EXPLAINER: डॉक्टरों की हड़ताल से चरमराई महाराष्ट्र की स्वास्थ्य व्यवस्था, जानें क्या है मिक्सोपैथी विवाद?| Navbharat Live
Updated On: Aug 05, 2026 | 05:39 PM IST
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सार
Maharashtra Doctors Strike: महाराष्ट्र में डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से ओपीडी सेवाएं ठप। जानें क्या है मिक्सोपैथी विवाद और क्यों 15 हजार रेजिडेंट डॉक्टर कर रहे हैं विरोध।

महाराष्ट्र में डॅाक्टरों की हड़ताल की सांकेतिक फोटो (सोर्स: एआई फोटो)
विस्तार
Mixopathy Controversy Explained: महाराष्ट्र की स्वास्थ्य व्यवस्था इस समय एक बेहद गंभीर और ऐतिहासिक संकट के मुहाने पर खड़ी है। राज्यभर के लगभग 12,000 से 15,000 रेजिडेंट डॉक्टरों ने 5 अगस्त की आधी रात से अनिश्चितकालीन हड़ताल का बिगुल फूंक दिया है।
इस हड़ताल का व्यापक असर मुंबई के प्रतिष्ठित अस्पतालों KEM, सायन, नायर और जे.जे. अस्पताल समेत राज्य के 32 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में देखने को मिल रहा है, जहां OPD और नियमित सर्जरी पूरी तरह ठप हो गई हैं।
मिक्सोपैथी पर तकरार
डॉक्टरों की इस नाराजगी की सबसे बड़ी वजह महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल का वह निर्णय है, जिसमें BHMS (होम्योपैथी) डिग्री धारकों को एलोपैथी दवाएं लिखने की अनुमति दी गई है।
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सरकार ने प्रावधान किया है कि होम्योपैथी डॉक्टर मात्र 6 महीने का सर्टिफिकेट कोर्स इन मॉडर्न फार्माकोलॉजी (CCMP) करके एलोपैथिक दवाएं लिख सकेंगे। एलोपैथिक डॉक्टरों के संगठनों, जैसे MARD और IMA, का कहना है कि यह मिक्सोपैथी मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ है। उनका तर्क है कि साढ़े पांच साल की कड़ी MBBS ट्रेनिंग की तुलना महज कुछ महीनों के कोर्स से नहीं की जा सकती।
डॉक्टर की आत्महत्या ने बढ़ाया आक्रोश
इस हड़ताल को सतारा जिले के फलटण में एक महिला डॉक्टर की आत्महत्या ने और अधिक संवेदनशील बना दिया है। मृत डॉक्टर ने अपने सुसाइड नोट में मकान मालिक के बेटे पर मानसिक प्रताड़ना और एक सब-इंस्पेक्टर पर यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए थे।
डॉक्टरों की मांग है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) या CID का गठन किया जाए, क्योंकि स्थानीय स्तर पर जांच में पक्षपात की आशंका जताई जा रही है।
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सेवाओं पर भारी असर और डॉक्टरों की चेतावनी
हड़ताल के पहले 24 घंटों में डॉक्टरों ने मानवीय आधार पर आपातकालीन और कैजुअल्टी सेवाएं जारी रखी हैं। हालांकि, सेंट्रल MARD ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने 24 घंटे के भीतर उनकी मांगों पर सकारात्मक रुख नहीं दिखाया, तो 6 अगस्त से आपातकालीन सेवाएं भी पूरी तरह बंद कर दी जाएंगी। राज्य के करीब 2 लाख एलोपैथिक डॉक्टर इस आंदोलन को अपना नैतिक समर्थन दे रहे हैं, जिससे निजी क्लीनिकों पर भी असर पड़ने की संभावना है।
व्यवस्था की पोल खोलते चौंकाने वाले आंकड़े
यह हड़ताल केवल नीतिगत निर्णयों के खिलाफ नहीं है, बल्कि डॉक्टरों के गिरते मानसिक स्वास्थ्य और काम के बोझ का भी परिणाम है। एक हालिया सर्वे (RMS 2.0) के अनुसार, महाराष्ट्र के 51% रेजिडेंट डॉक्टर हफ्ते में 80 घंटे से ज्यादा काम करते हैं और लगभग 78% डॉक्टर बर्नआउट का शिकार हैं। वहीं, विशेषज्ञों ने महाराष्ट्र स्वास्थ्य बजट 2026 में की गई कटौती को अपंग करने वाली उपेक्षा बताया है, जहां स्वास्थ्य आवंटन मानक बेंचमार्क से काफी कम रहा है।
मुंबई प्रेस क्लब में हुई बहस में जहां होम्योपैथी पक्ष ने इसे ग्रामीण इलाकों में डॉक्टरों की कमी को दूर करने का उपाय बताया, वहीं एलोपैथी पक्ष ने इसे सिस्टम की नाकामी करार दिया। फिलहाल, बॉम्बे हाई कोर्ट में यह मामला लंबित है, लेकिन डॉक्टरों के इस उग्र कदम ने महाराष्ट्र की गरीब जनता को इलाज के लिए दर-दर भटकने पर मजबूर कर दिया है। सरकार और डॉक्टरों के बीच यह ‘डेडलॉक’ कब टूटता है, इस पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं।
