'छात्रों को शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार': CJI सूर्यकांत ने BCI को लगाई फटकार, पूछा- बच्चों को कौन रोक सकता है?
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा की ओर से जारी किए गए उन निर्देशों की कड़ी निंदा की। दरअसल, भारत के मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ विरोध अभियान के चलते नालसर विश्वविद्यालय के छात्रों का नामांकन रोकने का आदेश दिया गया था।
मुख्य न्यायाधीश ने क्या कहा?
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि छात्रों को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है और उन्होंने इस मामले में बीसीआई की भूमिका पर सवाल उठाया। मुख्य न्यायाधीश ने कहा,'बीसीआई बेवजह कार्रवाई कर रहा है। अगर छात्रों के पास विरोध करने का कोई कारण है, तो उन्हें विरोध करने का अधिकार है। छात्र मुझे पत्र भी लिख सकते थे। यह छात्रों और मेरे बीच संवाद है। वे (बीसीआई) कौन होते हैं बेवजह मुद्दा उठाने वाले? यह बिल्कुल अनुचित है। बीसीआई का इससे कोई लेना-देना नहीं है।'
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छात्रों को कौन रोक सकता है?
मुख्य न्यायाधीश ने आगे कहा, 'मैं खुद छात्र जीवन के दौरान छात्र गतिविधियों में शामिल रहा हूं। वे शांतिपूर्वक अपनी आवाज उठा रहे हैं, उन्हें इसकी अनुमति मिलनी चाहिए। भले ही वे गलत हों, फिर भी उन्हें विरोध करने का अधिकार है। उन्हें कौन रोक सकता है? जब तक वे कानूनी और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठा रहे हैं, उनकी बात सुनी जानी चाहिए। बार काउंसिल या कोई अन्य संस्था इसमें हस्तक्षेप क्यों करे?'
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मुख्य न्यायाधीश की यह टिप्पणी कब आई?
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने ये टिप्पणियां तब कीं जब वरिष्ठ अधिवक्ता के. परमेश्वर ने मौखिक रूप से बीसीआई अध्यक्ष के निर्देशों के विरुद्ध दायर एक रिट याचिका का जिक्र किया। परमेश्वर ने बताया कि हालांकि बीसीआई अध्यक्ष ने बाद में निर्देश वापस ले लिए, लेकिन याचिका पर कार्रवाई का आधार अभी भी बना हुआ है।
वरिष्ठ अधिवक्ता ने बीसीआई को लेकर क्या कहा?
उन्होंने आगे कहा कि इस घटना से बीसीआई अध्यक्ष के कामकाज के तरीके पर सवाल उठते हैं। उन्होंने बताया कि बीसीआई अध्यक्ष के कार्यों को अधिकृत करने वाली किसी भी परिषद बैठक का कोई जिक्र नहीं है। केरल के एक बीसीआई सदस्य ने पहले ही इस कदम का विरोध किया है। परमेश्वर ने कहा, 'बार काउंसिल का कामकाज ही एक गंभीर मुद्दा है।' बीसीआई की ओर से पेश वकील राधिका गौतम ने अदालत को सूचित किया कि विवादित निर्णय वापस ले लिया गया है।