Chandrapur News: चंद्रपुर के जवराबोडी में धर्मांतरण आरोपों पर विवाद, जिलाधिकारी से जांच की मांग| Navbharat Live
Updated On: Jul 19, 2026 | 04:21 PM IST
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सार
Jawarabodi Village Dispute: चंद्रपुर जिले के जवराबोडी गांव में धर्मांतरण के आरोपों को लेकर विवाद सामने आया है। 32 नागरिकों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर मामले की जांच और कार्रवाई की मांग की है।

चंद्रपुर धर्मांतरण मामला- फाइल फोटो (सोर्सः सोशल मीडिया)
विस्तार
Chandrapur Religious Conversion: चंद्रपुर तालुका क्षेत्र के जवराबोडी गांव में धर्मांतरण के आरोपों को लेकर सामाजिक विवाद सामने आया है। गांव के 32 नागरिकों ने चंद्रपुर जिलाधिकारी को लिखित ज्ञापन सौंपकर मामले की जांच की मांग की है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि कुछ बौद्ध परिवारों को आर्थिक प्रलोभन देकर ईसाई धर्म स्वीकार करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। शिकायत के अनुसार, करीब चार वर्ष पहले गांव के चार परिवारों ने ईसाई धर्म स्वीकार किया था।
इसके बाद बौद्ध पंचायत समिति की ओर से सामाजिक व्यवहार को लेकर कुछ निर्णय लिए जाने की बात कही गई है। हाल ही में इन परिवारों द्वारा समाज की सामुदायिक संपत्ति पर अधिकार जताने से विवाद और बढ़ने का दावा किया गया है।
दोनों पक्षों के बयान दर्ज करेगी पुलिस
ज्ञापन में गौतम हरिराम राऊंडकर पर समाज में विभाजन पैदा करने, पैसों का लालच देकर धर्मांतरण को बढ़ावा देने और सामाजिक तनाव उत्पन्न करने के आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं ने मामले की गहन जांच कर संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है। प्रशासन की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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पहले भी सामने आया था ऐसा मामला
करीब 22-23 वर्ष पहले भिसी पुलिस थाना क्षेत्र के वाकरला गांव में भी धर्मांतरण का मामला सामने आया था। उस समय कुछ पत्रकारों की पहल के बाद धर्मांतरण रोकने की बात कही गई थी। स्थानीय लोगों के अनुसार, चिमूर के साथ-साथ भिसी, शंकरपुर, कोलारी, वाकरला और जवराबोडी क्षेत्र में भी कुछ लोगों द्वारा ईसाई धर्म स्वीकार किए जाने की घटनाएं पहले सामने आ चुकी हैं।
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प्रशासन ने शुरू की पड़ताल
भिसी के सहायक पुलिस निरीक्षक मंगेश भोंगाडे ने बताया कि जवराबोडी के बौद्ध समुदाय की ओर से एक आवेदन प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी पसंद के धर्म की प्रार्थना करने का अधिकार है और इस पर कानूनी रूप से प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता, गांव का दौरा कर दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जाएंगे और उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
