धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेने में कैसे सफल हुई CJP? आशुतोष रांका ने बताई पूरी कहानी

Sep 03, 2026 05:47 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली।

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यह पूरा आंदोलन मई 2026 में आयोजित हुई नीट (NEET-UG) परीक्षा के पेपर लीक प्रकरण से भड़का। इस घटना से लाखों मेडिकल परीक्षार्थियों का भविष्य अधर में लटक गया था।

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेने में कैसे सफल हुई CJP? आशुतोष रांका ने बताई पूरी कहानी

इस पूरे आंदोलन में आशुतोष रांका ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

भारत के शिक्षा तंत्र में भ्रष्टाचार और पेपर लीक के खिलाफ हाल के वर्षों में देश का सबसे बड़ा युवा आंदोलन देखने को मिला। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) नामक एक संगठन के नेतृत्व में हुए इस विरोध प्रदर्शन ने न केवल देश भर के जेन-जी (Gen-Z) युवाओं को एकजुट किया, बल्कि केंद्र सरकार को अपनी रणनीतियों में बदलाव करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाने पर मजबूर कर दिया। यह एक ऐसा राजनीतिक दबाव था जो मुख्य विपक्षी दल भी अब तक नहीं बना पाए थे।

यह पूरा आंदोलन मई 2026 में आयोजित हुई नीट (NEET-UG) परीक्षा के पेपर लीक प्रकरण से भड़का। इस घटना से लाखों मेडिकल परीक्षार्थियों का भविष्य अधर में लटक गया था।

इस आंदोलन का नाम कॉकरोच जनता पार्टी रखना भी काफी दिलचस्प है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत द्वारा एक सुनवाई के दौरान कॉकरोच की तरह युवाओं के संदर्भ में की गई टिप्पणी को छात्रों ने एक प्रतीक के रूप में अपना लिया। युवाओं ने इस नाम को भ्रष्टाचार के खिलाफ न झुकने के प्रतीक के तौर पर इस्तेमाल करते हुए सीजेपी का गठन किया। जून से जुलाई के बीच दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी के नेतृत्व में 37 दिनों तक चला धरना 2020-21 के किसान आंदोलन के बाद सबसे बड़े जन आंदोलनों में से एक बन गया।

इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक इंटरव्यू में सीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने अब तक के सफर पर विस्तार से चर्चा की है। रांका ने बताया कि 20 जुलाई तक सरकार ने छात्रों से संवाद करने या उनकी बातें सुनने की कोई कोशिश नहीं की। उन्हें वायरस और आतंकवादी तक कहा गया। जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण ढंग से शुरू हुआ आंदोलन तब हिंसक हो गया जब दिल्ली पुलिस ने लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले और पेलेट गन का इस्तेमाल किया, जिससे कई छात्र घायल हो गए।

विपक्ष से तुलना और 'B-टीम' वाला मजाक

आशुतोष रांका ने कहा कि जब लोगों ने यह कहना शुरू किया कि सीजेपी को आसानी से सफलता मिल गई और मजाक में इसे भाजपा की B-टीम कहा गया तो रांका ने इसे पूरी तरह अनुचित बताया। उन्होंने कहा, "लोग केवल अंतिम परिणाम देखते हैं, उस प्रक्रिया और संघर्ष को नहीं जो हमारे सौरव दास और लीगल हेड रत्ना सिंह ने सरकार के साथ महीनों तक की वार्ताओं और दिल्ली में लामबंदी के दौरान झेला।"

क्यों हुई धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग?

25 जुलाई को सरकार द्वारा आश्वासन दिए जाने के बाद जंतर-मंतर का धरना समाप्त हुआ। धर्मेंद्र प्रधान को केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से हटाया गया और उनके स्थान पर प्रह्लाद जोशी को जिम्मेदारी सौंपी गई। सरकार ने वादा किय कि बिना आपराधिक पृष्ठभूमि वाले आंदोलनकारी छात्रों पर दर्ज पुलिस केस रद्द किए जाएंगे। पुलिस कार्रवाई में घायल हुए छात्रों को वित्तीय सहायता दी जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप

मुकदमों की वापसी में हो रही देरी से नाराज होकर सीजेपी ने 5 सितंबर को दिल्ली में दूसरे बड़े मार्च की घोषणा कर दी थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए 2 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का प्रयोग किया और निर्दोष छात्र-प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर (FIR) को तुरंत रद्द करने का ऐतिहासिक आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद सीजेपी के सौरव दास ने अदालत को आश्वस्त किया कि 5 सितंबर को प्रस्तावित उनका दूसरा मार्च अब रद्द कर दिया गया है।

रांका ने कहा, "विश्वास रातों-रात हासिल नहीं होता, इसके लिए बहुत कुछ करना पड़ता है। लेकिन जब देश की सर्वोच्च अदालत में कोई बात दर्ज हो जाती है तो हमें पूरी उम्मीद है कि सरकार और दिल्ली पुलिस अपने वादों पर खरी उतरेगी। देश में अभी भी लोकतंत्र जिंदा है और न्यायपालिका जैसी संस्थाओं के प्रति हमारा पूरा सम्मान है।"