Delhi Dehradun Expressway : तीन महीने में ही पुल में आई दरार, ग्रामीणों ने उठाए गुणवत्ता पर सवाल - Doon Horizon

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के बड़गांव इंटरचेंज पर बने पुल में उद्घाटन के तीन महीने बाद ही दरारें आने से हड़कंप मच गया है। एनएचएआई ने इसे सामान्य तकनीकी प्रक्रिया बताते हुए मरम्मत शुरू कर दी है, लेकिन ग्रामीण निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठा रहे हैं।

देहरादून, 31 जुलाई, 2026 (दून हॉराइज़न)।

Delhi Dehradun Expressway : करीब 12 हजार करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार किए गए दिल्ली-देहरादून ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के निर्माण कार्य पर अब गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। इस हाई-प्रोफाइल परियोजना के शुरू होने के मात्र तीन महीने के भीतर ही बड़गांव इंटरचेंज पर बने पुल में दरारें देखने को मिल गईं।

देवबंद-नानौता मार्ग के ऊपर बने इस पुल की सतह पर आई इन दरारों से बारिश का पानी सीधे नीचे रिसने लगा। पानी को रिसते हुए देखकर वहां से गुजरने वाले ग्रामीण और स्थानीय लोग भारी दहशत में आ गए।

मामले की भनक लगते ही भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी एनएचएआई की तकनीकी टीम हरकत में आ गई। गुरुवार को एनएचएआई के अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे और पुल के नीचे तुरंत प्रभाव से पंचिंग और मरम्मत का कार्य शुरू करवा दिया।

पुल के नीचे चल रहे इस मरम्मत कार्य को देखकर आसपास के ग्रामीण बड़ी संख्या में मौके पर एकत्र हो गए। ग्रामीणों ने इतनी जल्दी मरम्मत की नौबत आने पर एक्सप्रेसवे के निर्माण में इस्तेमाल हुई सामग्री और उसकी गुणवत्ता पर खुला रोष व्यक्त किया।

हजारों करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी ऐसी खामी सामने आने को स्थानीय लोगों ने बेहद गंभीर मामला करार दिया है। ग्रामीणों का साफ कहना है कि इस पूरे निर्माण कार्य की किसी स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।

जांच इसलिए भी जरूरी है ताकि यह साफ हो सके कि निर्माण के दौरान कहीं कोई गंभीर लापरवाही तो नहीं बरती गई थी। शुरुआती महीनों में ही यदि इस तरह के पुलों की मरम्मत करनी पड़ रही है, तो आने वाले लंबे समय में इसकी स्थिति कैसी होगी यह बड़ा सवाल है।

तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राहगीरों में भी इस पुल की सुरक्षा को लेकर भारी आशंका पैदा हो गई। वाहन चालकों का कहना है कि रोजाना इस मार्ग से हजारों वाहन गुजरते हैं और इस तरह की लापरवाही किसी बड़े हादसे को न्यौता दे सकती है।

एनएचएआई के प्रोजेक्ट मैनेजर शिवमोहन ने सामने आकर पुल में किसी भी तरह की बड़ी तकनीकी खराबी होने से साफ इनकार किया है। उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि निर्माण प्रक्रिया के वक्त सीमेंट में मिट्टी का कोई सूक्ष्म कण रह जाता है।

बरसात के मौसम में जब पानी का तेज बहाव होता है तो वही सूक्ष्म कण बाहर निकल जाता है जिससे सतह पर मामूली दरारें नजर आने लगती हैं। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए केवल पंचिंग करके उसे तुरंत भर दिया जाता है।

प्रोजेक्ट मैनेजर शिवमोहन ने आगे स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह से एक सामान्य तकनीकी प्रक्रिया है और इसका पुल की संरचनात्मक मजबूती पर कोई असर नहीं पड़ता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह एक्सप्रेसवे पूरी तरह सुरक्षित है और इस पर यातायात भी बिल्कुल सामान्य रूप से चल रहा है।

अधिकारियों की तरफ से दिए गए इन तमाम स्पष्टीकरणों के बावजूद इस मार्ग से रोजाना आने-जाने वाले राहगीरों के मन से डर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। वाहन चालकों का मानना है कि इस तरह के मामलों में एनएचएआई को एक विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट सार्वजनिक करनी चाहिए ताकि जनता का भरोसा बना रहे।