Dharmendra Pradhan Resignation: छात्रों का आक्रोश, संघ की नसीहत! वो 5 कारण Gen-Z के सामने क्यों झुकी सरकार
Published: Saturday, July 25, 2026, 15:42 [IST]
Dharmendra Pradhan Resignation: देश भर में NEET परीक्षा धांधली को लेकर भड़के आक्रोश और जंतर मंतर पर लगातार जारी प्रदर्शन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपना इस्तीफा सौंपना पड़ा। जंतर-मंतर पर हफ्ते भर से डटे 'कॉकरोच जनता पार्टी' के प्रदर्शनकारियों और लाखों छात्रों के भारी दबाव ने सरकार को बैकफुट पर ला दिया।
दिल्ली के मेट्रो स्टेशनों के बंद होने से लेकर सड़कों पर हुए चक्का जाम तक, Gen-Z का यह आंदोलन अब केवल एक सोशल मीडिया कैंपेन नहीं, बल्कि युवाओं का एक बड़ा राजनीतिक व सामाजिक शक्ति प्रदर्शन बन चुका है। नीचे समझिए वे 5 प्रमुख कारण, जिनकी वजह से सरकार को इस युवा जनसैलाब के आगे झुकना पड़ा।
सड़कों पर उतरा Gen-Z का असली दम
जंतर-मंतर पर 24 घंटे डटे हजारों युवाओं ने साबित कर दिया कि उनका यह आंदोलन सिर्फ सोशल मीडिया का ट्रेंड या हैशटैग नहीं था। दिन-रात एक करके सड़क पर डटे छात्रों के जोश ने प्रशासन के हाथ-पांव फुला दिए। जब राजधानी दिल्ली में एहतियातन 18 मेट्रो स्टेशन बंद करने पड़े और कनॉट प्लेस जैसे व्यस्त बाजार में आवाजाही ठप हो गई, तो केंद्र सरकार को साफ समझ आ गया कि युवाओं के इस बेकाबू जनसैलाब को पुलिसिया बल या पाबंदियों से शांत करना पूरी तरह नामुमकिन हो चुका है।
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बिहार से पूरे देश में फैली आग
आंदोलन का सबसे उग्र और असरदार केंद्र बिहार बना, जहां छात्रों के आक्रोश ने पूरे राज्य की व्यवस्था को ठप कर दिया। शनिवार यानी आज पूरा बिहार बंद है। कई जिलों में पुलिस गाड़ियों में आगजनी, पत्थरबाजी और इंटरनेट सेवाओं को बंद करने जैसी नौबत आ गई। बिहार से भड़की यह चिंगारी तेजी से देश के अन्य राज्यों में फैलने लगी। आंदोलन के ऑल-इंडिया रूप लेने और बिगड़ती कानून-व्यवस्था ने केंद्र सरकार के होश उड़ा दिए, जिससे मामले को तुरंत दबाने के बजाय राजनीतिक हल निकालना मजबूरी बन गया।
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अपनों का विरोध और संघ की नसीहत
जब आंदोलनकारी छात्रों पर लाठीचार्ज हुआ, तो बीजेपी और आरएसएस (RSS) के भीतर से ही असंतोष की आवाजें उठने लगीं। पूर्व शिक्षा मंत्री और बीजेपी के संस्थापकों में से एक मुरली मनोहर जोशी ने भी पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाया था। सबसे बड़ा झटका तब लगा जब संघ प्रमुख मोहन भागवत ने सरकार को सख्त नसीहत दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश के युवाओं की जायज मांगों पर सख्ती या मनमानी थोपने के बजाय उनसे सीधे संवाद के जरिए समाधान निकाला जाना चाहिए। संगठन के अंदरूनी दबाव और संघ की इस सलाह ने सरकार पर नैतिक दबाव बनाया, जिससे शिक्षा मंत्री का इस्तीफा स्वीकार करना पड़ा।
चुनावी नुकसान और कैडर वोट खिसकने का डर
NEET पेपर लीक मुद्दे से बीजेपी का अपना कोर मिडिल-क्लास वोटबैंक और युवा कैडर बेहद आहत और नाराज हो रहा था। आने वाले उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड विधानसभा चुनावों में इस आक्रोश का सीधा खामियाजा भुगतने की गहरी आशंका थी। पार्टी आलाकमान को यह बात स्पष्ट हो चुकी थी कि अगर लाखों परीक्षार्थियों और उनके अभिभावकों के गुस्से को तुरंत शांत नहीं किया गया, तो चुनावी मैदान में बड़ा राजनीतिक और चुनावी नुकसान झेलना पड़ सकता है।
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विपक्ष को मुद्दा छीनने से रोकना
कांग्रेस और आम आदमी पार्टी जैसी प्रमुख विपक्षी पार्टियां इस छात्र आंदोलन को अपने राजनीतिक पुनरुत्थान का जरिया बनाने में पूरी ताकत से जुट गई थीं। विपक्षी नेता सड़कों से लेकर संसद तक इस मुद्दे पर सरकार को घेर रहे थे। बीजेपी किसी भी कीमत पर विपक्ष को इस जन-आंदोलन का श्रेय या राजनीतिक माइलेज नहीं लेने देना चाहती थी। स्थिति को और बिगड़ने से रोकने और विपक्ष के हाथों से यह तीखा मुद्दा छीनने के लिए शिक्षा मंत्री का इस्तीफा ही सबसे त्वरित विकल्प बचा था।