मेरठ में पुलिस पर मारपीट के आरोपों से गरमाया मामला, DIG सहारनपुर करेंगे जांच
मेरठ। मेरठ में तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडेय और पुलिसकर्मियों पर किसान नेताओं के साथ कथित मारपीट एवं हिरासत में प्रताड़ना के आरोपों का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। किसान नेता दिग्विजय भाटी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद एडीजी मेरठ जोन भानु भास्कर ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच डीआईजी सहारनपुर अभिषेक सिंह को सौंप दी है।
शुक्रवार को सपा विधायक अतुल प्रधान ने अपने आवास पर प्रेसवार्ता कर मामले में दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की मांग की। प्रेसवार्ता के दौरान दिग्विजय भाटी की एक आंख पर पट्टी बंधी थी। घटना का जिक्र करते हुए वह भावुक होकर रो पड़े।
वीडियो में लगाए मारपीट के आरोप
सोशल मीडिया पर वायरल करीब साढ़े चार मिनट के वीडियो में दिग्विजय भाटी ने आरोप लगाया कि वह 19 अगस्त को ललिता गौतम हत्याकांड के मामले में जेल भेजे गए प्रदर्शनकारियों को लेकर तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडेय से मिलने पहुंचे थे। उनके अनुसार, एसएसपी कार्यालय में उनके साथ गाली-गलौज की गई और बाद में दूसरे कमरे में ले जाकर मारपीट की गई।
दिग्विजय ने आरोप लगाया कि जूते से मारपीट किए जाने के कारण उनकी आंख में गंभीर चोट आई। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनका सिर कपड़े से ढककर दूसरी जगह ले जाया गया, जहां पुलिसकर्मियों ने उनके साथ फिर मारपीट की।
उन्होंने सिविल लाइंस थाना प्रभारी अखिलेश गौड़ समेत अन्य पुलिसकर्मियों पर भी मारपीट के आरोप लगाए। दिग्विजय का दावा है कि उनके हाथ-पैर बांधकर लाठियों से पीटा गया और मारपीट के दौरान वह बेहोश हो गए।
एनकाउंटर की साजिश का भी आरोप
दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव ने तत्कालीन एसएसपी समेत कुछ पुलिस अधिकारियों पर एनकाउंटर की योजना बनाने का भी गंभीर आरोप लगाया है। उनका दावा है कि पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में उन्हें जान से मारने जैसी बातें कही गईं।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले की जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
दुर्घटना का बयान लिखवाने का आरोप
सपा विधायक अतुल प्रधान ने आरोप लगाया कि कथित मारपीट के बाद दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव से एक पत्र लिखवाया गया, जिसमें उनके साथ स्कूटी से दुर्घटना होने की बात दर्ज थी। विधायक ने कहा कि यदि पुलिस के पास दुर्घटना से संबंधित कोई साक्ष्य है तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
अतुल प्रधान ने एसएसपी कार्यालय में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज सुरक्षित रखने की भी मांग की है। उन्होंने कहा कि कथित घटना से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य सीसीटीवी फुटेज में मिल सकते हैं।
जांच में CCTV और मेडिकल रिपोर्ट भी अहम
एडीजी मेरठ जोन भानु भास्कर द्वारा जांच डीआईजी सहारनपुर को सौंपे जाने के बाद अब मामले में कथित मारपीट, हिरासत के दौरान पुलिस का व्यवहार, मेडिकल परीक्षण, सीसीटीवी फुटेज और संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच की जाएगी।
अतुल प्रधान ने कहा कि केवल तत्कालीन एसएसपी का तबादला पर्याप्त नहीं है। उन्होंने पूरे मामले में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
ललिता गौतम हत्याकांड से जुड़ा है विवाद
पूरा मामला मेरठ के टीपीनगर क्षेत्र की रहने वाली बीए तृतीय वर्ष की छात्रा ललिता गौतम की हत्या के बाद हुए विरोध-प्रदर्शन से जुड़ा है। परिजनों के अनुसार, ललिता 15 मई को परीक्षा देने के लिए घर से निकली थी, लेकिन वापस नहीं लौटी। 17 मई को उसका शव रोहटा थाना क्षेत्र के उकसिया गांव में गन्ने के खेत से बरामद हुआ था।
परिजनों ने सामूहिक दुष्कर्म के बाद हत्या का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया था। इसके बाद 8 जुलाई को मेरठ कलेक्ट्रेट के बाहर हुए प्रदर्शन में पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठे थे।
अब दिग्विजय भाटी के वायरल वीडियो और गंभीर आरोपों के बाद मामला फिर सुर्खियों में है। डीआईजी सहारनपुर की जांच रिपोर्ट से ही स्पष्ट होगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और कथित घटनाक्रम में किन पुलिसकर्मियों की भूमिका रही।