Explainer: एडॉप्टेशन, रीमेक और इंस्पायर्ड फिल्मों में क्या फर्क होता है? जानें तीनों के बीच असली अंतर

What are Difference Adaptation Remake and Inspired: फिल्मों की दुनिया में एक स्टोरी को पर्दे पर लाने के कई तरीके होते हैं. कभी फिल्म किसी किताब या नोवल पर बेस्ड होती है, तो कभी पुरानी फिल्म की स्टोरी को नए कलाकारों के साथ दोबारा बनाया जाता है. इसके अलावा कभी किसी स्टोरी या घटना से सिर्फ एक आइडिया लेकर बिल्कुल नई फिल्म बना दी जाती है. इन्हीं अलग-अलग तरीकों को समझने के लिए एडॉप्टेशन, रीमेक और इंस्पायर्ड जैसे शब्द इस्तेमाल होते हैं. आइए इनके अंतर को विस्तार से समझते हैं. 

एडॉप्टेशन फिल्म किसे कहते?

 सबसे पहले एडॉप्टेशन को समझते हैं. आसान भाषा में कहें तो जब किसी पहले से मौजूद कंपोजिशन को बेस बनाकर उसे फिल्म के रूप में पेश किया जाता है, तो उसे एडॉप्टेशन कहा जाता है. यह  कंपोजिशन किताब, नोवल, कहानी, प्ले, कॉमिक या किसी दूसरी लिटरेरी वर्क हो सकता है. यहां फिल्म बनाने वाला राइटर मूल रचना को ज्यों का त्यों पर्दे पर नहीं उतारता. फिल्म की जरूरत के हिसाब से स्टोरी में बदलाव किए जा सकते हैं. किताब में किसी किरदार के बारे में कई पन्नों में जानकारी दी जा सकती है, लेकिन फिल्म में वही बात कुछ सीन या डायलॉग के जरिए बतानी पड़ती है. यानी एडॉप्टेशन में बेसिक स्ट्रक्चर आधार होती है, लेकिन फिल्म उसका सिनेमैटिक एडॉप्टेशन होती है.

एडॉप्टेशन में क्या-क्या बदला जा सकता है?

किसी किताब पर फिल्म बनाते समय स्टोरी की लंबाई कम की जा सकती है. कुछ किरदार हटाए जा सकते हैं, कुछ नए सीन जोड़े जा सकते हैं और घटनाओं का सीक्वेंस भी बदला जा सकता है. मसलन, किसी नोवल में कहानी कई सालों तक चलती है, लेकिन फिल्म की ड्यूरेशन लिमिटेड होती है. इसलिए डायरेक्टर और राइटर कहानी के सबसे जरूरी हिस्सों को चुनते हैं. यही वजह है कि किताब पढ़ने वाले रीडर कई बार फिल्म देखकर कहते हैं कि इसमें किताब वाली पूरी कहानी नहीं दिखाई गई. इसका मतलब यह नहीं कि फिल्म एडॉप्टेशन नहीं है. बल्कि एडॉप्टेशन का मतलब ही मूल रचना को दूसरे तरीके के हिसाब से ढालना होता है.

रीमेक फिल्म किसे कहा जाता है?

अब रीमेक को समझिए. रीमेक का मतलब है किसी पहले से बनी फिल्म के आधार पर उसी कहानी पर दोबारा फिल्म से है. इसमें पुरानी फिल्म की कहानी, मैन इंसिडेंट, किरदारों का रोल और कई बार इपोर्टेंस सीन भी नए रूप में दिखाई दे सकते हैं. हालांकि नई फिल्म में कलाकार, भाषा, लोकेशन, म्यूजिक और प्रेजेंटेशन बदल सकती है. रीमेक खासतौर पर इंडियन फिल्म इंडस्ट्री में काफी देखने को मिलती है. एक इंडस्ट्री में फिल्म की कामयाबी के बाद दूसरी इंडस्ट्री में भी उसी पर रीमके अक्सर बनती हैं. हालांकि, उसे नए कलाकार हो सकते हैं. उदाहरण के लिए किसी साउथ इंडस्ट्री की  फिल्म की स्टोरी हिंदी ऑडियंस के लिए दोबारा बनाई जा सकती है. इसी तरह किसी हिंदी फिल्म का दूसरी भाषा में रीमेक बन सकता है.

