धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से पहले कुर्सी बचाने की हुई पूरी कोशिश! सरकार ने दिया था ऑफर लेकिन CJP ने ठुकराया

Time Updated: Tuesday, July 28, 2026, 10:33 [IST]

NEET पेपर लीक को लेकर चले लंबे छात्र आंदोलन के बीच धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से पहले पर्दे के पीछे कई दौर की बातचीत हुई। अब सामने आई जानकारी के मुताबिक, केंद्र सरकार ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रतिनिधियों सौरव दास और आशुतोष रांका के सामने एक ऑप्शन रखा था।

सूत्रों के मुताबिक, सरकार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को कैबिनेट से हटाने की बजाय उनका मंत्रालय बदलने पर विचार कर रही थी। लेकिन CJP ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया और कहा कि उनकी मांग सिर्फ एक थी कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हो।

Dharmendra Pradhan Resignation

सरकार ने क्या प्रस्ताव दिया था?

25 जुलाई को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ CJP के प्रतिनिधिमंडल की अहम बैठक हुई। इंडिया टुडे के सूत्रों के मुताबिक सरकारी बातचीत में तर्क दिया गया कि किसी मंत्री का पोर्टफोलियो बदलना या उसे हटाना पूरी तरह से प्रधानमंत्री का फैसला होता है।

लेकिन CJP ने इस प्रस्ताव को तुरंत खारिज कर दिया। उनकी एक ही जिद्द थी कि धर्मेंद्र प्रधान को पद छोड़ना ही पड़ेगा। आखिरकार सरकार को झुकना पड़ा और धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

आखिर इस्तीफे पर ही क्यों अड़ा रहा CJP?

CJP का कहना था कि NEET पेपर लीक विवाद की नैतिक जिम्मेदारी शिक्षा मंत्री की है। इसलिए सिर्फ विभाग बदलने से जवाबदेही तय नहीं होगी। प्रतिनिधिमंडल ने सरकार को साफ संदेश दिया कि "मंत्रालय बदलना समाधान नहीं है। जवाबदेही तय करने के लिए इस्तीफा ही जरूरी है।"

इसी रुख के बाद बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी और बाद में धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। हालांकि रिपोर्ट ये भी थी कि धर्मेंद्र प्रधान ने आंदोलन की शुरुआत में इस्तीफे देने की बात कही थी।

इस्तीफे के बाद क्या बोले धर्मेंद्र प्रधान?

27 जुलाई को जब धर्मेंद्र प्रधान संसद परिसर पहुंचे, तो बीजेपी और एनडीए सांसदों ने उनका जोरदार स्वागत किया। संसद के मकर द्वार पर सांसदों का जमावड़ा लगा था। नेताओं ने उन्हें टोपी पहनाई और नारेबाजी करते हुए संसद के अंदर लेकर गए। पार्टी यह संदेश देना चाहती थी कि संकट की इस घड़ी में पूरी एनडीए उनके साथ खड़ी है।

संसद परिसर में एक दिलचस्प वाकया भी देखने को मिला। कांग्रेस नेता जयराम रमेश, जो एक दिन पहले तक इस्तीफे की मांग कर रहे थे, वे धर्मेंद्र प्रधान के पास पहुंचे। जयराम रमेश ने सहानुभूति जताते हुए कहा, "होता है, राजनीति में यह सब चलता रहता है।" धर्मेंद्र प्रधान ने तुरंत पलटकर जवाब दिया, "कुछ नहीं हुआ है भाई! मैं जमीनी स्तर का स्ट्रीट फाइटर हूं, कोई एसी कमरे में बैठने वाला नेता नहीं।"

अब संसद में किस बिल पर नजर है?

इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम के बीच संसद में Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026 पर चर्चा की तैयारी भी शुरू हो गई। सरकार का कहना है कि नया संशोधन कानून पेपर लीक के मामलों में पहले से कहीं ज्यादा सख्त होगा।

प्रस्तावित बदलावों में शामिल हैं...

  • अधिकतम सजा 5 साल से बढ़ाकर 10 साल करने का प्रस्ताव।
  • ₹50 लाख तक जुर्माना लगाने का प्रावधान।
  • परीक्षा में धोखाधड़ी के मामलों में कड़ी कानूनी कार्रवाई।
  • युवाओं के आंदोलन के बाद परीक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने पर जोर।