Explainer: एफसीआरए संशोधन पर क्यों उठ रहे हैं सवाल? क्या हैं नए नियम और सरकार का क्या है पक्ष?

Thu, 06 Aug 2026 05:48 AM IST

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: रिया दुबे Updated Thu, 06 Aug 2026 05:48 AM IST

सार

एफसीआरए संशोधन पर अब देश के साथ-साथ अमेरिका में भी बहस छिड़ गई है। अमेरिकी सांसदों की टिप्पणियों के बाद यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय चर्चा में आ गया है। सरकार का कहना है कि प्रस्तावित बदलाव केवल पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए हैं, जबकि विपक्ष का आरोप है कि इससे केंद्र सरकार के अधिकार बढ़ेंगे और कुछ धार्मिक व अल्पसंख्यक संस्थाएं प्रभावित हो सकती हैं। फिलहाल विधेयक संसद के विचाराधीन है, जबकि नए एफसीआरए नियम लागू हो चुके हैं। आइए विस्तार से जानते हैं।

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Why Is the FCRA Amendment Facing Criticism? What Are the Proposed Changes and the Govt's Stand?

एफसीआरए - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

भारत में विदेशी फंडिंग को नियंत्रित करने वाले कानून विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) में प्रस्तावित संशोधन इन दिनों चर्चा में है। इसकी वजह सिर्फ देश के भीतर की बहस नहीं, बल्कि अमेरिका की प्रतिक्रिया भी है। विपक्ष, सरकार और अब अमेरिकी सांसदों की टिप्पणियों के बाद यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुर्खियों में है।  

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ऐसे में सवाल उठता है कि एफसीआरए क्या है? इसमें क्या बदलाव प्रस्तावित हैं? क्या बदलाव लागू हो चुके हैं? इसे लेकर क्या भ्रम है? सरकार का क्या कहना है? आइए जानते हैं...

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अभी चर्चा में क्यों है एफसीआरए?

अमेरिका के वेस्ट वर्जीनिया से रिपब्लिकन सांसद राइली मूर ने मंगलवार को एफसीआरए में प्रस्तावित संशोधनों पर चिंता जताई है। उनका दावा है कि इन बदलावों से भारत सरकार को चर्च और धार्मिक संस्थाओं के प्रबंधन में दखल देने का अधिकार मिल सकता है। उन्होंने इसे ईसाई समुदाय पर हमला बताते हुए कहा कि अगर विधेयक मौजूदा स्वरूप में पारित होता है तो इसका असर भारत-अमेरिका संबंधों पर भी पड़ सकता है।

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वहीं, सीपीआई(एम) सांसद जॉन ब्रिटास ने अमेरिकी सांसद की टिप्पणी का विरोध करते हुए इसे भारत का आंतरिक मामला बताया। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पार्टी पहले से एफसीआर के कड़े प्रावधानों का विरोध करती रही है।

विपक्ष को क्या आपत्ति है?

केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने बीते अप्रैल में आरोप लगाया था कि प्रस्तावित एफसीआरए संशोधन से केंद्र सरकार को किसी संस्था का एफसीआरए लाइसेंस नवीनीकरण न करने और उसके बाद विदेशी फंड से बनी संपत्तियों पर नियंत्रण स्थापित करने की शक्ति मिल सकती है। उनका दावा था कि इससे चर्च, ईसाई शैक्षणिक संस्थानों और अन्य अल्पसंख्यक संस्थाओं के हित प्रभावित हो सकते हैं। 

वहीं, तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने भी विधेयक का विरोध करते हुए कहा था कि यह ईसाई और अन्य अल्पसंख्यक संस्थानों को प्रभावित कर सकता है। उनका आरोप है कि मामूली प्रक्रियागत चूक के आधार पर पंजीकरण रद्द होने की स्थिति में स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और अनाथालय जैसी संस्थाओं की संपत्तियां भी प्रभावित हो सकती हैं।  

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