Crime Story: संगठित उगाही ने बदला तरीका, जानें विदेश से जालसाज उद्योगपतियों को कैसे बना रहे निशाना?

Crime Story: संगठित उगाही ने बदला तरीका, जानें विदेश से जालसाज उद्योगपतियों को कैसे बना रहे निशाना?

VTDS के प्रबंध निदेशक साहिल लूथरा (File Photo)

हाल की कई घटनाओं की जांच से ये बात सामने आई है कि भारत में संगठित उगाही के तरीके में बड़ा बदलाव आया है. कानून प्रवर्तन एजेंसियों के सामने इसने नई चुनौती पेश की है. आपराधिक नेटवर्क अब उद्यमियों, कारोबारी नेताओं और अन्य हाई-प्रोफाइल व्यक्तियों को निशाना बनाने के लिए डिजिटल संचार, अंतरराज्यीय समन्वय और कथित विदेशी संपर्कों का तेजी से उपयोग कर रहे हैं.

ऐसा ही एक मामला रक्षा क्षेत्र के उद्यमी और विजयन त्रिशूल डिफेंस सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड (VTDS) के प्रबंध निदेशक साहिल लूथरा से कथित ₹10 करोड़ की उगाही की कोशिश से जुड़ा है. जांचकर्ताओं के अनुसार लूथरा को कथित तौर पर व्हाट्सऐप संदेशों और अंतरराष्ट्रीय कॉल के माध्यम से पैसे की मांग करते हुए धमकियां मिलीं. जांच के दौरान दिल्ली पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिनमें पंजाब पुलिस का एक पूर्व अधिकारी भी शामिल है.

मोबाइल, सिम की व्यवस्था करने मे मदद

जांचकर्ताओं का आरोप है कि उसने धमकी देने के लिए इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन और सिम कार्ड की व्यवस्था करने में मदद की थी. एजेंसियां इस मामले में संभावित विदेशी संचार संबंधों की भी जांच कर रही हैं. जांचकर्ताओं का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म, इंटरनेट-आधारित कॉलिंग सेवाएं और सीमा-पार संचार माध्यम ऐसे मामलों की जांच को पारंपरिक संगठित अपराध की तुलना में अधिक जटिल बना रहे हैं.

हाल ही में गुरुग्राम में सामने आई एक अन्य जांच में भी इसी तरह का पैटर्न देखने को मिला. एक कारोबारी के घर के बाहर हुई फायरिंग की घटना के बाद पुलिस ने कथित गैंग सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई की. जांचकर्ताओं ने संकेत दिया कि इस हमले के निर्देश संभवतः भारत के बाहर बैठे संचालकों द्वारा दिए गए थे, जो इस बढ़ती चुनौती को दर्शाता है कि स्थानीय अपराधी कथित तौर पर अंतरराष्ट्रीय संचार नेटवर्क के माध्यम से मिले निर्देशों पर काम कर रहे हैं.

मामला अभी जांच के अधीन है

इसी तरह, संयुक्त राज्य अमेरिका में जांच के दायरे में आए एक मामले ने भी संगठित अपराध समूहों द्वारा अपनाए जा रहे बदलते तरीकों की ओर ध्यान आकर्षित किया है. अमेरिकी अभियोजकों द्वारा सार्वजनिक रूप से लगाए गए आरोपों के अनुसार, पंजाब पुलिस का एक सेवारत अधिकारी एक संगठित आपराधिक नेटवर्क की उगाही से जुड़े मामले में सहायता करने का आरोपी है. यह मामला अभी जांच के अधीन है और आरोपों पर अभी न्यायिक निर्णय नहीं हुआ है.

हालांकि ये सभी घटनाएं अलग-अलग व्यक्तियों, स्थानों और परिस्थितियों से जुड़ी हैं, लेकिन जांचकर्ताओं का कहना है कि इनमें कई समान विशेषताएं देखने को मिलती हैं. अब धमकियां अधिकतर एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म, VoIP कॉल और स्पूफ किए गए अंतरराष्ट्रीय नंबरों के माध्यम से दी जा रही हैं, जबकि वित्तीय लेन-देन और संचार अक्सर राज्य और राष्ट्रीय सीमाओं से परे फैले होते हैं. ऐसी कार्यप्रणालियां जांच को अधिक जटिल बनाती हैं और कई कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच समन्वय की आवश्यकता पैदा करती हैं.

सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि रक्षा विनिर्माण, बुनियादी ढांचा, रियल एस्टेट और अन्य उच्च-मूल्य वाले उद्योगों में कार्यरत उद्यमी और कारोबारी अपनी सार्वजनिक पहचान और व्यावसायिक प्रोफाइल के कारण ऐसे अपराधियों के लिए अधिक संवेदनशील बनते जा रहे हैं. इस प्रकार की आपराधिक गतिविधियों का उद्देश्य केवल आर्थिक लाभ प्राप्त करना नहीं होता, बल्कि पीड़ितों में भय पैदा कर उन्हें अवैध मांगों को मानने के लिए मजबूर करना भी होता है.

संगठित आपराधिक समूहों के खिलाफ कार्रवाई जारी

हाल की जांचें यह भी दर्शाती हैं कि संगठित अपराध से निपटने में भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों की क्षमता लगातार मजबूत हो रही है. साहिल लूथरा मामले में हुई गिरफ्तारियां, विभिन्न राज्यों में संगठित आपराधिक समूहों के खिलाफ जारी कार्रवाई तथा साइबर फॉरेंसिक, तकनीकी निगरानी और अंतर-एजेंसी सहयोग का बढ़ता उपयोग इन अपराधों से निपटने के लिए अधिक समन्वित दृष्टिकोण को दर्शाता है.

विशेषज्ञों का मानना है कि संगठित उगाही के बदलते स्वरूप से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए समान रूप से समन्वित रणनीतियों की आवश्यकता है. डिजिटल धमकियों, अंतरराज्यीय संचालन और कथित विदेशी संपर्कों से जुड़े मामलों में राज्य पुलिस बलों, विशेष साइबर अपराध इकाइयों, केंद्रीय जांच एजेंसियों तथा आवश्यकता पड़ने पर अंतरराष्ट्रीय कानून प्रवर्तन संस्थाओं के बीच घनिष्ठ सहयोग की जरूरत लगातार बढ़ रही है.

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