जालंधर ED की बड़ी कार्रवाई: अवैध कॉल सेंटर से अमेरिकी नागरिकों को ठगने वाले गिरोह की 187 करोड़ की लग्जरी संपत्तियां अटैच - Jalandhar News

जालंधर के प्रवर्तन निदेशालय (ED) के जोनल कार्यालय ने अवैध अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर चलाकर अमेरिकी नागरिकों के साथ साइबर धोखाधड़ी और वित्तीय अपराध करने वाले गिरोह पर बड़ी कार्रवाई की है। प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत ED ने आरोपियो

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FBI के इनपुट पर शुरू हुई थी कार्रवाई

यह पूरा मामला तब सामने आया जब अमेरिका की जांच एजेंसी एफबीआई (FBI) ने भारतीय एजेंसियों से इनपुट साझा किया था। इसके आधार पर सीबीआई (CBI) ने मामला दर्ज किया। जांच में पता चला कि भारत में बैठा एक गिरोह अवैध कॉल सेंटर के जरिए अमेरिकी नागरिकों को निशाना बना रहा था और उनसे करोड़ों डॉलर की ठगी कर रहा था। इसके बाद ईडी (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

36 कर्मचारियों के साथ चल रहा था 'अवैध' खेल

ईडी की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है कि “Digikaps – The Future of Digital” नाम से एक अवैध कॉल सेंटर चलाया जा रहा था। इस सेंटर में करीब 36 कर्मचारी काम कर रहे थे।

इन कर्मचारियों में जिगर अहमद, यश खुराना, इंद्रजीत सिंह भाली और निखिल शर्मा जैसे लोग शामिल थे। वहीं, इस पूरे नेटवर्क की निगरानी और संचालन जॉनी, दक्षे सेठी और गौरव वर्मा द्वारा किया जा रहा था।

ऐसे बनाते थे अमेरिकी नागरिकों को शिकार

यह गिरोह बहुत ही शातिराना तरीके से अमेरिकी नागरिकों को ठगता था। कॉल सेंटर के कर्मचारी अमेरिकी लोगों को टेक्निकल सपोर्ट देने के नाम पर झांसे में लेते थे और उनकी निजी व गोपनीय जानकारी चुरा लेते थे।

इसके बाद वे अमेरिका के टैक्स विभाग यानी आईआरएस (IRS) की ओर से कानूनी कार्रवाई का डर दिखाते थे। डर के मारे लोग अपने पैसे क्रिप्टो खातों (Crypto Accounts) में भेजने के लिए मजबूर हो जाते थे।

काली कमाई से खरीदीं संपत्तियां और विला

ठगी के जरिए जुटाई गई इस मोटी रकम को क्रिप्टो वॉलेट के माध्यम से शेल (फर्जी) कंपनियों जैसे कि 'Bliss Infraproperties LLP' में ट्रांसफर किया जाता था।

इसके बाद इस अवैध कमाई को सफेद करने के लिए रियल एस्टेट कारोबार में निवेश किया जाता था। गिरोह के मुख्य सदस्यों—जॉनी उर्फ जॉनी त्यागी, दक्षे सेठी, राघव सतिहा, निखिल वर्मा, गौरव वर्मा और गौतम ढींगरा ने इस पैसे से हरियाणा, दिल्ली और गोवा में महंगे रियल एस्टेट, फार्म हाउस और विला खरीदे।

छापेमारी में मिली थी भारी नकदी और दस्तावेज

इससे पहले जनवरी और फरवरी 2026 में ईडी ने पंजाब, हरियाणा और दिल्ली के 13 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की थी। इस कार्रवाई के दौरान अधिकारियों को कई डिजिटल उपकरण, 34 लाख रुपये की बेहिसाब नकदी और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज मिले थे।

इन दस्तावेजों से पता चला था कि आरोपियों ने भारत और विदेश में भारी-भरकम संपत्ति बना रखी है। फिलहाल ईडी ने 187.13 करोड़ रुपये की संपत्ति को कुर्क कर लिया है और मामले में आगे की कानूनी जांच जारी है।