धनु राशिफल – Dhanu Rashifal 2026 – 24 July To 31 July
ये, यो, भा, भी — मूल नक्षत्र
भू, धा, फा, ढा — पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र
भे — उत्तराषाढ़ा नक्षत्र
24 जुलाई से 31 जुलाई तक
दिनांक 24, 25 को चिन्ताकारी समय रहेगा। पति-पत्नी में प्रेमभाव बढ़ेगा किन्तु तीसरे की वजह से मनमुटाव रहेगा। आपकी दिनचर्या अव्यवस्थित रहेगी। व्यापार के सिलसिले में आपको इधर-उधर भटकना पड़ेगा। 26, 27, 28 को सन्मुख चन्द्रमा सफलतादायी रहेगा। उच्चाधिकारियों से आपके सम्बन्ध मधुर रहेंगे। आप अपने जीवन में कुछ नवीनता लाएंगे। सरकारी काम गति पकड़ेंगे। मेहनत रंग लाएगी। मित्र व प्रशंसक आपकी वाहवाही करेंगे। 29, 30 को मानसिक रूप से संतोष का अनुभव करेंगे। बच्चों से जुड़े सामान की खरीददारी करेंगे। तथा विनम्र रहेंगे। दूर-दराज में रहने वाले लोगों से सम्पर्क साध सकते हैं और व्यापार कर सकते हैं जिससे प्रसन्नता होगी।
ग्रह स्थिति
मासारम्भ में चन्द्रमा धनु राशि का लग्न में, राहु कुम्भ राशि का तृतीय भाव में, शनि मीन राशि का चतुर्थ भाव में, मंगल वृषभ राशि का षष्टम भाव में, सूर्य मिथुन राशि का सप्तम भाव में, बृहस्पति+बुध+शुक्र कर्क राशि का अष्टम भाव में, केतु सिंह राशि का नवम भाव में स्थित है।
धनु राशि की शुभ-अशुभ तारीख़ें
| 2026 | शुभ तारीख़ें | सावधानी रखने योग्य अशुभ तारीख़ें |
| जनवरी | 11, 12, 16, 17, 18, 21, 22 | 4, 5, 6, 14, 15, 23, 24, 25, 31 |
| फरवरी | 7, 8, 9, 13, 14, 17, 18 | 1, 2, 10, 11, 20, 21 |
| मार्च | 7, 8, 12, 13, 14, 16, 17, 18 | 1, 10, 11, 19, 20, 28, 29 |
| अप्रैल | 3, 4, 8, 9, 10, 13, 14, 30 | 6, 7, 16, 17, 23, 24 |
| मई | 1, 2, 6, 7, 10, 11, 27, 28, 29 | 3, 4, 13, 14, 21, 22, 30, 31 |
| जून | 2, 3, 6, 7, 24, 25, 29, 30 | 9, 10, 17, 18, 19, 27, 28 |
| जुलाई | 1, 4, 5, 21, 22, 26, 27, 28, 31 | 7, 8, 14, 15, 16, 24, 25 |
| अगस्त | 1, 17, 18, 19, 23, 24, 27, 28, 29 | 3, 4, 11, 12, 20, 21, 30, 31 |
| सितम्बर | 14, 15, 19, 20, 21, 24, 25 | 7, 8, 9, 17, 18, 26, 27, 28 |
| अक्टूबर | 11, 12, 16, 17, 18, 21, 22 | 4, 5, 6, 14, 15, 24, 25 |
| नवम्बर | 7, 8, 9, 13, 14, 17, 18, 19 | 1, 2, 10, 11, 20, 21, 29, 30 |
| दिसम्बर | 5, 6, 10, 11, 12, 15, 16 | 8, 9, 18, 19, 25, 26, 27 |
धनु राशि का वार्षिक भविष्यफल
