CJP प्रोटेस्ट से वायरल हुए मोहम्मद इरफान कितने पढ़े-लिखे हैं, कहां से सीखी इतिहास और राजनीति की बारीकियां?
Published: Wednesday, July 29, 2026, 15:26 [IST]
Mohammad Irfan Education: दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए CJP विरोध प्रदर्शन के दौरान एक आम मजदूर के इंटरव्यू ने सोशल मीडिया पर खूब चर्चा बटोरी। दिल्ली की सावदा जेजे कॉलोनी में रहने वाले 35 वर्षीय मोहम्मद इरफान की बातों ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा। पेशे से फेरी लगाने वाले इरफान ने संविधान, लोकतंत्र, मजदूरों के अधिकार और समाज से जुड़े कई मुद्दों पर अपनी राय रखी।
खास बात यह है कि इरफान ने बताया कि वह इतिहास, राजनीति और साहित्य जैसे विषयों के बारे में इंटरनेट की मदद से जानकारी जुटाते हैं। उनके वायरल इंटरव्यू के बाद उनकी शिक्षा और ज्ञान को लेकर भी सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे। आइए जानते हैं, आखिर कितने पढ़े-लिखे हैं मोहम्मद इरफान।
स्कूल की पढ़ाई पूरी नहीं कर पाए इरफान
मोहम्मद इरफान के मुताबिक, उन्होंने स्कूल जाकर पढ़ाई पूरी नहीं की है। उन्होंने यह भी बताया कि वह सामान्य तरीके से पढ़-लिख नहीं सकते। ऐसे में जानकारी हासिल करने के लिए वह अपने स्मार्टफोन की मदद लेते हैं। इरफान गूगल वॉइस सर्च के जरिए अलग-अलग विषयों के बारे में जानकारी सुनते हैं। इतिहास, राजनीति, साहित्य और देश-दुनिया की मौजूदा घटनाओं को समझने के लिए वह इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं। किसी मुद्दे पर अपनी राय बनाने से पहले वह अलग-अलग स्रोतों से उसके बारे में जानकारी लेने की कोशिश करते हैं।
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भगत सिंह और कविताओं से मिली सोच
इरफान ने अपनी सोच पर भगत सिंह के विचारों का असर भी बताया। इसके अलावा कवि दुष्यंत कुमार और अदम गोंडवी की कविताओं ने भी उनके नजरिए को प्रभावित किया है। यही वजह है कि औपचारिक शिक्षा नहीं होने के बावजूद वह सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी बात रखने की कोशिश करते हैं।
मजदूरों की आवाज उठाने पहुंचे थे CJP प्रोटेस्ट में
इरफान ने बताया कि वह किसी राजनीतिक पार्टी या छात्र संगठन का हिस्सा नहीं हैं। वह जंतर-मंतर पर मजदूरों और गरीब लोगों से जुड़े मुद्दों को उठाने के लिए पहुंचे थे। उनका कहना है कि सरकारी रिकॉर्ड में न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपये बताया जाता है, लेकिन कई मजदूरों को 10 से 11 घंटे काम करने के बाद भी सिर्फ 13 से 14 हजार रुपये मिलते हैं। उनके अनुसार बेरोजगारी के कारण कई लोग कम वेतन पर काम करने को मजबूर हैं। नौकरी जाने के डर से मजदूर अपनी समस्याओं के खिलाफ आवाज उठाने से भी बचते हैं। इरफान का कहना है कि सरकार को मजदूरों के लिए सही वेतन और बेहतर काम की स्थिति सुनिश्चित करने पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।
आर्थिक परेशानी का भी किया जिक्र
वायरल इंटरव्यू में इरफान ने अपनी निजी परेशानियों के बारे में भी बात की। उन्होंने बताया कि पिछले दो साल से आर्थिक दिक्कतों और भविष्य की चिंता के कारण वह मानसिक तनाव और अवसाद से जूझ रहे थे। उन्होंने आयुष्मान भारत योजना को लेकर भी अपनी चिंता जाहिर की। उनका कहना था कि कई लोगों के पास योजना का कार्ड होने के बावजूद इलाज के दौरान कागजी प्रक्रिया और मंजूरी में परेशानी आती है।
राजनीति में जाने का इरादा नहीं
इरफान ने कहा कि वह राजनीति में आने की इच्छा नहीं रखते। उनका मानना है कि सरकार को मजदूरों, झुग्गी-बस्तियों में रहने वाले लोगों और ग्रामीण इलाकों के लोगों की समस्याओं पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। वह महात्मा गांधी के अहिंसा के विचारों में विश्वास रखते हैं और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने के पक्ष में हैं।
इंटरव्यू वायरल होने के बाद घर पहुंचे लोग
जंतर-मंतर पर इरफान का इंटरव्यू सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। बड़ी संख्या में लोगों ने इसे देखा और शेयर किया। कई लोगों ने उनकी बातों की तारीफ भी की। इंटरव्यू वायरल होने के बाद कुछ लोग उनकी कहानी जानने के लिए उनके घर तक पहुंचे। सोशल मीडिया पर बढ़ती चर्चा के बीच लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी भी मोहम्मद इरफान से मिलने उनके घर पहुंचे। मुलाकात के दौरान दोनों के बीच बातचीत हुई और बताया गया कि राहुल गांधी ने इरफान को उनके परिवार के साथ संसद आने का न्योता भी दिया।
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