पूर्व DGP बृज लाल का बड़ा बयान, कहा- जंगलों में रहने वाले नक्सलियों से ज्‍यादा खतरनाक होते हैं ‘दिमागी नक्सली’

लखनऊ : उत्तर प्रदेश के पूर्व DGP और वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी के सांसद बृजलाल (BJP MP Brij Lal) ने रविवार को “दिमागी नक्सल” (Intellectual Naxal) कहे जाने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि वे जंगल के इलाकों में सक्रिय उग्रवादियों की तुलना में देश के लिए कहीं ज्यादा बड़ा खतरा हैं।

पढ़ें :- जंतर-मंतर बवाल पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी नसीहत- 'लाठी-गोली नहीं, युवाओं को काउंसलिंग की जरूरत'

सांसद बृज लाल (BJP MP Brij Lal) ने दावा किया कि ये लोग शहरी इलाकों में काम करते हैं और “हिंसक विचारधारा” फैलाने के लिए हथियारों के बजाय दिमागी असर का इस्तेमाल करते हैं। बृज लाल ने कहा कि आज मैं ‘दिमागी नक्सल’ के बारे में बात करना चाहता हूं। वे जंगलों या दूर-दराज के जंगली इलाकों में नहीं रहते। वे हथियार नहीं रखते या गोलियां नहीं चलाते। वे पूरी तरह अपनी बुद्धि पर भरोसा करते हैं।” इस दौरान उन्होंने इन लोगों के प्रोफेशनल बैकग्राउंड के बारे में और बताया, और समाज के अलग-अलग असरदार हिस्सों में उनकी मौजूदगी का जिक्र किया।

‘दिमागी नक्सली’ नक्सलियों से अधिक खतरनाक

सांसद ने कहा, कि वे शहरों में प्रोफेसर, टीचर, NGO हेड, बुद्धिजीवी, कवि और लेखक के तौर पर काम करते हुए पाए जाते हैं। वे आर्टिकल लिखते हैं और कॉन्फ्रेंस और सेमिनार ऑर्गनाइज करते हैं, जहां वे आम लोगों, खासकर युवाओं के मन में अपनी हिंसक सोच डालते हैं। उन्होंने कहा कि उनके ऑपरेशन का इंटेलेक्चुअल नेचर उन्हें ट्रेडिशनल विद्रोहियों के मुकाबले मुकाबला करने में ज़्यादा मुश्किल बनाता है। इसलिए, वे जंगलों में रहने वाले नक्सलियों से कहीं ज्यादा खतरनाक हैं, एक ऐसा ग्रुप जो पहले ही काफी हद तक खत्म हो चुका है।

‘दिमागी नक्सली’ का मकसद लोकतंत्र को कमजोर करना

पढ़ें :- अमरनाथ यात्रियों की सुरक्षा में तैनात, पुलिस टीम पर आतंकी हमला, हेड कॉन्स्टेबल की मौत

सांसद बृज लाल (BJP MP Brij Lal) ने अनुसार इन ग्रुप्स का मुख्य मकसद भारतीय लोकतंत्र के स्तंभों में जनता का विश्वास कमजोर करना है। उन्होंने कहा कि वे हमारे डेमोक्रेटिक संस्थानों (Democratic Institutions), ज्यूडिशियरी (Judiciary) , सिक्योरिटी फोर्स (Security Forces) और संविधान को लेकर लोगों के बीच अविश्वास के बीज बोते हैं। वे युवाओं के बीच घुसपैठ करते हैं, और उन्हें दिमागी हेरफेर के ज़रिए हिंसक कामों की ओर ले जाने की कोशिश करते हैं।

‘दिमागी नक्सली’ के खिलाफ जागरूकता फैलाना जरूरी

बृज लाल ने शहरी इलाकों में ऐसी सोच को फैलने से रोकने के लिए लोगों में जागरूकता और सावधानी बढ़ाने की भी अपील की। उन्होंने ने कहा कि इसलिए हमें इन ‘दिमागी नक्सलियों’ से सावधान रहना चाहिए, क्योंकि ये वही लोग हैं जो नक्सलियों का गुणगान करते हैं, उनके बारे में लिखते हैं और देश में अराजकता का माहौल बनाए रखने के लिए फंड इकट्ठा करते हैं।