Delhi EV Retrofitting Policy : पुरानी कार इलेक्ट्रिक में बदलेगी, ₹2 लाख खर्च पर मिलेगी ₹50,000 की सरकारी छूट - Doon Horizon
दिल्ली सरकार की ड्राफ्ट EV पॉलिसी 2.0 के तहत पुरानी पेट्रोल-डीजल गाड़ियों को कबाड़ में भेजने के बजाय ₹2 लाख की लागत में इलेक्ट्रिक बनाने की इजाजत दे दी गई है। शुरुआती 1,000 गाड़ियों पर ₹50,000 की सीधी सब्सिडी मिलेगी, जबकि फोक्स मोटर और ARAI की यह तकनीक महज 4 से 6 घंटे में कार को हाइब्रिड और प्योर EV मोड में चला सकेगी।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट के कड़े नियमों के चलते 10 साल पुरानी डीजल और 15 साल पुरानी पेट्रोल गाड़ियों को सड़कों से हटाने का दबाव लगातार बना हुआ था। दिल्ली सरकार ने अपनी बहुप्रतीक्षित इलेक्ट्रिक व्हीकल नीति 2.0 के मसौदे में रेट्रोफिटिंग यानी पुरानी कारों में इलेक्ट्रिक किट लगाने के प्रावधान को हरी झंडी दे दी है। इस फैसले के बाद अब जिन लोगों के पास गैराज में खड़ी पुरानी पसंदीदा कारें हैं, उन्हें अपने वाहन कबाड़ में देने की मजबूरी नहीं रहेगी।
पॉलिसी के तहत सरकार ने इस पर्यावरण-अनुकूल बदलाव को रफ्तार देने के लिए विशेष वित्तीय प्रोत्साहन का खाका तैयार किया है। योजना के मुताबिक, दिल्ली में अपनी पुरानी पेट्रोल या डीजल गाड़ी को पूरी तरह या आंशिक रूप से इलेक्ट्रिक में तब्दील कराने वाले पहले 1,000 वाहन मालिकों को सीधे ₹50,000 की सब्सिडी दी जाएगी। यह छूट सीधे उपभोक्ता के खाते या रेट्रोफिटिंग लागत में समायोजित होगी, जिससे शुरुआती अपनाने वालों का वित्तीय बोझ काफी हद तक कम हो जाएगा।
बाजार में किसी नई एंट्री-लेवल इलेक्ट्रिक हैचबैक या सेडान को खरीदने के लिए आज भी 8 से 12 लाख रुपये तक का बजट चाहिए होता है। ऐसे समय में दिल्ली सरकार की यह पहल मध्यमवर्गीय कार मालिकों के लिए सीधी राहत लेकर आई है। जो गाड़ियां महज स्क्रैप वैल्यू के तौर पर 20,000 से 40,000 रुपये में नीलाम होने जा रही थीं, वे अब एक बार फिर कानूनी रूप से सड़कों पर दौड़ने योग्य बन सकेंगी।
इंजीनियरिंग और तकनीकी अमलीकरण के स्तर पर घरेलू ऑटोमोबाइल टेक फर्म फोक्स मोटर ने ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) के साथ मिलकर एक पूरी तरह स्वदेशी और सुरक्षित रेट्रोफिटिंग सॉल्यूशन विकसित किया है। इस तकनीक की सबसे बड़ी व्यावहारिक खूबी यह है कि इसमें आपकी गाड़ी के मूल पेट्रोल या डीजल इंजन और पारंपरिक गियरबॉक्स को कार से बाहर नहीं निकाला जाएगा।
पारंपरिक EV कंवर्जन में अमूमन पूरी फ्यूल लाइन और इंजन असेंबली को निकालकर फेंक दिया जाता है, जिससे कार की रिसेल और बॉडी बैलेंस पर असर पड़ता है। फोक्स मोटर के सीईओ निखिल आनंद खुराना के अनुसार, इस नई पेटेंटेड प्रणाली में ओरिजिनल इंजन के साथ ही एक विशेष इलेक्ट्रिक मोटर, गियरबॉक्स इंटरफेस और रिक्यूपरेटिव जनरेटर को इंटीग्रेट किया जाता है। इससे गाड़ी चालक को स्टीयरिंग के पास दो अलग-अलग ड्राइविंग मोड्स चुनने की आजादी मिलती है।
पहला मोड हाइब्रिड का होगा, जिसमें भारी चढ़ाई या एक्सप्रेसवे पर ओवरटेकिंग के दौरान कार का इंजन और इलेक्ट्रिक मोटर दोनों मिलकर पावर डिलीवर करेंगे। इससे पेट्रोल की खपत में भारी गिरावट दर्ज होगी। दूसरा मोड पूरी तरह से ‘प्योर EV Mode’ होगा, जिसमें कंबशन इंजन पूरी तरह बंद रहेगा और गाड़ी सिर्फ बैटरी की ताकत पर चलेगी। शहर के दैनिक ट्रैफिक और दफ्तर आने-जाने के लिहाज से EV मोड में यह सेटअप 50 से 100 किलोमीटर तक की वास्तविक ड्राइविंग रेंज देगा।