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धनु राशि के लिए यह साल 2026 मुश्किलों व चुनौतियों से परिपूर्ण है। हर क्षेत्र में चुनौतियां व मुश्किले मुंह फाड़े खड़ी हैं। एक ओर लगातार हो रही स्वास्थ्य में गिरावट मुश्किलों का कारण बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर व्यापार व कारोबार के हालात दिन-प्रतिदिन गिरते नजर आ रहे हैं। कहीं से भी राहत के कोई आसार नजर नहीं आते। काम-काज में चुनौतियां रहेंगी। इस साल शनि की ढैय्या का प्रभाव वर्ष पर्यंत आपकी राशि पर है। स्वास्थ्य में लापरवाही घातक रहेगी। पेट से सम्बंधित समस्या, कमरदर्द जैसी स्थितियां परेशानी की रहेंगी। धनु राशि के जातक लक्ष्य भेदन में निपुण होते हैं। येन-केन प्रकारेण आप अपना काम इस साल निकलवा ही लेंगे। इस वर्ष व्यापार में आप जी तोड़ मेहनत व परिश्रम करेंगे। परिश्रम का लाभ आपको आंशिक ही मिल पायेगा। व्यापार में पटरी से उतरी हुई गाड़ी पटरी पर नहीं आ पायेगी। व्यापार में विस्तर को लेकर आप नई योजना व प्लानिंग बनाएंगे, सारी योजना व सारी प्लानिंग धरी की धरी रह जायेगी । सरकारी मामलों कोर्ट-कचहरी से संबंन्धित विषयों में आपको जरूर नकारात्मकता या निराशा का मुंह देखना पड़ सकता है। इस साल आयकर जीएसटी. कस्टम पुलिस आदि से सम्बन्धित कोई समस्या उठ खड़ी होगी।
देवगुरु बृहस्पति इस साल 2 जून तक सातवें स्थान में है। अतः घर परिवार में किसी शुभ प्रसंग व मागलिक कार्यक्रम की रूपरेखा बनेगी। लेकिन उसमें विघ्न पैदा होगा। पति-पत्नी में आपसी तालमेल अच्छा रहेगा। नौकरी में बॉस व अधिकारी आपको मन से पसंद नहीं करेंगे। सहकर्मी किसी गुप्त योजना या साजिश या षडयंत्र में आपको उलझा सकते हैं। हालांकि आप यह महसूस करेंगे कि परिस्थिति चाहे कितनी भी विपरीत हो, घर-परिवार का एक पुत्र सदस्य आपके साथ हर समस्या का मुकाबला करने के लिए खड़ा होगा । वर्षारंभ में आपकी राशि में चार ग्रहों का योग धनदायक तो रहेगा, परंतु जितनी तेजी से धन आयेगा, उतनी ही तेजी से खर्चा भी होगा। भवन निर्माण संबंधी जो विषय काफी समय से अटका हुआ पड़ा था, उसमें हलचल दिखलाई पड़ेगी। भूमि, भवन, वाहन, फ्लैटस आदि चल-अचल सम्पत्ति खरीदने के योग इस साल बन रहे हैं। आप धन् राशि के जातक हैं। अन्याय व अनीति बर्दाश्त नहीं करते। कुछ भी गलत देखते ही उसका तुरंत प्रतिकार करते हैं। इस कारण आपके शत्रु व विरोधी अधिक रहेंगे। नौकरी व काम-काज में छोटी से छोटी चीज व मसलों को गम्भीरता से लें । आपसे कोई चूक हो सकती है। घर के किसी वरिष्ठ सदस्य माता-पिता का स्वास्थ्य 27 जुलाई से 11 दिसम्बर के बीच शनि के वक्रत्व काल में हो खराब सकता है। जिसे लेकर अस्पताल आदि पर खर्चा होगा। आपकी आलोचना, निंदा व बदनामी होने के योग इस साल बने हुए हैं। कोई झूठा आरोप भी लग सकता है।
शारीरिक सुख एवं स्वास्थ्य:-
