वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी का विवादित बयान: बोले- 'अगर एक खून माफ होता तो CEC ज्ञानेश कुमार को गोली मार देता' | VIP Mukesh Sahni Threat Remarks Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar Bihar Politics Mahagathbandhan BJP

पटना। विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के प्रमुख मुकेश सहनी का मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर बड़ा बयान सामने आया है। मुकेश सहनी ने कहा कि अगर मुझे एक खून माफ होता तो ज्ञानेश कुमार को गोली मार देता।

पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुकेश सहनी ने कहा, "देश के कर्ताधर्ता प्रधानमंत्री यही करवा रहे हैं। लोकतंत्र को कुचला जा रहा है। बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के संविधान को कुचला जा रहा है। देश के 140 करोड़ लोगों की आंख में पट्टी बांधकर धकेला जा रहा है। चुनाव किसी नेता के लिए नहीं होता है। चुनाव देश की जनता के लिए होता है। जनता को पावर है कि अगर नेता सही से काम न करे तो कुर्सी से हटा दो।"

मुकेश सहनी ने कहा, "बंगाल में सेना को खड़ा करके और 27 लाख वोट काटकर सरकार बनाई गई है। बिहार चुनाव में 10-10 हजार रुपए खाते में डालकर चुनाव को अपने पक्ष में कर लिया गया। चुनाव आयोग भाजपा का आयोग बन चुका है। ज्ञानेश कुमार से मेरा कहना है कि समय हर दिन एक जैसा नहीं होता। उनको थोड़ी शर्म करनी चाहिए कि देश के संविधान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। अगर हमको एक खून माफ होता तो सबसे पहले ज्ञानेश कुमार को 'गोली मार देते' लेकिन क्या किया जाए हम संविधान को मानने वाले लोग हैं।"

मुकेश सहनी ने कहा, "आने वाले समय में ये (ज्ञानेश कुमार) छूटेंगे नहीं। 2029 में राहुल गांधी के नेतृत्व में देश में सरकार बनेगी और जेल जाने वाले पहले शख्स यही होंगे। जिन लोगों ने इनका साथ दिया है, वे सभी लोग जेल जाएंगे। अगर ये लोग जीवित रहेंगे, तो सब जेल जाएंगे। चुनाव क्यों कराया जा रहा है? चुनाव कराना बंद कर देना चाहिए। देश की जनता के करोड़ों रुपए खर्च हो रहे हैं जबकि इस तरह से जनादेश को अपने पक्ष में किया जा रहा है। तीन चुनाव आयुक्त क्यों बनाया है, एक ही रखते। इन सभी चीजों को देश की जनता को समझने की आवश्यकता है।

मुकेश सहनी की यह टिप्पणी उन खबरों के बीच आई है, जिनमें कहा गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीने की अवधि में कम से कम 14 बार मतदाता सूची और एसआईआर प्रक्रिया से जुड़े फैसलों और प्रक्रियाओं पर आपत्ति जताई थी।

इन आपत्तियों में मतदाताओं के नाम जोड़ने, हटाने और बहाल करने, फॉर्म 6 में बदलाव और मतदाता सूची के डेटा के रखरखाव और प्रबंधन से जुड़े मुद्दे शामिल थे।

हालांकि, चुनाव आयोग का कहना है कि एसआईआर से जुड़े फैसलों सहित सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से सर्वसम्मति से लिए गए थे। आयोग ने यह भी कहा कि विचार-विमर्श के दौरान व्यक्तिगत राय या टिप्पणियां आयोग के अलग फैसले नहीं माने जाते।