छत का प्लास्टर गिरने के बाद सहमे बच्चे, घटी उपस्थिति: सरकारी स्कूल के एक कमरे में चल रही पढ़ाई, DEO बोले- जर्जर स्कूलों को करें शिफ्ट - Muzaffarpur News
मुजफ्फरपुर1 घंटे पहले
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मुजफ्फरपुर शहर के आमगोला स्थित राजकीय मध्य विद्यालय में सोमवार को मिड-डे मील के दौरान छत का प्लास्टर गिर गया। इस घटना के बाद बच्चों और अभिभावकों में दहशत का माहौल है। घटना के अगले ही दिन स्कूल में बच्चों की उपस्थिति करीब 25 प्रतिशत तक घट गई।
सुरक्षा के मद्देनजर दो कमरों की जगह अब केवल एक कमरे में पढ़ाई कराई जा रही है, जबकि कई कक्षाओं का संचालन बरामदे में हो रहा है। मामले को लेकर जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) ने जर्जर स्कूलों को तत्काल सुरक्षित भवन में शिफ्ट करने के निर्देश दिए हैं।
छत का प्लास्टर गिरने से दो छात्राएं घायल
आमगोला स्थित राजकीय मध्य विद्यालय में सोमवार को मिड-डे मील के दौरान छत का प्लास्टर गिरने से दो छात्राएं घायल हो गई थीं। इनमें एक छात्रा के सिर में गंभीर चोट आई थी।

बच्चों की स्थिति पर भी दिखा असर।
बच्चों की उपस्थिति पर भी दिखा असर
मंगलवार को इसका असर स्कूल में बच्चों की उपस्थिति पर भी देखने को मिला। जहां सामान्य दिनों में 130 से 140 बच्चे स्कूल आते थे, वहीं घटना के बाद उपस्थिति में करीब 25 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। कई अभिभावकों ने सुरक्षा कारणों से अपने बच्चों को स्कूल भेजना उचित नहीं समझा।
एक कमरे और बरामदे में चल रही पढ़ाई
190 नामांकित छात्रों वाले इस विद्यालय में पहले दो कमरों में कक्षाएं संचालित होती थीं। लेकिन हादसे के बाद एक कमरे को बंद कर दिया गया है। अब एक कमरे और स्कूल के बरामदे में बच्चों की पढ़ाई कराई जा रही है। शिक्षक भी लगातार इस आशंका के बीच पढ़ाने को मजबूर हैं कि कहीं फिर कोई हादसा न हो जाए।

खाने में गिरा छत।
एक दशक से जर्जर सामुदायिक भवन में चल रहा स्कूल
विद्यालय का संचालन पिछले एक दशक से अधिक समय से एक जर्जर सामुदायिक भवन में हो रहा है। भवन में केवल तीन कमरे हैं। इनमें दो कमरों में कक्षाएं चलती थीं, जबकि तीसरे छोटे कमरे में स्कूल का कार्यालय और मिड-डे मील दोनों का संचालन होता है। सीमित जगह और जर्जर भवन के कारण बच्चों और शिक्षकों को रोजाना परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
पहले भी गिर चुका है प्लास्टर
शिक्षकों के अनुसार यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी कई बार छत और रेलिंग का प्लास्टर गिर चुका है। भवन की जर्जर स्थिति को लेकर शिक्षा विभाग को कई बार लिखित और मौखिक रूप से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका।
हेड मास्टर बोलीं- पढ़ाई से ज्यादा सुरक्षा की चिंता
विद्यालय की हेड मास्टर ने कहा कि अब स्थिति ऐसी हो गई है कि पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता बन गई है। हर समय यह डर बना रहता है कि कब भवन का कोई हिस्सा गिर जाए। उन्होंने बताया कि इस संबंध में पहले भी जिला शिक्षा पदाधिकारी को कई बार जानकारी दी गई थी और अब फिर से पूरे मामले से अवगत कराया गया है।
DEO बोले- जर्जर भवन में स्कूल नहीं चलेगा
जिला शिक्षा पदाधिकारी ने कहा कि जिले के सभी जर्जर विद्यालयों को तत्काल सुरक्षित भवन में स्थानांतरित करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि आमगोला विद्यालय की घटना गंभीर है और इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उन्होंने कहा कि सभी विद्यालय प्रभारी अपने भवनों की स्थिति का आकलन कराएं। यदि कोई भवन जर्जर है तो वहां कक्षाएं संचालित न करें और तत्काल वैकल्पिक भवन में स्कूल शिफ्ट करने का प्रस्ताव विभाग को भेजें। बच्चों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
सवालों के घेरे में व्यवस्था
शहर के बीचोंबीच स्थित इस विद्यालय में वर्षों से जर्जर भवन में पढ़ाई कराई जा रही है। छत का प्लास्टर गिरने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब पहले से भवन की खराब स्थिति की जानकारी विभाग को थी, तो समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई। फिलहाल बच्चे, अभिभावक और शिक्षक सभी सुरक्षित भवन मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
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