Delhi Airport पर दबोचा गया 'Pushpa Raj', 365 Kg लाल चंदन जब्त, हांगकांग तस्करी का प्लान कैसे फुस्स?
Published: Thursday, July 16, 2026, 21:48 [IST]
Smuggling Lal Chandan News: अगर आपने एक्टर अलु अर्जुन की फिल्म 'पुष्पा' देखी है तो, रेड सैंडर्स (लाल चंदन) से भली-भांति परिचित होंगे। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत लाखों रुपये प्रति किलो तक हो सकती है। चीन, हांगकांग, जापान और यूरोप में इसकी भारी मांग है, जो तस्करी को बढ़ावा देती है।
इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (IGI) पर कस्टम अधिकारियों ने गुरुवार (16 जुलाई) को एक बड़ी सफलता हासिल की है। उन्होंने हांगकांग ले जाने की कोशिश की जा रही 365.545 किलो रेड सैंडर्स (लाल चंदन) जब्त कर ली और इस मामले में एक भारतीय यात्री को गिरफ्तार किया गया। यह कार्रवाई 13 जुलाई को टर्मिनल-3 से हुई, लेकिन गुरुवार को आधिकारिक बयान जारी किया गया। आइए सिलसिलेवार जानते हैं कि कैसे दबोचा गया तस्कर?
दरअसल, कस्टम अधिकारियों ने संदिग्ध व्यवहार के आधार पर एक भारतीय यात्री को रोका, जो दिल्ली से हांगकांग जाने वाली फ्लाइट पकड़ने वाला था। यात्री के पास एक अतिरिक्त बैग और संदिग्ध गतिविधि देखकर जांच शुरू की गई। तलाशी में 12 बैगों से भारी मात्रा में रेड सैंडर्स बरामद हुई। इनमें 6 छोटे ट्रॉली सूटकेस (3 मैरून और 3 काले रंग के) और 6 ट्रैवल बैग में मिली।
तस्करों ने पकड़े जाने से बचने के लिए रेड सैंडर्स के लट्ठों को नीले पॉलीथीन पैकेट में पैक किया था और फिर स्पंज में लपेटकर छिपाया था। यह तरीका तस्करी में आम है, लेकिन कस्टम की सतर्कता ने इसे नाकाम कर दिया।
क्या होता है रेड सैंडर्स? कितना कीमती?
आपको बता दें कि लाल चंदन को ही रेड सैंडर्स कहा जाता है। जानकारी के मुताबिक, लाल चंदन भारत का मूल्यवान वन्य प्रजाति का पेड़ है। यह मुख्य रूप से आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और कर्नाटक के कुछ इलाकों में पाया जाता है। इसका लाल-भूरा रंग होता है। अपनी सुगंध और टिकाऊपन के कारण इसकी सबसे ज्यादा डिमांड होती है। इसे, फर्नीचर, म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स, पारंपरिक दवाओं और लग्जरी सामान बनाने में सबसे ज्यादा उपयोग किया जाता है।
मालूम हो कि भारत में रेड सैंडर्स का निर्यात सख्ती से प्रतिबंधित है। इसके लिए विशेष परमिट, CITES (Convention on International Trade in Endangered Species) का प्रमाण-पत्र और वन विभाग की मंजूरी जरूरी है। बिना अनुमति के निर्यात कस्टम्स एक्ट 1962, CITES कन्वेंशन और Foreign Trade (Development and Regulation) Act 1992 का उल्लंघन माना जाता है।