आसान लोन और CIBIL सुधारने का झांसा: दुर्ग में करोड़ों के फाइनेंस फ्रॉड का खुलासा,मुख्य आरोपी गिरफ्तार, पुलिस जांच तेज,100 से ज्यादा पीड़ित सामने आए - durg-bhilai News

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में युवाओं को आसान लोन, अतिरिक्त कमाई और खराब CIBIL स्कोर सुधारने का लालच देकर करोड़ों रुपये के कथित आर्थिक फर्जीवाड़े का बड़ा मामला सामने आया है। पद्मनाभपुर थाना क्षेत्र में दर्ज इस मामले में अब तक 100 से अधिक लोग शिकायत लेकर

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शुरुआती जांच में पुलिस को संगठित गिरोह के सक्रिय होने के संकेत मिले हैं। मुख्य आरोपी ऋषभ शर्मा न्यायालय में आत्मसमर्पण कर चुका है, जबकि उसके अन्य साथियों की तलाश जारी है।

पुलिस के मुताबिक, आरोपी ऐसे युवाओं को निशाना बनाता था जिनका CIBIL स्कोर कमजोर होता था या जिन्हें तत्काल पैसों की आवश्यकता होती थी। उन्हें भरोसा दिलाया जाता था कि उनके नाम पर इलेक्ट्रॉनिक सामान फाइनेंस कराया जाएगा, बदले में नकद राशि दी जाएगी और लोन की पूरी ईएमआई आरोपी स्वयं जमा करेगा। साथ ही यह भी दावा किया जाता था कि समय पर ईएमआई जमा होने से उनका CIBIL स्कोर भी बेहतर हो जाएगा।

आधार-पैन से फाइनेंस, सामान आरोपी के कब्जे में

पीड़ितों ने बताया कि आरोपी ने इसी झांसे में कई युवाओं से आधार कार्ड और पैन कार्ड लेकर उनके नाम पर फाइनेंस कंपनियों से महंगे इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदवाए। लेकिन खरीदारी पूरी होते ही सामान सीधे आरोपी और उसके साथियों के कब्जे में चला जाता था। पीड़ितों को न तो सामान मिलता था और न ही बाद में ईएमआई की जिम्मेदारी निभाई जाती थी।

शिकायतकर्ताओं के अनुसार आरोपी अपने साथियों के साथ अनामिका श्रृंगार (महाराज चौक), एवन इलेक्ट्रॉनिक (सुपेला), रिलायंस डिजिटल (सूर्या मॉल एवं सुपेला), जयंत इलेक्ट्रॉनिक और जैन इंटरप्राइजेज समेत कई दुकानों से उनके नाम पर इलेक्ट्रॉनिक सामान फाइनेंस कराता था।

पहले भरोसा, फिर धोखा

पीड़ितों का कहना है कि शुरुआत में आरोपी कुछ ईएमआई जमा करता था ताकि लोगों का विश्वास बना रहे। लेकिन कुछ महीनों बाद उसने किस्तें भरना बंद कर दिया। जब लोग पैसे की मांग करते तो उनसे कहा जाता कि पहले और सामान फाइनेंस कराओ, तभी पुरानी ईएमआई भरी जाएगी। इस तरह लगातार लोगों को नए लोन लेने के लिए प्रेरित किया जाता रहा।

रिकवरी एजेंट पहुंचे घर, बढ़ा आर्थिक संकट

जब किस्तें जमा होना बंद हुईं तो फाइनेंस कंपनियों के रिकवरी कर्मचारी सीधे पीड़ितों के घर पहुंचने लगे। कई युवकों ने बताया कि उनके परिवारों पर किस्त जमा करने का दबाव बनाया गया और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।

अपनी साख बचाने और डिफॉल्टर बनने से बचने के लिए कई लोगों को रिश्तेदारों और परिचितों से उधार लेकर ईएमआई जमा करनी पड़ी। इससे वे भारी आर्थिक संकट में फंस गए।

100 से अधिक शिकायतें, 25-30 एफआईआर दर्ज

पीड़ितों में रूपेश साहू, चुरेंद्र साहू, रोहित जगने, रोमल सोनी, गजेंद्र साहू, फनेश्वर मिश्रा और दुष्यंत मानिकपुरी समेत कई युवकों ने आरोप लगाया कि उनके नाम पर लोन लेकर सामान खरीदा गया, लेकिन सामान उन्हें कभी नहीं मिला।

पद्मनाभपुर थाना में अब तक इस मामले में करीब 25 से 30 अपराध दर्ज किए जा चुके हैं, जबकि 100 से अधिक शिकायतें पुलिस को प्राप्त हुई हैं। पुलिस का मानना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ पीड़ितों की संख्या और बढ़ सकती है।

दो महीने पहले दर्ज हुई थी एफआईआर

इस संगठित आर्थिक धोखाधड़ी के मामले में करीब दो महीने पहले एफआईआर दर्ज की गई थी। शिकायत दर्ज होने के बाद मुख्य आरोपी ऋषभ शर्मा लगभग 15 दिनों तक फरार रहा और घर में ताला लगाकर गायब हो गया। बाद में उसने 24 जुलाई को न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया।

इसके बाद पद्मनाभपुर पुलिस ने उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ शुरू की। मामले में दीपेश जोशी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 35(3) के तहत कार्रवाई की गई है, जबकि अनिरुद्ध कुमार अब भी फरार बताया जा रहा है।

बैंक रिकॉर्ड और मोबाइल खरीद के बिल जब्त

दुर्ग सीएसपी हर्षित मेहर ने बताया कि आरोपी के मेमोरेंडम के आधार पर पुलिस ने कई अहम दस्तावेज जब्त किए हैं। इनमें विभिन्न बैंकों की पासबुक, चेकबुक, बैंक खातों से जुड़े रिकॉर्ड और बड़ी संख्या में मोबाइल खरीद के बिल शामिल हैं। कई बिल ऐसे लोगों के नाम पर मिले हैं जिनके पास से ये दस्तावेज बरामद हुए।

पुलिस ने सात से आठ बैंकों को नोटिस जारी कर बैंक स्टेटमेंट और लेनदेन का पूरा ब्यौरा मांगा है, ताकि पैसों के प्रवाह और पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।

पूरे नेटवर्क की जांच जारी

सीएसपी हर्षित मेहर ने बताया कि अब तक एक मुख्य आरोपी गिरफ्तार हो चुका है, एक आरोपी को नोटिस देकर पूछताछ के लिए बुलाया गया है, जबकि एक अन्य आरोपी अभी फरार है। शुरुआती जांच में पूरे गिरोह के सक्रिय होने की आशंका सामने आई है। बैंक रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्यों और वित्तीय लेनदेन की जांच पूरी होने के बाद कई और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

पुलिस फिलहाल सभी शिकायतों का मिलान कर रही है और यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित फर्जीवाड़े में कुल कितनी राशि का लेनदेन हुआ तथा कितने लोगों को आर्थिक नुकसान पहुंचा।

एसपी बोले- जिले का पहला संगठित लोन फ्रॉड

दुर्ग पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल ने कहा कि जिले में इस प्रकार का यह पहला संगठित आर्थिक धोखाधड़ी का मामला है। इसकी गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच टीम गठित की गई है। अब तक दुर्ग, बालोद और बेमेतरा से भी पीड़ित सामने आए हैं।

पुलिस को आशंका है कि जांच आगे बढ़ने के साथ पीड़ितों और आरोपियों दोनों की संख्या बढ़ सकती है। फिलहाल फरार आरोपियों की तलाश और पूरे नेटवर्क की जांच जारी है।