Exclusive: क्या है तिरुक्कुरल जिसे पीएम मोदी ने पुतिन को किया भेंट, 1330 दोहे वाले 'तमिल महाकाव्य' की पूरी कहानी

पीएम मोदी ने BRICS Summit में पुतिन को तिरुक्कुरल का रूसी अनुवाद भेंट किया। जानें क्या है यह प्राचीन तमिल ग्रंथ और इसमें मानव मूल्यों की क्या सीख है।

BRICS Summit 2026 के दौरान शुक्रवार, 11 सितंबर को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात हुई। दोनों नेताओं के बीच करीब 45 मिनट तक कई अहम मुद्दों पर बातचीत हुई। इस मुलाकात के दौरान पीएम मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को तोहफे में तमिल के प्रसिद्ध ग्रंथ 'तिरुक्कुरल' का रूसी अनुवाद भेंट किया। किताब देते समय प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह पुस्तक मानव मूल्यों से जुड़ी हुई है। आखिर तिरुक्कुरल क्या है और पीएम मोदी ने पुतिन को यह पुस्तक क्यों भेंट की? आइए जानते हैं इसके बारे में।

तिरुक्कुरल क्या है?

तिरुक्कुरल (Thirukkural) तमिल भाषा का एक प्रसिद्ध और प्राचीन नैतिक ग्रंथ है। इसे महान तमिल कवि और दार्शनिक तिरुवल्लुवर ने लिखा था। इस ग्रंथ में जीवन, नैतिकता, प्रेम, शासन, समाज और अच्छे आचरण से जुड़े विषयों पर बेहद संक्षिप्त लेकिन प्रभावशाली तरीके से बातें कही गई हैं। तिरुक्कुरल में व्यक्ति के अच्छे व्यवहार से लेकर समाज और शासन व्यवस्था तक के लिए महत्वपूर्ण विचार मिलते हैं।

तिरुक्कुरल का मतलब क्या है?

'तिरुक्कुरल' नाम 2 शब्दों से बना है। 'तिरु' का अर्थ पवित्र या सम्मानित और 'कुरल' का मतलब छोटी पंक्ति या संक्षिप्त काव्य रचना से है। बहुत बड़े विचार को सिर्फ 2 छोटी पंक्तियों में बताया जाता है, यही इसकी सबसे बड़ी खासियत है। यानी यहां पर लंबी कहानी या बड़ा अध्याय नहीं है। हर कुरल अपने आप में एक विचार देता है।

तिरुक्कुरल में कितने दोहे हैं?

  • तिरुक्कुरल में कुल 1,330 कुरल (दोहे) हैं। इन्हें 133 अध्यायों में बांटा गया है और प्रत्येक अध्याय में 10 कुरल हैं।
  • तिरुक्कुरल के रचनाकाल को लेकर विद्वानों में अलग-अलग मत हैं। इसका काल ईसा पूर्व दूसरी शताब्दी से लेकर ईसा की छठी शताब्दी के बीच माना जाता है।
  • इस ग्रंथ को मुख्य रूप से तीन बड़े हिस्सों में बांटा गया है:

अरम (Aram) – धर्म, नैतिकता और सदाचार से जुड़े विचार

पोरुल (Porul) – राजनीति, शासन, अर्थव्यवस्था और सामाजिक जीवन

इनबम (Inbam) – प्रेम और वैवाहिक जीवन से जुड़े विचार

पहला भाग अरम है। इसमें अच्छे आचरण, परिवार, दया, सत्य, कृतज्ञता और सही व्यवहार जैसी बातें हैं।

दूसरा भाग पोरुल है। इसमें समाज, शासन, नेतृत्व, न्याय, दोस्ती, शिक्षा, मेहनत और आर्थिक जीवन से जुड़ी बातें मिलती हैं।

तीसरा भाग इनबम है। इसमें प्रेम, मिलन, विरह और रिश्तों की भावनाओं को जगह दी गई है।

हर कुरल केवल दो पंक्तियों का होता है, लेकिन इन छोटी-छोटी पंक्तियों में जीवन से जुड़ी गहरी और महत्वपूर्ण सीख दी गई है।

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तिरुक्कुरल में राजनीति की भी बातें हैं?

हां। इसके दूसरे भाग में राजा, मंत्री, प्रशासन, न्याय, सेना, कूटनीति, दोस्ती, दुश्मनी और शासन से जुड़े कई विचार मिलते हैं। यानी एक तरफ यह इंसान को अच्छा इंसान बनने की बात करता है, तो दूसरी तरफ यह बताता है कि समाज और शासन कैसे बेहतर तरीके से चलना चाहिए।

तिरुक्कुरल की सबसे बड़ी खासियत क्या है?

इसकी सबसे बड़ी खासियत है सार्वभौमिकता। इसमें ऐसी बातें हैं जिन्हें अलग-अलग समय और समाज के लोग अपने जीवन से जोड़ सकते हैं। जैसे अच्छे व्यवहार की जरूरत, शिक्षा का महत्व, सही दोस्त चुनना, लालच से बचना, न्याय करना और दूसरों के साथ अच्छा व्यवहार करना। इसी वजह से तिरुक्कुरल का प्रभाव तमिलनाडु से बाहर भी पहुंचा और इसके कई भाषाओं में अनुवाद हुए।

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पीएम मोदी ने पुतिन को तिरुक्कुरल क्यों भेंट की?

पीएम मोदी द्वारा तिरुक्कुरल का रूसी अनुवाद पुतिन को भेंट करना भारत की समृद्ध तमिल साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत को सामने रखने का एक तरीका भी माना जा सकता है। तिरुक्कुरल में मानव जीवन, नैतिकता, अच्छे आचरण और समाज से जुड़े सार्वभौमिक विचार हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने भी किताब भेंट करते समय इसे मानव मूल्यों से जुड़ा ग्रंथ बताया। ऐसे में इसका रूसी अनुवाद पुतिन को देना दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और मानवीय मूल्यों की साझेदारी का संदेश देता है।

Extra Fact: 'तिरुक्कुरल' नाम से भारत में एक ट्रेन भी चलती है, जो तमिलनाडु के कन्याकुमारी को दिल्ली से जोड़ती है।

रूसी भाषा में तिरुक्कुरल कब पहुंचा?

यहां एक दिलचस्प फैक्ट है। रूसी भाषा में तिरुक्कुरल का ट्रांसलेशन नया नहीं है। जे. जे. ग्लाजोव और ए. कृष्णमूर्ति के संयुक्त प्रयास से तिरुक्कुरल का रूसी अनुवाद 1963 में हुआ था। इसके बाद 1974 में मॉस्को में अलीफ इब्रागिमोव का ट्रांसलेशन सामने आया। 1990 में पूरे तिरुक्कुरल का एक और रूसी अनुवाद पब्लिश हुआ। इसका मतलब है रूस में तमिल के इस महाकाव्य को समझने की कोशिश कई दशकों से हो रही है।

फिर 2026 में तिरुक्कुरल की चर्चा क्यों?

2026 में प्रधानमंत्री मोदी की विदेश यात्राओं के दौरान तिरुक्कुरल को दूसरी भाषाओं में पहुंचाने की बात फिर सामने आई। 31 अगस्त 2026 को उज्बेकिस्तान दौरे पर मोदी ने तिरुक्कुरल का उज़्बेक भाषा में अनुवाद करने की बात की थी। इसका मकसद तमिल महाकाव्य और भारतीय विचारों को ज्यादा लोगों तक पहुंचाना था। यह किताब भारत की सांस्कृतिक विरासत बन चुकी है जो अब दुनिया के सामने आ रही है।