इस साल शारीरिक स्वास्थ्य ठीक नहीं रहेगा, लाख दवाई व उपचार में फायदा नहीं होगा। कमरदर्द, पेटदर्द, रीढ़ की हड्डी से जुड़ी या नसों से सम्बन्धित परेशानी या समस्या रह सकती है। माता के स्वास्थ्य का ध्यान रखें, वाहन सावधानीपूर्वक चलावें । यात्रा -प्रवास में खान-पान आदि का विशेष ध्यान रखें। इस वर्ष 27 जुलाई से 11 दिसम्बर के मध्य किसी शल्य क्रिया (सर्जरी) के योग वक्री शनि के कारण बनते हैं। उच्च रक्तचाप, निम्न रक्तचाप, शुगर, डायबिटीज, हार्टडिजीज जैसी बीमारियों में सावचेत रहें। ॐ हौं जूँ सः महामृत्युंजय की बीजमंत्र का जप करें।
व्यापार व्यवसाय व धन :-
आप धनु राशि के जातक हैं, व्यापार में कुशल हैं, आप अपनी दूरदर्शिता व व्यापारिक सूझबूझ से व्यापार में दीर्घकालिक लाभ के महत्वपूर्ण निर्णय लेंगे। हालांकि उन निर्णयों के कार्यरूप में परिणित होने में प्रारंभिक व शुरुआती रूप से दिक्कतें व परेशानियां आएंगी। तथा उन निर्णयों की परिणित होने के बाद भी अपेक्षित लाभ नहीं मिल पायेगा। भागीदार व पार्टनर की हर गतिविधि व कार्यकलाप पर पैनी नजर रखें। विश्वास में विश्वासघात हो सकता है। एक तरफ तो आपकी राशि पर शनि की ढैय्या का प्रभाव है, तथा दूसरी तरफ 27 जुलाई से 11 दिसम्बर के मध्य शनि वक्र स्थिति में चलायमान रहेंगे। इस कारण पुराने कई काम हाथ से निकल सकते हैं। कुछ विशिष्ट कार्यों की स्थिति बनेगी, आप व्यापार में किसी एक चीज को पकड़ेंगे, तो दूसरी हाथ से निकलती हुई दिखाई देगी। लक्ष्य के प्रति समर्पण आपको उच्च मुकाम पर लेकर जायेगा। बॉस व अधिकारी व व्यापारिक पार्टियों से रिश्ते सुधारने को लेकर आप भरसक प्रयास करेंगे। 27 जुलाई से 11 दिसम्बर के मध्य शनि की वक्र स्थिति के कारण व्यापार में किसी को उधार नहीं दें, तथा व्यापारिक व व्यावसायिक सौदों को सोच-विचार कर ही अमल में लावें, इस वर्ष सम्पत्ति व वाहन का जरूर ध्यान रखें, भूमि, भवन, प्लाट व भूखण्ड आदि से सम्बन्धित विवाद हो सकता है, सम्पत्ति के रख रखाव मेंनेटेनेंस आदि पर खर्च के योग हैं। चल-अचल सम्पत्ति, शेयर्स, सोना, भूमि, भवन में वृद्धि की सम्भावनाएं हैं।
घर, परिवार, संतान व रिश्तेदार:-
हर मुश्किल से मुश्किल घड़ी में आपके अपने आपके साथ खड़े रहेंगे। परिवार के लोगों से इस साल आपको सहयोग व नैतिक संबल मिलेगा। हालांकि 2 जून से 31 अक्टूबर के मध्य अतिचारी गुरु के कारण पति-पत्नी में कुछ वैचारिक मतभेद रह सकते हैं। परंतु समय रहते तनाव व मतभेद समाप्त हो जाएंगे। वर्षारंभ में पंचमाधिपति मंगल आपकी स्वयं की राशि में है। अतः संतान आज्ञा में रहेगी। संतान का कॉलेज में दाखिले, विषय का चयन करियर आदि को लेकर चली आ रही चिंता वर्ष के पूर्वाद्ध में समाप्त हो जायेगी। आर्थिक मंदी व्यापारिक सुस्ती के चलते आप कुछ परेशान रहेंगे। आप यह देखेंगे कि इस संकट की घड़ी में परिवार तो साथ है, लेकिन रिश्तेदार सबसे पहले किनारा कर लेंगे। 