Dehradun News : सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद जागा प्रशासन, अब पालतू कुत्तों का लाइसेंस न होने पर लगेगा जुर्माना - Doon Horizon
देहरादून में आवारा श्वानों और बेसहारा गोवंश के प्रबंधन को लेकर डीएम डॉ. आशीष चौहान ने कड़े निर्देश जारी किए हैं। पालतू कुत्तों का पंजीकरण अनिवार्य होगा और सड़कों पर मवेशी छोड़ने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
दून हॉराइज़न, देहरादून (05 सितंबर): राजधानी की सड़कों पर ट्रैफिक जाम और दुर्घटनाओं का सबब बन रहे बेसहारा पशुओं को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। शनिवार को कलेक्ट्रेट में मैराथन बैठक लेते हुए जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने स्पष्ट निर्देश दिए कि नगर निकाय तत्काल आवारा कुत्तों और निराश्रित गोवंश की गिनती कर समूचा डेटा ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज करें। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का हवाला देते हुए डीएम ने कहा कि जमीनी हकीकत जाने बिना कोई भी अभियान सफल नहीं हो सकता।
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डोईवाला, ऋषिकेश और विकासनगर में बनेंगे नए सर्जरी सेंटर
जिले के उपनगरीय और ग्रामीण इलाकों में बढ़ते श्वानों के आतंक को थामने के लिए विकेंद्रीकृत व्यवस्था लागू की जा रही है। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि डोईवाला, विकासनगर और तीर्थनगरी ऋषिकेश में एनीमल बर्थ कंट्रोल (ABC Program) और शल्य चिकित्सा के लिए तुरंत सरकारी भूमि चिह्नित की जाए।
फिलहाल बंध्याकरण का मुख्य भार दून शहर पर ही टिका है। यदि तीनों तहसीलों में अलग से केंद्र शुरू हो जाते हैं, तो ग्रामीण और बाहरी कस्बों के श्वानों को शहर लाने-ले जाने का अनावश्यक खर्च और समय दोनों बचेंगे। इसके साथ ही प्रशासन ने साफ किया है कि घरों में कुत्ता पालने के शौकीन लोगों को नगर निगम से अनिवार्य लाइसेंस (Pet Dog License) लेना होगा; ऐसा न करने वालों पर नगर निगम एक्ट के तहत चालानी कार्रवाई की तैयारी है।
दूध निकालकर सड़क पर गोवंश छोड़ा तो खैर नहीं
सड़कों पर लावारिस घूमती गायों और सांडों को लेकर प्रशासन का रुख बेहद सख्त रहा। शहर में कई पशुपालक दूध निकालने के बाद गोवंश को खुले में चरने छोड़ देते हैं, जिससे न केवल शहर की यातायात व्यवस्था चरमराती है बल्कि आए दिन दोपहिया सवार गंभीर हादसों के शिकार हो रहे हैं।
बैठक में दो-टूक कहा गया कि ऐसे गैर-जिम्मेदार पशुपालकों को चिह्नित कर उनके खिलाफ भारी जुर्माना लगाने के साथ-साथ पशु क्रूरता निवारण अधिनियम (PCA Act) के अंतर्गत कानूनी मुकदमे भी दर्ज किए जाएंगे। बेसहारा घूम रहे मवेशियों को पकड़कर सीधे नगर निगम के कांजीहाउस भेजा जाएगा।
300 श्वानों की क्षमता वाले केनल और 4 रेस्क्यू गाड़ियां तैनात
नगर निगम के वरिष्ठ पशु चिकित्साधिकारी डॉ. वरुण अग्रवाल ने बैठक में प्रगति रिपोर्ट पेश की। दून नगर निगम की सीमा में अब तक 55,487 आवारा कुत्तों की नसबंदी और एंटी रेबीज वैक्सीनेशन (ARV Drive) का कार्य पूरा किया जा चुका है। वर्तमान में संचालित 72 केनल के अलावा 144 नए आधुनिक डॉग केनल तेजी से बनाए जा रहे हैं। निर्माण पूरा होते ही निगम के पास लगभग 300 श्वानों को रखने की पर्याप्त शेल्टर क्षमता होगी।
| व्यवस्था का प्रकार | वर्तमान स्थिति | आगामी लक्ष्य / क्षमता |
| स्ट्रीट डॉग बंध्याकरण | 55,487 पूर्ण | 100% वार्ड कवरेज |
| डॉग केनल | 72 सक्रिय | 144 निर्माणाधीन (कुल क्षमता ~300) |
| निराश्रित गोवंश | 883 संरक्षित (347 केदारपुरम, 536 सेलाकुई) | अतिरिक्त शेल्टर विस्तार |
| पशु रेस्क्यू वाहन | 4 क्यूआरटी गाड़ियां तैनात | निकाय स्तर पर निगरानी |
कांजीहाउस की स्थिति देखें तो केदारपुरम में 347 और सेलाकुई स्थित शंकरपुर केंद्र में 536 गोवंश की देखरेख की जा रही है। शहर में आवारा पशुओं की सूचना मिलते ही रेस्क्यू के लिए चार विशेष पशुवाहन क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) के साथ चौबीसों घंटे तैनात हैं। इसके अलावा रिहायशी इलाकों में दहशत फैलाने वाले 109 बंदरों को भी बीते छह महीनों में पकड़कर सुरक्षित वन क्षेत्र में विस्थापित किया गया है।
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प्रशासनिक स्तर पर बनी इस नई नीति का धरातल पर असर दिखना इस बात पर निर्भर करेगा कि निकाय स्तर पर सर्वे कितनी पारदर्शिता से पूरा होता है।