'कपिल शर्मा की तरह हंसाना ही काम नहीं',अब राहुल गांधी पर क्यों भड़के अवध ओझा? CJP और AAP पर भी खोला राज
Published: Sunday, August 16, 2026, 15:20 [IST]
छात्रों के बीच ओझा सर के नाम से मशहूर मशहूर शिक्षक अवध ओझा ने देश के बड़े राजनीतिक घटनाक्रमों पर अपनी बेबाक राय रखी है। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से जुड़े बयान और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के रुख पर उन्होंने सीधी बात की। अवध ओझा का मानना है कि देश में विपक्ष की भूमिका सिर्फ लोगों को हंसाने या मनोरंजन करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने साफ कहा कि आज की युवा पीढ़ी (Gen-Z) काफी समझदार है। वे हलकी-फुलकी बातों पर मुस्कुरा तो सकते हैं, लेकिन ऐसी बातों को गंभीरता से नहीं लेते। अगर राजनीति में सिर्फ हंसाने का काम होगा तो यह किसी कॉमेडी शो जैसा बन जाएगा।
विपक्ष का असली काम और राहुल गांधी को नसीहत
अवध ओझा ने राजनीति में विपक्ष की जिम्मेदारी पर जोर देते हुए राहुल गांधी के अंदाज़ पर चर्चा की। उनका कहना है कि जनभावनाओं का नेतृत्व करना एक बड़ी जिम्मेदारी है। अवध ओझा ने कहा,
"नेता प्रतिपक्ष का काम सिर्फ लोगों का मनोरंजन करना नहीं है। उन्हें देश को एक मजबूत और सही दिशा देनी होती है। कपिल शर्मा अपने शो में लोगों को हंसाते हैं, वो उनका काम है। लेकिन देश के बड़े नेताओं को इस फर्क को समझना होगा और अपनी बात गंभीरता से रखनी होगी।"
उनका इशारा साफ था। विपक्ष के बड़े नेताओं से सिर्फ बयानबाजी नहीं, बल्कि गंभीर मुद्दों पर विजन और दिशा की उम्मीद की जाती है।
अवध ओझा ने कहा,
"सिर्फ राहुल जी ही जानते हैं कि उनकी सोच क्या है, लेकिन मैं एक बात जानता हूं, यह सोच ही है जो इंसान को बनाती है। अगर PM मोदी आज प्रधानमंत्री के पद पर हैं, तो यह उनकी सोच की वजह से है, और अगर राहुल जी आज विपक्ष में हैं, तो यह उनकी सोच की वजह से है। अगर आपकी सोच ऊंची है, तो रास्ते खुलते रहेंगे।"
अवध ओझा बोले- "मैं राहुल गांधी से थोड़ा असहमत हूं"
अवध ओझा ने राहुल गांधी के प्रति पूरी तरह नकारात्मक रुख नहीं अपनाया। उन्होंने उन्हें विपक्ष का नेता और समझदार व्यक्ति बताया। लेकिन स्वतंत्रता दिवस समारोह में कांग्रेस नेताओं की गैर-मौजूदगी को लेकर अपनी असहमति जाहिर की।
उन्होंने कहा,
"राहुल गांधी से मैं कुछ हद तक असहमत हूं। वैचारिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन जब देश और स्वतंत्रता दिवस की बात आती है तो राजनीति को पीछे रखना चाहिए।"
अवध ओझा ने कहा कि विचार अलग हो सकते हैं, लेकिन इससे एक-दूसरे को दुश्मन मानने की जरूरत नहीं है। उनके मुताबिक राष्ट्रीय मौकों पर राजनीतिक मतभेद से ऊपर उठना चाहिए।
अवध ओझा ने कहा,
"मैं कहूंगा कि हमें अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेताओं की जरूरत है। वह गंभीर बातों को भी मजाक के साथ पेश करते थे। अटल जी एक बात कहते थे जो मुझे बहुत पसंद थी, राजनीति में शब्द सबसे बड़े हथियार होते हैं। अगर आपको शब्दों का इस्तेमाल करना नहीं आता, तो आप राजनीति में कभी खुद को स्थापित नहीं कर पाएंगे। इसलिए, नेता जितना बड़ा हो, उसे यह बात उतनी ही ज्यादा ध्यान में रखने की जरूरत है कि उसकी बातों और बयानों में मजाक हो..."
लाल किले पर क्यों जाना चाहिए था राहुल-खड़गे?
