Dhanbad News : टुंडी में यूरिया की कालाबाजारी, किसानों को 12-16 रुपये किलो बेचने का आरोप
Dhanbad : देश का पेट भरने वाला अन्नदाता इन दिनों खाद की किल्लत और कथित कालाबाजारी के दोहरे संकट से जूझ रहा है. धनबाद के टुंडी प्रखंड में सरकारी सब्सिडी वाली यूरिया किसानों को तय दर से कई गुना अधिक कीमत पर बेचे जाने की शिकायत सामने आई है.
किसानों का आरोप है कि सरकारी दर पर उपलब्ध होने वाली यूरिया के लिए उन्हें दुकानदारों की मनमानी कीमत चुकानी पड़ रही है. शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए धनबाद के उपायुक्त आदित्य रंजन ने संबंधित अधिकारियों को मामले की जांच, सघन छापेमारी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं.

धनरोपणी करती महिलाएं
266.50 वाली बोरी 500-700 रुपये तक बेचने का आरोप
किसान माहिर चंद के मुताबिक, 45 किलो की यूरिया बोरी की सरकारी कीमत 266 रुपये 50 पैसे निर्धारित है. इस हिसाब से एक किलो यूरिया की कीमत करीब 5.92 रुपये पड़ती है. लेकिन टुंडी क्षेत्र में यही यूरिया कथित तौर पर 12 से 16 रुपये प्रति किलो तक बेची जा रही है. 45 किलो की एक बोरी के लिए किसानों से करीब 540 से 720 रुपये तक वसूले जा रहे हैं.
समय पर खाद नहीं मिली तो फसल पर असर का डर
किसानों की मानें तो धान समेत खरीफ की फसलों के लिए इस समय यूरिया की मांग बढ़ी हुई है. खेतों में फसल को खाद की जरूरत है और समय पर यूरिया उपलब्ध नहीं होने से उत्पादन प्रभावित हो रहे हैं. जिसको लेकर किसान चिंतित हैं.
इसी मजबूरी का फायदा उठाकर कथित तौर पर कुछ दुकानदार किसानों से मनमानी कीमत वसूल रहे हैं. किसानों का कहना है कि खाद की जरूरत तत्काल होती है. ऐसे में दुकान से खाली हाथ लौटने के बजाय वे अधिक कीमत देकर यूरिया खरीदने को मजबूर हो जाते हैं. इसी मजबूरी ने कथित कालाबाजारी के कारोबार को बढ़ावा दिया है.

यूरिया की कालाबाजारी से किसान परेशान
कमीशन के नाम पर वसूली का भी आरोप
किसानों का यह भी आरोप है कि अधिकारियों और बिचौलियों तक कमीशन पहुंचाने को लेकर कुछ दुकानदार अधिक कीमत वसूल रहे हैं. हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और इसकी सच्चाई जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी.
निगरानी तंत्र पर भी उठे सवाल
यूरिया की कथित कालाबाजारी ने कृषि विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. किसानों का सवाल है कि यदि दुकानदार लंबे समय से सरकारी दर से अधिक कीमत पर यूरिया बेच रहे थे तो संबंधित विभाग और निगरानी अधिकारी समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं कर सके?
अगर इन आरोपों की पुष्टि होती है तो सरकारी कीमत और कथित बिक्री कीमत के बीच बड़ा अंतर सामने आता है. इससे सबसे ज्यादा नुकसान उस किसान को हो रहा है, जिसके लिए खाद खेती की जरूरत है, कोई विलासिता की वस्तु नहीं.
डीसी के निर्देश के बाद जांच तेज होने की उम्मीद
लगातार मिल रही शिकायतों के बाद धनबाद डीसी आदित्य रंजन ने मामले को गंभीरता से लिया है. उन्होंने संबंधित अधिकारियों को टुंडी क्षेत्र में सघन जांच और छापेमारी अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं. साथ ही किसानों के हितों से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही गई है.
अब निगाहें कृषि विभाग और प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं. जांच में यदि तय दर से अधिक कीमत पर यूरिया बेचने अवैध स्टॉक रखने या बिना वैध लाइसेंस खाद बेचने की पुष्टि होती है तो संबंधित दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है.
किसानों को जांच से न्याय की उम्मीद
टुंडी के किसानों के लिए यह केवल यूरिया की कीमत का मामला नहीं है, बल्कि खेती की लागत और उनकी मेहनत से जुड़ा सवाल है. एक तरफ डीजल, मजदूरी, बीज और सिंचाई का खर्च बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर खाद भी महंगी मिलने लगे तो खेती किसानों के लिए और मुश्किल हो जाती है.
फिलहाल प्रशासनिक जांच शुरू होने के बाद किसानों को उम्मीद है कि सरकारी सब्सिडी का वास्तविक लाभ उन तक पहुंचेगा और खाद की बिक्री निर्धारित दर पर सुनिश्चित होगी. हालांकि असली तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी.
बड़ा सवाल यही है कि कार्रवाई केवल उन दुकानों तक सीमित रहती है, जहां अधिक कीमत वसूलने का आरोप है. या फिर जांच उस पूरे नेटवर्क तक पहुंचेगी, जिसके संरक्षण में यूरिया की कथित कालाबाजारी चलने की शिकायतें सामने आई है.


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