2 जुलाई से 11 दिसम्बर के बीच में शनि का वक्रत्व काल में कुछ गृह क्लेश की स्थितियां बनेंगी। सास - बहु, ननद, भौजाई, देवरानी, जेठानी में नोंक-झोंक चलेगी। भाईयों से सम्पत्ति व बटवारे सम्बन्धी विवाद का किसी की मध्यस्थता से होगा तथा उसमें आपको मन थोड़ा बड़ा रखना पड़ेगा।
विद्याध्यन, पढ़ाई व करियर :-
इस साल विद्यार्थी अपने लक्ष्यों पर ध्यान केन्द्रित कर पूर्ण रूप से एकाग्रभाव से लक्ष्यों के प्राप्ति की दिशा में लग जाएंगे, एकाग्रचित होकर अध्ययन करेंगे। करियर में छोटी-मोटी परेशानियां वर्ष के मध्य में आएंगी। काम-काज व नौकरी में बॉस व टीम से समन्वय का आभाव रहेगा। 2 जून में, नौकरी से सम्बन्धित परीक्षा, विभागीय परीक्षा प्रतियोगी परीक्षा का परिणाम अनुकूल आयेगा, आपका प्रयास सार्थक होगा, मेहनत रंग लायेगी। सहकर्मी आपके विरुद्ध अधिकारियों के कान भरेंगे, लेकिन आप अपनी मेहनत व परिश्रम से सभी का दिल जीत लेंगे। कार्यक्षेत्र में आप अपनी योग्यता व काबिलियत से सभी से लोहा मनवाएंगे। विद्यार्थियों को गायत्री मंत्र का नित्य जप करना चाहिए। उससे एकाग्रचित्ता व स्मरण शक्ति का विकास होगा।
से 31 अक्टूबर के मध्य उच्च के बृहस्पति
प्रेम-प्रसंग मित्र:-
इस साल शनि की ढैय्या का प्रभाव है, अतः विवाहेत्तर प्रेम-प्रसंग व संबंधों से आपको बचना चाहिए कहीं न कहीं यह आपकी कीर्ति व करियर में बाधा उत्पन्न कर सकते हैं, इस वर्ष आपको प्रेम प्रस्ताव प्राप्त होंगे। परंतु विपरित ग्रह स्थितियों के कारण उनके उजागर होने का खतरा बना हुआ है। जून से अक्टूबर के मध्य प्रेम संबंधों में कुछ गलत फहमियां पैदा हो सकती हैं, गलत फहमियां समय रहते निपटा लें। मित्र हर मुश्किल कठिन परिस्थिति में आपके साथ रहेंगे। यथायोग्य व यथासम्भव सहयोग भी मित्रों से प्राप्त होता रहेगा।
वाहन खर्च व शुभकार्य:-
वाहन पर इस वर्ष बार-बार खर्च होने के योग हैं। बार-बार वाहन को सुधारने में धन का व्यय होगा। बेहतर यही होगा कि पुराने वाहन पर बार-बार खर्चा करने की अपेक्षा नए वाहन का विचार करें। इस वर्ष शनि की ढैय्या का प्रभाव आपकी राशि पर है, अतः बच्चों को वाहन बिल्कुल भी नहीं दें, तथा आप वाहन चलाते समय पूरी सावधानी रखनी है। फिजूलखर्ची व व्यर्थ के खर्चों पर लगाम लगावें । इस वर्ष 2 जून से 31 अक्टूबर के मध्य कोई मांगलिक व शुभ प्रसंग की स्थिति उच्च के बृहस्पति के कारण बन सकती है।
हानि, कर्ज, व अनहोनी:-
इस वर्ष 2 जुलाई से 11 दिसम्बर के मध्य में शनि के वक्रत्व काल में किसी रिश्तेदार या मित्र के साथ कोई अनहोनी की संभावना है। व्यापार व कामकाज में धनहानि या मानहानि होने के योग हैं, एक-एक कदम फूंक-फूंक कर रखें, नौकरी में बहुत ही संजीदगी व गम्भीरता से अपने काम को अंजाम दें, अजनबी व अपरिचित डायमंड