अवध ओझा ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी की स्वतंत्रता दिवस समारोह में मौजूदगी को जरूरी बताया। उनका कहना था कि लाल किले का कार्यक्रम किसी एक राजनीतिक दल का कार्यक्रम नहीं है।
उन्होंने कहा, "स्वतंत्रता दिवस पूरे देश का मौका है। इसे किसी पार्टी के कार्यक्रम की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे को वहां जरूर मौजूद रहना चाहिए था।"
ओझा ने यह भी कहा कि उन्होंने एक कार्यक्रम में लोगों को इस मुद्दे पर काफी परेशान देखा। उनके मुताबिक लोकतंत्र में विचारों का टकराव स्वाभाविक है, लेकिन वैचारिक मतभेद को दुश्मनी में बदलना ठीक नहीं है।
अवध ओझा ने कहा,
"नहीं, Gen Z बहुत स्मार्ट ग्रुप है। वे ऐसी बातों पर थोड़ा हंस सकते हैं, लेकिन वे उन्हें सीरियसली नहीं लेंगे। फिर यह कपिल शर्मा के एक्ट जैसा हो जाएगा। कपिल शर्मा जी भी यही करते हैं, वह लोगों को हंसाते हैं। लेकिन विपक्ष के नेता को सिर्फ लोगों को हंसाना नहीं चाहिए; उन्हें देश को एक दिशा भी देनी होगी। यह ध्यान में रखना होगा।"
PM मोदी के विदेशी नेताओं को गले लगाने पर क्या बोले?
जब उनसे पूछा गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दूसरे देशों के राष्ट्राध्यक्षों को गले लगाना सही है या नहीं, तो अवध ओझा ने इसे गलत नहीं माना। उन्होंने कहा, "दुनिया के कई देशों के नेता एक-दूसरे से मिलते हैं और गले भी लगते हैं। इसमें अपने आप में कुछ गलत नहीं है। हां, किसी पर जबरदस्ती नहीं करनी चाहिए।" यानी इस मुद्दे पर ओझा का फोकस व्यवहार से ज्यादा सहमति और सम्मान पर था।
CJP का AAP से कनेक्शन है या नहीं?
अवध ओझा से कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP और आम आदमी पार्टी के कथित कनेक्शन को लेकर भी सवाल किया गया। उनसे जंतर-मंतर के प्रदर्शन में प्रधानमंत्री मोदी के लिए इस्तेमाल की गई आपत्तिजनक भाषा पर भी राय मांगी गई।
ओझा ने किसी सीधे राजनीतिक कनेक्शन से इनकार किया। उन्होंने कहा,
"मुझे ऐसा कोई कनेक्शन नहीं लगता। आम आदमी पार्टी ने उन्हें काफी समर्थन दिया है, लेकिन सिर्फ समर्थन के आधार पर दोनों के बीच सीधा कनेक्शन मानना सही नहीं होगा।"
उन्होंने अभद्र भाषा के बढ़ते इस्तेमाल पर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि फिल्मों और सोशल मीडिया में जिस तरह की भाषा दिखाई देती है, उसका असर बच्चों और युवाओं पर भी पड़ता है। इसलिए सार्वजनिक जीवन में भाषा को लेकर सावधानी जरूरी है।
CJP और आम आदमी पार्टी के कनेक्शन पर क्या बोले अवध ओझा?
जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शनों और युवाओं द्वारा बनाई गई 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के आम आदमी पार्टी से कथित जुड़ाव पर भी उन्होंने अपना पक्ष रखा। उन्होंने माना कि आम आदमी पार्टी का समर्थन युवाओं को मिला है, लेकिन दोनों के बीच किसी सीधे कनेक्शन की बात को खारिज कर दिया। जंतर-मंतर पर भाषा के गिरते स्तर पर उन्होंने कहा कि जब फिल्मों और साहित्य में अभद्र बोली दिखाई जाएगी, तो युवा भी वहीं से सीखेंगे।
CJP जैसी नई युवा पार्टियों के भविष्य को लेकर अवध ओझा काफी आशान्वित दिखे। उन्होंने कहा कि युवाओं का राजनीति में आगे आना एक सकारात्मक कदम है। उन्होंने सुझाव दिया कि इन युवाओं के पास जोश, समझ और स्पष्ट मकसद सब कुछ है। लेकिन उन्हें सही दिशा में काम करने के लिए अपने साथ एक वरिष्ठ और अनुभवी लोगों का मार्गदर्शक मंडल बनाना चाहिए। तजुर्बेकार लोगों की सलाह मिलने से यह युवा संगठन ज्यादा असरदार तरीके से देशहित में काम कर पाएगा।