DRC: बेक़ाबू हो रहा इबोला प्रकोप, यूएन की चेतावनी

DRC: बेक़ाबू हो रहा इबोला प्रकोप, यूएन की चेतावनी

मुख्य बिन्दु

  • डीआर काँगो में इबोला से मौतों की संख्या 2,516 पहुँची.
  • राहत कार्रवाई के लिए उपलब्ध धनराशि कुछ ही हफ़्तों में ख़त्म हो सकती है.
  • मृतकों में अग्रिम मोर्चे पर काम कर रहे दर्जनों स्वास्थ्यकर्मी शामिल.

संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठ इबोला समन्वयक जूलियन हार्निस ने कहा, “हमारे पास केवल अगले कुछ हफ़्तों के लिए ही धन बचा है और जल्द ही यह ख़त्म हो जाएगा. वित्तीय सहायता और कार्रवाई में हर देरी से यह महामारी अधिक घातक होती जा रही है, उस पर क़ाबू पाना कठिन हो रहा है और राहत कार्रवाई की लागत भी बढ़ रही है. इसलिए हमें तत्काल अन्तरराष्ट्रीय सहायता की ज़रूरत है.”

स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा शुक्रवार को जारी नवीनतम आँकड़ों के अनुसार, 15 मई को प्रकोप घोषित होने के बाद से 5,290 लोग इबोला से संक्रमित हुए हैं और 2,516 लोगों की मौत हुई है.

पुष्टि किए गए मामलों में 1,152 लोग ठीक हो चुके हैं, जबकि क़रीब 840 लोग पृथकवास में हैं या अस्पताल में भर्ती हैं. इबोला से मृत्यु दर 47.6 प्रतिशत है, जबकि संक्रमित लोगों के सम्पर्क में आए 82.9 प्रतिशत लोगों की निगरानी की जा रही है.

तेज़ी से बढ़ती मौतें

इबोला प्रकोप के केन्द्र, इतुरी प्रान्त के बुनिया से पत्रकारों को जानकारी देते हुए जूलियन हार्निस ने चेतावनी दी कि बीमारी “बहुत तेज़ी से फैल रही है”. अब तक हुई कुल मौतों में से आधी सिर्फ़ पिछले 20 दिनों में दर्ज की गई हैं.

उन्होंने कहा, “महामारी अब फ़्रांस से भी बड़े क्षेत्र में फैल चुकी है और जिस तेज़ी से यह फैल रही है, उससे निपटने की कार्रवाई उस रफ़्तार से आगे नहीं बढ़ पा रही है.” उन्होंने बताया कि बेहद कठिन हालात के कारण अग्रिम मोर्चे पर काम कर रहे स्वास्थ्यकर्मियों के लिए इबोला पर क़ाबू पाना मुश्किल हो रहा है.

प्रकोप शुरू हुए तीन महीने हो चुके हैं. इस दौरान 160 स्वास्थ्यकर्मी इबोला से संक्रमित हुए हैं और उनमें से 43 की मौत हुई है.

जूलियन हार्निस ने कहा कि वायरस के ख़तरे के साथ-साथ स्वास्थ्यकर्मियों और अग्रिम मोर्चे पर काम रहे अन्य कर्मियों को हिंसा का भी सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने बताया, “स्वास्थ्यकर्मियों और राहतकर्मियों पर युवाओं ने हमले किए हैं, एम्बुलेंसों को जलाया गया और उन पर पथराव किया गया,जबकि स्वास्थ्य केन्द्रों को भी निशाना बनाया गया है.”

वरिष्ठ मानवीय सहायता अधिकारी ने कहा, “ज़मीनी हालात बेहद कठिन हैं, लेकिन हम ज़रूरी मानवीय और चिकित्सा सहायता तब तक पहुँचाते रहेंगे, जब तक प्रकोप पर क़ाबू नहीं पा लिया जाता.”

उन्होंने बताया, “पिछले सप्ताह मैं इबोला से सबसे अधिक प्रभावित इलाक़ों में से एक में जा रहा था और केवल 60 किलोमीटर की दूरी तय करने में तीन घंटे लग गए.”

राहत कार्रवाई में एक और बड़ी बाधा उन छह पूर्वी प्रान्तों (इतुरी, नॉर्थ कीवु, साउथ कीवु, हौत-ऊले और चोपो और बास-ऊले) में बुनियादी सेवाओं की कमी है, जहाँ वायरस फैल रहा है. संसाधनों से समृद्ध इस क्षेत्र में दशकों से जारी हिंसा के कारण स्वास्थ्य एवं अन्य ज़रूरी सेवाएँ बुरी तरह प्रभावित हुई हैं.

सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की कमज़ोर व्यवस्था और बैंकों की सीमित मौजूदगी भी मुश्किलें बढ़ा रही है.

जूलियन हार्निस ने कहा, “इस क्षेत्र में बैंकिंग व्यवस्था लगभग ठप है. हम कर्मियों को वेतन के लिए आवश्यक धनराशि वहाँ तक नहीं पहुँचा पा रहे हैं, जिससे अग्रिम मोर्चे पर काम कर रहे कर्मियों में भारी असन्तोष है.”

© UNOCHA/Ramatoulaye Moussa Maz पूर्वी डीआर काँगो के इतुरी प्रान्त में विस्थापित लोगों के एक शिविर से गुज़रती एक महिला.

अमेरिका से अतिरिक्त सहायता

जूलियन हार्निस ने बताया कि हालाँकि अमेरिका ने अस्पतालों में बिस्तरों की संख्या बढ़ाने, सुरक्षित तरीक़े से अन्तिम संस्कार करने व अन्य ज़रूरतों के लिए डीआर काँगो सरकार को 8 करोड़ डॉलर की सहायता दी है. लेकिन, विशेषकर पिछले दो वर्षों में मानवीय सहायता में कटौती के कारण राहत संगठनों की काम करने की क्षमता 30 प्रतिशत से अधिक घट गई है.

इन चुनौतियों के बावजूद, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP), संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF), संयुक्त राष्ट्र प्रवासन एजेंसी (IOM) और Médecins Sans Frontières समेत कई विशेषज्ञ एजेंसियाँ और साझीदार, डीआर काँगो के अधिकारियों के साथ मिलकर इबोला पर क़ाबू पाने के प्रयास जारी रखे हुए हैं.

जूलियन हार्निस ने कहा, “यह एक अदृश्य ख़तरा है, जो अचानक किसी समुदाय में फैल जाता है. आसपास लोग बीमार पड़ने लगते हैं और अपनों की जान जाती है. ऐसे हालात किसी भी समुदाय में गहरा डर पैदा करते हैं.”