बेटी ने CM पर साधा निशाना, तो मंत्री मां की ही कैबिनेट से हो गई छुट्टी; जानें पूरा विवाद

हैदराबाद (उत्तम हिन्दू न्यूज): तेलंगाना की राजनीति में उस वक्त बड़ा भूचाल आ गया, जब मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने अपनी ही कैबिनेट की वरिष्ठ सहयोगी और वन एवं बंदोबस्ती मंत्री कोंडा सुरेखा को तत्काल प्रभाव से मंत्रिपरिषद से बर्खास्त कर दिया। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने इस संबंध में औपचारिक सिफारिश राज्यपाल को भेज दी है। यह पूरी राजनीतिक उठापटक सुरेखा की बेटी द्वारा मुख्यमंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ की गई तीखी बयानबाजी के बाद शुरू हुई थी, जिसने पार्टी के भीतर बगावत और असंतोष की आग भड़का दी थी।

बेटी के बिगड़े बोल से भड़का विवाद, 20 विधायकों ने खोला मोर्चा

इस पूरे सियासी संग्राम की शुरुआत तब हुई जब कोंडा सुरेखा की बेटी कोंडा सुष्मिता पटेल ने वारंगल के एक सार्वजनिक कार्यक्रम में सीधे मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए थे। सुष्मिता ने आरोप लगाया था कि राज्य में कांग्रेस के पुराने वफादार नेताओं को दरकिनार किया जा रहा है और टीडीपी व बीआरएस से आए नेताओं को खुली तवज्जो दी जा रही है। उन्होंने परकल विधानसभा सीट से आगामी चुनाव लड़ने का भी खुला ऐलान कर दिया था। इस बयान के बाद कांग्रेस के भीतर भारी आक्रोश फैल गया और करीब 20 विधायकों व विधान परिषद सदस्यों ने सुरेखा के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया था।

कारण बताओ नोटिस और पल्ला झाड़ने की कोशिश नहीं आई काम

पार्टी के भीतर गहराते असंतोष को देखते हुए तेलंगाना कांग्रेस की अनुशासनात्मक समिति ने सुरेखा को ‘कारण बताओ नोटिस’ थमा दिया था। हालांकि, सुरेखा ने अपने जवाब में यह तर्क देते हुए पल्ला झाड़ने की कोशिश की थी कि बेटी के बयान उसके अपने निजी विचार हैं और एक बालिग बेटी की टिप्पणियों के लिए मां को कटघरे में खड़ा करना न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। लेकिन पार्टी नेतृत्व और अनुशासनात्मक समिति इस दलील से बिल्कुल संतुष्ट नहीं हुए। दिल्ली में मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी, उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के बीच कई दौर की बातचीत के बाद आखिरकार आलाकमान ने सुरेखा पर गाज गिराने की हरी झंडी दे दी।

बर्खास्तगी के तरीके पर सुरेखा का ऐतराज, कहा- सादे कागज पर फैसला मंजूर नहीं

दूसरी तरफ, कैबिनेट से हटाए जाने के फैसले पर कोंडा सुरेखा ने कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने कहा कि उन्हें अब तक कोई आधिकारिक दस्तावेज या हस्ताक्षरित आदेश नहीं मिला है, बल्कि केवल सादे कागज पर सूचना प्रसारित की जा रही है जो अनुचित है। सुरेखा ने अपनी बात रखते हुए कहा कि उन्होंने न तो कोई भ्रष्टाचार किया है और न ही पार्टी विरोधी टिप्पणी, ऐसे में बिना उनका पक्ष सुने एकतरफा कार्रवाई करना गलत परंपरा है। उन्होंने दो टूक कहा कि राजभवन या सरकार से विधिवत औपचारिक पुष्टि मिलने के बाद ही वह अपने अगले राजनीतिक कदम का फैसला करेंगी।

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