टैक्स बचाने वाला इकलौता म्यूचुअल फंड: ELSS में मिलता है 80C डिडक्शन और सबसे कम 3 साल का लॉक-इन, जानें कैसे करें वेल्थ क्रिएशन ax saving mutual fund section 80c
म्यूचुअल फंड की सैकड़ों योजनाओं में से केवल ईएलएसएस (Equity Linked Savings Scheme) ही वह एकमात्र श्रेणी है जिस पर आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत टैक्स छूट मिलती है। जो करदाता पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Tax Regime) चुनते हैं, वे वित्तीय वर्ष में ₹1.5 लाख तक के निवेश पर टैक्स डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं। 30% वाले टैक्स स्लैब में रहने वाले निवेशक इस स्कीम के जरिए सालाना ₹46,800 तक का टैक्स बचा सकते हैं।
सबसे छोटा लॉक-इन पीरियड: केवल 3 साल में निकासी की आजादी
टैक्स बचाने वाले सभी पारंपरिक 80C विकल्पों में ईएलएसएस का लॉक-इन पीरियड सबसे कम है:
| टैक्स सेविंग विकल्प (धारा 80C) | अनिवार्य लॉक-इन अवधि | रिटर्न का प्रकार |
| ELSS (टैक्स सेवर म्यूचुअल फंड) | 3 वर्ष | मार्केट लिंक्ड (इक्विटी ग्रोथ) |
| टैक्स सेवर बैंक FD | 5 वर्ष | फिक्स्ड ब्याज |
| राष्ट्रीय बचत पत्र (NSC) | 5 वर्ष | फिक्स्ड ब्याज |
| यूलिप (ULIP) | 5 वर्ष | मार्केट लिंक्ड / मिक्स्ड |
| पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (PPF) | 15 वर्ष | सरकारी ब्याज दर |
| सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) | 21 वर्ष (या विवाह तक) | सरकारी ब्याज दर |
3 साल पूरे होते ही निवेशक अपनी यूनिट्स को भुना (Redeem) सकते हैं या चाहें तो बेहतर वेल्थ क्रिएशन के लिए निवेश जारी रख सकते हैं।
पोर्टफोलियो रणनीति: इक्विटी ग्रोथ के साथ महंगाई को पछाड़ने का मौका
सेबी के नियमानुसार, ईएलएसएस फंड्स की कुल संपत्ति का कम से कम 80% हिस्सा इक्विटी और इक्विटी से जुड़े शेयरों में निवेश किया जाता है। फंड मैनेजर लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों में डाइवर्सिफाइड तरीके से पैसा लगाते हैं। फिक्स्ड रिटर्न वाले विकल्पों (जैसे पीपीएफ या एफडी) के मुकाबले ईएलएसएस लंबी अवधि में महंगाई को मात देने वाला संभावित 12% से 15% का वेल्थ ग्रोथ रिटर्न देने में सक्षम माना जाता है।
SIP vs एकमुश्त (Lumpsum) में लॉक-इन के नियम
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एकमुश्त निवेश (Lumpsum): यदि आपने एक साथ ₹1.5 लाख जमा किए हैं, तो पूरी राशि 3 वर्ष पूरे होते ही एक साथ अनलॉक हो जाती है।
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मासिक एसआईपी (SIP): यदि आप ₹12,500 प्रति माह की SIP करते हैं, तो प्रत्येक किस्त (Installment) की तारीख से अलग-अलग 3 साल का लॉक-इन गिना जाएगा। यानी पहली किस्त 36वें महीने और 12वीं किस्त 48वें महीने अनलॉक होगी।
ईएलएसएस पर टैक्सेशन नियम
3 साल की लॉक-इन अवधि के बाद ईएलएसएस से होने वाले मुनाफे को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) माना जाता है। एक वित्तीय वर्ष में ₹1.25 लाख तक का लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पूरी तरह टैक्स-फ्री होता है, जबकि इससे अधिक के मुनाफे पर 12.5% की दर से टैक्स लागू होता है।