सड़क पर चलते वक्त जब आप ब्रेक लगाएंगे या गाड़ी ढलान पर उतरेगी, तब इसका रिक्यूपरेटिव जनरेटर मैकेनिकल एनर्जी को रीकैप्चर करके डिक्की में रखे बैटरी बैंक को खुद ब खुद चार्ज करता रहेगा। बैटरी पैक को बूट स्पेस यानी कार की डिक्की के निचले हिस्से में सुरक्षा मापदंडों का पालन करते हुए फिट किया जाता है, ताकि लगेज के लिए जरूरी जगह भी बची रहे और कार का वजन केंद्र में बना रहे।
सड़क सुरक्षा और तकनीकी विश्वसनीयता को लेकर अक्सर रेट्रोफिटेड गाड़ियों पर सवाल उठते रहे हैं। इस समस्या के समाधान के लिए सिस्टम में 10 से 12 हाई-टेक स्मार्ट सेंसर लगाए गए हैं, जो इंजन के तापमान, ब्रेक प्रेशर, बैटरी हेल्थ और पावर ट्रांसमिशन पर लगातार नजर रखेंगे। अगर कोई मामूली तकनीकी गड़बड़ी या शॉर्ट सर्किट का खतरा होता है, तो रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम तुरंत ड्राइवर को अलर्ट कर देगा और पावर सप्लाई कट कर देगा।
यह पूरी किट 2012 से पेटेंटेड तकनीक पर आधारित है और इसे ARAI द्वारा कड़े क्रैश, हीट और इलेक्ट्रिकल टेस्ट से गुजारा गया है। चूंकि यह सेटअप ARAI से पूरी तरह अप्रूव्ड है, इसलिए गाड़ियों का आरसी रिन्यूअल, फिटनेस सर्टिफिकेट और थर्ड-पार्टी या कॉम्प्रिहेंसिव इंश्योरेंस क्लेम कराने में वाहन मालिकों को कोई कानूनी अड़चन नहीं आएगी। कंपनी किट और मोटर पर बाकायदा वारंटी भी प्रदान करेगी।
सबसे राहत की बात इस कन्वर्जन प्रक्रिया में लगने वाला समय है। वर्कशॉप में गाड़ी जमा करने के बाद मात्र 4 से 6 घंटे के भीतर पूरी किट को कार में इंस्टॉल कर दिया जाएगा। यानी जितनी देर में आप अपनी कार की सामान्य सर्विसिंग कराते हैं, उतनी ही देर में आपकी पुरानी कंबशन कार एक आधुनिक प्लग-इन हाइब्रिड इलेक्ट्रिक वाहन में बदल जाएगी।
व्यावसायिक स्तर पर इस सेवा को बड़े पैमाने पर उपलब्ध कराने के लिए फोक्स मोटर दिल्ली-एनसीआर से सटे हरियाणा के सोनीपत में 4 एकड़ क्षेत्र में ‘द ब्लू आईपी’ नाम से एक विशाल ‘EV ऑटो पार्क’ तैयार कर रही है। इस ऑटो पार्क में एक बड़ा सेंट्रल वेयरहाउस और कन्वर्जन सेंटर होगा, जहां एक साथ दर्जनों गाड़ियों का असेंबली-लाइन स्टाइल में रूपांतरण किया जाएगा, ताकि ग्राहकों को हफ्तों लंबा इंतजार न करना पड़े।
लागत और जेब पर असर की बात करें तो एक सामान्य पेट्रोल या डीजल कार को इस हाइब्रिड-EV सेटअप में बदलने का कुल अनुमानित खर्च ₹2 लाख प्लस लागू जीएसटी तय किया गया है। वाहन मॉडल, बैटरी की क्षमता (kWh) और चुने गए किट वेरिएंट के आधार पर यह कीमत थोड़ी ऊपर-नीचे हो सकती है।
अगर इसमें दिल्ली सरकार की प्रस्तावित ₹50,000 की सब्सिडी को जोड़ दिया जाए, तो ग्राहक की जेब से शुद्ध खर्च महज ₹1.5 लाख के आसपास आएगा। केंद्र सरकार के 23 जून 2016 को जारी गजट नोटिफिकेशन के मुताबिक, केवल BS-II या उससे ऊपर के उत्सर्जन मानकों वाली कारें ही इसके लिए योग्य होंगी। साथ ही वाहन का कुल वजन 3,500 किलोग्राम से कम होना चाहिए और उसमें पहले से कोई कमर्शियल एलपीजी या सीएनजी किट नहीं लगी होनी चाहिए।