व्यक्तियों से रुपयों-पैसों का लेन-देन का व्यवहार बिल्कुल भी नहीं करें, अन्यथा कोई झूठा आरोप या कलंक आप पर लग सकता है। कोई बड़ी या आर्डर इस वर्ष कैसिंल हो सकता है। कर्मचारी व भागीदार के बारे में पूरी जानकारी रखें व सतर्क रहें।
यात्राएं :-
राह महाराज तीसरे स्थान में छोटी-मोटी यात्राएं रखेंगे। हालांकि यात्राएं कोई खास फलप्रद नहीं रहेगी। यात्राओं में छोटा-मोटा कष्ट भी रहेगा। परिवार के साथ किसी धार्मिक व पर्यटन स्थल की यात्रा का प्रोग्राम मार्च से मई के बीच में बन सकता है।
उपाय :-
आपकी राशि का अधिपति बृहस्पति है। अतः गुरुवार को साधु संत व सन्यासियों को भोजन करवाएं। विष्णु सहस्त्रनाम या ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र की 1 माला नित्य करें। किसी मंदिर या धार्मिक स्थल की सेवा करें, सवा पांच रती का पुखराज या सुनैला गुरुयंत्र में जड़वाकर धारण करें।
गुरुवार को पानी में हल्दी डालकर नहावें।
धनु राशि की चारित्रिक विशेषताएं
धनु राशि के स्वामी बृहस्पति हैं। बृहस्पति देवगुरु माने जाते हैं। बृहस्पति बुद्धि व शासन क्षमता का परिचायक ग्रह है, जो कि जातक को विलक्षण प्रतिभा देता है। ऐसे जातकों में बुद्धि, शासन करने की योग्यता व क्षमता उच्च कोटि की होती है।
आपकी राशि धनु है । 'धनुष लिए हुए व्यक्ति आधा घोड़ा तथा आधा मनुष्य' आपकी राशि का निशान है। ऐसे व्यक्ति पति को अपने जीवन में विशेष स्थान देते हैं। कुछ उतावले व अति उत्साही प्रवृत्ति के होते हैं। आपका जन्म धनु राशि में हुआ है, तो आप विशेष प्रभावशाली व्यक्ति होने के साथ-साथ बुद्धिमान, ईमानदार तथा उदार हृदय के हैं। आप बिना प्रत्युपकार की भावना से दूसरों की भलाई करते रहते हैं। आप सामाजिक कार्यों में सक्रिय हिस्सा लेते हैं। बृहस्पति से प्रभावित व्यक्तियों में बड़े गजब की नेतृत्व शक्ति होती है। यदि आप राजनैतिक कार्य-कलापों में सक्रिय हिस्सा लें, तो शीघ्र ही आप उच्च पदस्थ नेता बन सकते हैं।
धनु राशि के व्यक्ति, अल्पसंतति व दिवाबली होते हैं। इस राशि का चिह्न ‘प्रत्यंचा चढ़ा हुआ धनुष' है। ऐसे व्यक्ति लक्ष्य भेदन होते हैं। ये अपने जीवन के लक्ष्यों को बड़े दत्तचित्त होकर एकाग्रता के साथ अपने कार्य को सफल बनाने में प्रयत्नशील रहते हैं। ये श्रेष्ठतर मित्र साबित होते हैं।
धनु राशि कांचन वर्ण, द्विस्वभाव व अर्द्धजल राशि है। इसका प्राकृतिक स्वभाव अधिकारप्रिय, करुणामय और मर्यादा इच्छुक है। इस राशि वाले व्यक्ति विशेषत: गेहुएं रंग, बड़ी-बड़ी आंखें, उन्नत ललाट व गाल फूले हुए बुद्धिजीवी होते हैं। अध्ययन व अध्यापन कराते हुए पठन-पाठन में रुचि लेने वाले होते हैं। स्वभावानुसार धार्मिक होते हैं।
