प्रीता वर्मा संभालेंगी बिहार DGP की कमान: UPSC ने तीन नाम पर लगाई मुहर; जानिए दो सीनियर अफसर क्यों पीछे रह रहे - Patna News
पटना14 घंटे पहले
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बिहार के पुलिस महानिदेशक (DGP) विनय कुमार ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले लिया है। गृह विभाग ने उनका VRS मंजूर भी कर लिया। अब बिहार सरकार ने विनय कुमार को नया राज्य मुख्य सूचना आयुक्त बनाया है।
फिलहाल विनय कुमार छुट्टी पर है। उनकी जगह 1991 बैच की IAS अधिकारी और वर्तमान में होमगार्ड व फायर सर्विसेज की DG प्रीता वर्मा को बिहार का कार्यवाहक DGP बनाया है।
बिहार के नए DGP कौन होंगे। इसको लेकर चर्चा तेज है। बताया जा रहा है कि प्रीता वर्मा, भृगु श्रीनिवासन और जीएस गंगवार में से एक DGP की कमान संभालेंगे। बताया जा रहा है कि बिहार सरकार की तरफ से डीजीपी के लिए जो लिस्ट भेजी गई थी, इसमें से UPSC ने इन्हीं तीन नामों को सिलेक्ट किया है। हालांकि प्रीता वर्मा का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है।
इसकी वजह है कि प्रीता वर्मा 1991 बैच की IAS ऑफसर हैं। जबकि जितेंद्र सिंह गंगवार 1993 और भृगु श्रीनिवासन 1992 बैच के IPS हैं। वरीयता के आधार पर प्रीता वर्मा इन दोनों से सीनियर हैं और रिटायर्ड भी बाद में होंगी। इस लिहाज से प्रीता वर्मा DGP की रेस में सबसे आगे हैं।
भास्कर की स्पेशल रिपोर्ट में जानिए, DGP की रेस में 3 अफसरों के बारे में
1. प्रीता वर्मा- रेस में महिला चेहरा सबसे आगे
विनय कुमार के छुट्टी पर जाने के बाद प्रीता वर्मा 1991 बैच की IPS और वर्तमान में होमगार्ड व फायर सर्विसेज की DG प्रीता वर्मा को बिहार का कार्यवाहक DGP बनाया गया है। वो बिहार पुलिस इतिहास में राज्य पुलिस बल की कमान संभालने वाली पहली महिला IPS अधिकारी बन गई हैं।
प्रीता वर्मा बिहार की सबसे सीनियर महिला पुलिस अधिकारियों में शामिल हैं। फिलहाल वे DG, गृह रक्षा वाहिनी एवं अग्निशमन सेवाएं की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।
प्रीता वर्मा इससे पहले DG ट्रेनिंग के पद पर थीं। केंद्र में प्रतिनियुक्ति के दौरान उन्होंने KVIC की CEO की जिम्मेदारी भी संभाली है। 2023 में विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित हुई थीं। वरिष्ठता के लिहाज से उनका नाम महत्वपूर्ण है।

प्रीता वर्मा ही क्यों?
- प्रीता वर्मा वर्तमान में सबसे सीनियर IPS अधिकारी हैं।
- इसी वरीयता के आधार पर उन्हें प्रभारी डीजीपी की जिम्मेदारी सौंपी गई हैं।
- प्रीता वर्मा महिला चेहरा हैं।
2- जितेंद्र सिंह गंगवार: UP कनेक्शन और लव-कुश समीकरण
1993 बैच के IPS अधिकारी जितेंद्र सिंह गंगवार भी DGP की रेस में हैं। वे फिलहाल DG विजिलेंस की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। 31 जुलाई 2027 को रिटायर होने वाले हैं।
सामान्य स्थिति में DGP बनने के बाद उनके पास लंबा कार्यकाल नहीं बचेगा। हालांकि, नियुक्ति और सेवा-विस्तार से जुड़े नियमों के तहत सरकार के पास विकल्प है।
गंगवार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद की कायमगंज तहसील के भटासा गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग में M.E. किया है।
बिहार पुलिस में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। लंबे समय तक ADG हेडक्वार्टर रहे। बिहार पुलिस के आधिकारिक प्रवक्ता के तौर पर भी चर्चित रहे।
दिसंबर 2024 से वे निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के DG हैं। भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी की कार्रवाई में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है। साफ-सुथरी प्रशासनिक छवि और सरकार के साथ काम करने का अनुभव उनकी दावेदारी को मजबूत करता है। उन्हें 2010 में पुलिस पदक और 2019 में राष्ट्रपति पुलिस पदक मिल चुका है।

जितेंद्र सिंह गंगवार 1993 बैच के IPS हैं।
3- IPS भृगु श्रीनिवासन: सीनियर, लेकिन रिटायरमेंट नजदीक
रेस में बिहार कैडर के 1992 बैच के IPS अधिकारी भृगु श्रीनिवासन भी हैं। वे राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) के महानिदेशक के पद पर तैनात हैं। NSG के पद पर 31 अगस्त 2024 को तैनात किए गये थे। यह अगस्त 2027 में सेवानिवृत्त होंगे। UP के रहने वाले हैं।
NSG प्रमुख बनने से पहले श्रीनिवासन बिहार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। वे बिहार पुलिस अकादमी, राजगीर के निदेशक भी रहे। इसके बाद केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर उन्हें NSG की कमान मिली।

भृगु श्रीनिवासन राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) के महानिदेशक के पद पर तैनात हैं।
अब जानिए किन फैक्टर से तय होता है नए DGP का नाम
बिहार के अगले DGP की नियुक्ति सिर्फ सीनियरिटी से तय नहीं होगी। सरकार को कई पहलुओं को देखना होगा।
सीनियरिटी: DGP के लिए पात्र अधिकारियों की सूची में महत्वपूर्ण आधार है।
सेवा अवधि: जिस अधिकारी को DGP बनाया जाएगा, उसके पास कम से कम 6 माह कार्यकाल बचा होना महत्वपूर्ण माना जाता है।
प्रशासनिक और फील्ड अनुभव: कानून-व्यवस्था, पुलिस मुख्यालय, खुफिया तंत्र और ऑपरेशन का अनुभव दावेदार की स्थिति मजबूत कर सकता है।
केंद्रीय प्रतिनियुक्ति: केंद्र में महत्वपूर्ण पद संभाल रहे अधिकारियों की वापसी केंद्र और राज्य के बीच तालमेल पर निर्भर करती है।
सरकार का भरोसा: DGP राज्य की पुलिस व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण अधिकारी होता है। इसलिए सरकार के साथ प्रशासनिक तालमेल भी महत्वपूर्ण होता है।
सामाजिक समीकरण: बिहार की राजनीति में जातीय और सामाजिक समीकरणों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। इसलिए नए DGP के चयन को लेकर लव-कुश समीकरण और भाजपा के कोर सामाजिक आधार से जोड़कर भी चर्चाएं हो रही हैं।

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