थे कि उन्होंने भारत में कोई नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने कहा, "पाकिस्तान पूरी तरह से अंधकार में था।
उसे अपने ही हमलों के नतीजों की कोई खबर नहीं थी और वह किसी भी कीमत पर सबूत जुटाने की फिराक में था।"
उन्होंने स्पष्ट किया कि हालांकि अमेरिका और चीन दोनों देशों की निजी कंपनियां कमर्शियल सैटेलाइट तस्वीरें मुहैया कराती हैं, लेकिन इसके लिए अनुबंध, भुगतान और एक निश्चित प्रतीक्षा अवधि की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।
पाकिस्तान ने चीनी सैटेलाइट्स से तस्वीरें हासिल करने की तमाम कोशिशें कीं, मगर जब हाथ कुछ नहीं लगा, तो वहां के अंदरूनी हलकों में यह अफवाहें उड़ने लगीं कि शायद भारत के दबाव में उनसे सच छुपाया जा रहा है।
युद्ध व राजनीति एक-दूसरे से अलग नहीं
जनरल चौहान ने प्रशिया के मशहूर जनरल कार्ल वान क्लाजविज के प्रसिद्ध कथन को दोहराते हुए कहा कि "राजनीति और युद्ध एक-दूसरे से अलग नहीं हैं।" राष्ट्रहित सर्वोपरि होता है और सशस्त्र बल उस हित की रक्षा करने वाले कई औजारों में से केवल एक हैं।
उन्होंने उरी, बालाकोट और आपरेशन सिंदूर का उदाहरण देते हुए इस बात पर विशेष जोर दिया कि सुरक्षा बलों को हर बार एक नई और अनूठी रणनीति अपनानी होगी, क्योंकि पुरानी या दोहराई गई रणनीतियों से सफलता की उम्मीद न के बराबर रह जाती है।
'गलती से किराना पहाड़ियों से टकरा गया होगा भारतीय ड्रोन'
जनरल अनिल चौहान ने स्पष्ट किया कि 'आपरेशन सिंदूर' के दौरान पाकिस्तान के सरगोधा और उसके आसपास मौजूद रडार की तलाश कर रहा एक भारतीय लोइटरिंग म्यूनिशन (ड्रोन) संभवतः किराना पहाड़ियों से टकरा गया होगा, जहां पाकिस्तान की परमाणु सुविधाएं स्थित हैं।
हालांकि, यह हमला जानबूझकर नहीं किया गया था। इजरायल में डिजाइन किया गया 'हारोप' ड्रोन रडार की तलाश में था, लेकिन किराना पहाड़ियों के पास पहुंचते ही उसका ईंधन खत्म हो गया था।
उन्होंने एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) ए.के. भारती के उस बयान की पुष्टि की, जिसमें उन्होंने पहले ही साफ किया था कि भारत ने किसी भी तरह से किराना पहाड़ियों को निशाना नहीं बनाया था।
यह घटना ईंधन की कमी के कारण हुई एक अनियोजित तकनीकी दुर्घटना थी। इस ड्रोन की क्षमता लगभग दो घंटे तक हवा में रहने की होती है और लक्ष्य न मिलने पर यह कहीं न कहीं टकरा जाता है।