रीमेक और एडॉप्टेशन में सबसे बड़ा अंतर

दोनों को लेकर सबसे ज्यादा कन्फ्यूजन यहीं होता है. एडॉप्टेशन में सोर्स किसी किताब, कहानी, प्ले या दूसरी  कंपोजिशन जैसी चीज हो सकती है. वहीं रीमेक में सोर्स पहले से बनी फिल्म होती है. यानी अगर किसी नोवल को लेकर फिल्म बनाई गई, तो वह एडॉप्टेशन है. अगर किसी पुरानी फिल्म को नए कलाकारों के साथ दोबारा बनाया गया, तो वह रीमेक कही जाती है. इस अंतर को याद रखने का सबसे आसान तरीका है कि अगर कोई फिल्म किताब या दूसरी रचना से फिल्म बनी है तो उसे एडॉप्टेशन कहा जाता है. वहीं, पुरानी फिल्म से नई फिल्म बनती है तो उसे रीमेक कहते हैं.

इंस्पायर्ड फिल्म किसे कहते हैं?

अब तीसरी और सबसे अलग कैटेगरी आती है 'इंस्पायर्ड'. जब किसी फिल्म की स्टोरी किसी दूसरी फिल्म, घटना, किताब, किरदार या आइडिया से इंस्पायर बताई जाती है, लेकिन नई फिल्म उसे उसी कहानी के रूप में दोबारा पेश नहीं करती, तो उसे इंस्पायर्ड कहा जा सकता है. यहां मूल विचार से इंस्पिरेसन ली जा सकती है, लेकिन कहानी, किरदार, घटनाएं और उनमें दिखाए सीन अलग हो सकते हैं. उदाहरण के लिए किसी फिल्म में बदला लेने का आइडिया किसी दूसरी कहानी जैसा हो सकता है, लेकिन किरदार, जगह, इंसिडेंट और पूरी स्क्रिप्ट अलग हो सकती है. ऐसी सिचुएशन में उसे सीधे रीमेक कहना सही नहीं होगा.

क्या रीमेक बनाना मेकर्स के लिए आसान होता है?

रीमेक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि मूल कहानी पहले से ऑडियंस के बीच सक्सेस साबित हो चुकी होती है. प्रोड्यूसर को एक ऐसी कहानी मिल जाती है जिसका सिनेमाई स्ट्रक्चर पहले से मौजूद है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि रीमेक की सक्सेस तय होती है. लोग अगर पुरानी फिल्म देख चुके हैं, तो उन्हें नई फिल्म में कुछ नया चाहिए होता है. कलाकारों की कास्टिंग, स्क्रीनप्ले, म्यूजिक और डायरेक्शन कमजोर हुआ तो रीमेक फेल हो सकता है.

एडॉप्टेशन फिल्म बनाने के सबसे बड़े चैलेंज?

एडॉप्टेशन में सबसे बड़ा चैलेंज होता है मूल रचना की सोल को बनाए रखते हुए उसे फिल्म के रूप में पेश करना. किताब के रीडर के पास फिक्शन की पूरी आजादी होती है. फिल्म में डायरेक्टर को हर चीज स्क्रीन पर दिखानी पड़ती है. इसलिए कई बार ओरिजनल क्रिएशन के कुछ हिस्से हटाने पड़ते हैं. यही वजह है कि एक अच्छी किताब का अच्छा फिल्म एडॉप्टेशन बनना अपने आप तय नहीं होता.

इंस्पायर्ड और कॉपी में फर्क

आपको बता दें कि इंस्पायर्ड शब्द का यूज तब किया जाता है, जब ओरिजिनल आइडिया से इंस्पिरेशन लेकर नया काम तैयार किया जाता है. लेकिन अगर किसी दूसरी फिल्म की स्टोरी, किरदार, घटनाएं और सीन लगभग उसी तरह उठा लिए जाएं, तो केवल उसे 'इंस्पायर्ड' कहना सही नहीं होगा. यहीं पर कॉपीराइट को लेकर सवाल भी सामने आता है. फिल्मों को कॉपी करने को लेकर कई बार आरोप भी लगते रहे हैं और बहस भी शुरू हो जाती है कि यह कॉपी नहीं है बल्कि इंस्पिरेशन है. ऐसे में अगर किसी ओरिजनल क्रिएटर के पास इसको लेकर पूरे सबूत हैं कि उसकी रचना की कॉपी की गई है तो वह कॉपीराइट का केस कर सकता है. इसलिए इंस्पायर्ड और कॉपी के अंतर को समझना बहुत जरूरी हो जाता है.

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