धनु राशि में उत्पन्न जातक स्वस्थ एवं बलवान होते हैं। स्वभाव से यद्यपि शांत होते हैं, परंतु यदा-कदा अभिमान के भाव का भी प्रदर्शन करते हैं। ये अत्यंत ही बुद्धिमत्ता से अपने सांसारिक कार्यों को संपन्न करके उनमें सफलता अर्जित करते हैं, फलतः जीवन में धनैश्वर्य-वैभव एवं सुख-संसाधनों को अर्जित करने में समर्थ रहते हैं। ये आदर्शवाद एवं आध्यात्मिकता के मध्य प्रवृत्त होकर भौतिक सुखों के प्रति आकृष्ट होकर उनका उपयोग करते हैं। ये अपने समस्त कार्यों को नियमानुसार संपन्न करते हैं। लोगों के विश्वासपात्र होते हैं, परंतु स्वयं दूसरे पर कम ही विश्वास करते हैं। राजनीति, कानून, गणित और ज्योतिष आदि विषयों में इनकी रुचि रहती है तथा परिश्रमपूर्वक इन क्षेत्रों में सफलता प्राप्त करते हैं। इनको प्रेम से ही वश में किया जा सकता है, अन्य प्रलोभनों से नहीं।
आप एक अध्ययनशील पुरुष के रुप में जीवन संघर्ष करेंगे तथा किसी के प्रति भी मन में अनावश्यक द्वेष या ईर्ष्या का भाव नहीं रखेंगे। फलतः समाज में आप आदरणीय होंगे। शत्रु एवं विरोधी पक्ष से भी आप उदारता का व्यवहार करके उनको प्रभावित करेंगे। साथ ही अपनी व्यवहार कुशलता एवं धैर्ययुक्त प्रवृत्ति से कार्यक्षेत्र में उन्नति के मार्ग पर प्रशस्त होकर सुखपूर्वक जीवन व्यतीत करेंगे।
आप एक बुद्धिमान पुरुष होंगे तथा बुद्धिमत्तापूर्वक सांसारिक कार्यों में सफलता अर्जित करके धन-ऐश्वर्य एवं सुख-संसाधनों को अर्जित करेंगे। आप में उदारता का भाव भी विद्यमान होगा तथा अवसरानुकूल अन्य जनों की सेवा तथा सहायता करने को तत्पर होंगे। आर्थिक रुप से आपकी स्थिति दृढ़ होगी तथा प्रचुर मात्रा में धन-लाभ अर्जित करने में आपको सफलता मिलेगी।
आप में तेजस्विता का भाव विद्यमान होगा। यदा-कदा उग्रता का भी प्रदर्शन करेंगे। राजकार्य या सरकारी सेवा में आप तत्पर रहेंगे तथा राजनीति के क्षेत्र में भी आपको सफलता की प्राप्ति हो सकती है। आपकी श्रेष्ठ कार्यों में रुचि रहेगी तथा इन्हीं कार्यकलापों से आपकी प्रतिष्ठा बनेगी।
आप एक आस्तिक व्यक्ति होंगे तथा धर्म के प्रति आपके मन में पूर्ण श्रद्धा रहेगी। आप निष्ठापूर्वक धार्मिक कार्य-कलापों को सम्पन्न करेंगे, साथ ही तीर्थ यात्राएं भी आप समय-समय पर करते रहेंगे। मित्र एवं बंधु वर्ग के आप प्रिय एवं आदरणीय होंगे तथा उनसे इच्छित लाभ एवं सहयोग प्राप्त होता रहेगा। इस प्रकार आप उदार, दानशील, तेजस्वी, महत्त्वाकांक्षी एवं व्यवहार कुशल व्यक्ति होंगे तथा आनन्दपूर्वक भौतिक सुखों का उपयोग करते हुए अपना समय व्यतीत करेंगे।
यदि आपका जन्म धनु राशि के 'मूल नक्षत्र' (ये, यो, भा, भी) में हुआ है, तो आपका जन्म 7 वर्ष की केतु की महादशा में हुआ है। आपकी योनि-श्वान, गण-राक्षस, वर्ण-क्षत्रिय, हंसक-अग्नि, नाड़ी-आद्य, पाया-तांबा है। इस नक्षत्र के प्रथम दो चरण का वर्ग- हिरण तथा अंतिम दो चरण का वर्ग मूषक है। यह अण्डमूल नक्षत्र के हैं। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाला जातक बड़ा तेजस्वी, धनी व सुखी होता है।
यदि आपका जन्म धनु राशि के 'पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र' (भू, धा, फा, ढ़ा) में हुआ है, तो आपका जन्म 20 वर्ष की शुक्र की महादशा में हुआ है। आपकी योनि - कपि, गण-मनुष्य, वर्ण-क्षत्रिय, हंसक- अग्नि, नाड़ी-मध्य, पाया-तांबा तथा वर्ग- मूषक है। यह जल नक्षत्र है। इस नक्षत्र में जन्मे व्यक्ति शीतल स्वभाव के, किन्तु स्वाभिमानी होते हैं। इनमें बार-बार पेय पदार्थ या पानी पीने की आदत होती है।
यदि आपका जन्म धनु राशि के ‘उत्तराषाढ़ा नक्षत्र' के प्रथम चरण (भे) में हुआ है, तो आपका जन्म 6 वर्ष की सूर्य की महादशा में हुआ है। आपकी योनि-नकुल, गण-मनुष्य, वर्ण-क्षत्रिय, हंसक- अग्नि, नाड़ी-अन्त्य, पाया-तांबा एवं वर्ग मूषक है। इस नक्षत्र में जन्मे व्यक्ति धर्मभीरु एवं कृतज्ञ होते हैं। अधिक मित्र बनाना इनकी आदत में होता है।
उपाय:- 4» रत्ती का पुखराज रत्न 'गुरु यंत्र' में जड़वाकर धारण करें। पुखराज के अलावा सुनैला रत्न भी धारण कर सकते हैं। नित्य हल्दीयुक्त दूध का सेवन करें। विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। घर के बड़े-बुजुर्गों व वृद्ध आदमी की सेवा करें, उनका आशीर्वाद लें। वट वृक्ष (बडले के वृक्ष) को सींचे।
धनु राशि की प्रमुख विशेषताएं
- राशि – धनु
- राशि चिन्ह – आधा मानव व आधा अश्व (धनुषधारी)
- राशि स्वामी – बृहस्पति
- राशि तत्त्व – अग्नि तत्त्व
- राशि स्वरूप – द्विस्वभाव
- राशि दिशा – पूर्व
- राशि लिंग व गुण – पुरुष, सत्त्वगुणी
- राशि जाति – क्षत्रिय
- राशि प्रकृति व स्वभाव – क्रूर स्वभाव, पित्त प्रकृति
- राशि का अंग – उरु (जांघ)
- अनुकूल रत्न – पुखराज
- अनुकूल उपरत्न – सुनैला, टोपाज
- अनुकूल धातु – सोना
- अनुकूल रंग – पीला
- शुभ दिवस – गुरुवार
- अनुकूल देवता – विष्णु
- व्रत / उपवास – गुरुवार
- अनुकूल अंक – 3
- अनुकूल तारीखें – 3, 12, 30
- मित्र राशियां – मेष, सिंह
- शत्रु राशियां – कर्क, वृश्चिक, मीन
- व्यक्तित्व – ग्रहणशील प्रवृत्ति, अध्ययनप्रिय
- सकारात्मक तथ्य – बुद्धिमान, तर्कवादी, दृढ़ निश्चयी, लक्ष्य प्राप्त करने वाला
- नकारात्मक तथ्य – अत्यधिक हठधर्मिता, अव्यावहारिकता