Explainer: चुनाव आयुक्त की नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट से टकराएगी मोदी सरकार! 2029 चुनाव से क्या है कनेक्शन?| Navbharat Live

Updated On: Jul 31, 2026 | 07:28 PM IST

विज्ञापन

सार

ECI Appointment: चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने केस को 5 जजों की संविधान पीठ को भेजने की मांग की। कोर्ट ने सभी पक्षों से लिखित हलफनामा मांगा है।

cec appointment supreme court

सांकेतिक तस्वीर (डिजाइन फोटो)

विस्तार

Supreme Court on Election Commissioner Appointment: चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में क्स चल रहा है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट और सरकार के बीच जोरदार बहस देखने को मिली है। गुरुवार को जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से पेश हुए अटॉर्नी जरनल आर वेंकटरमणी और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता। दोनों ने इस मामलो को सुनवाई के दौरान बड़ी बेंच में भेजने की दलील दी।

तुषार मेहता ने दलील दी कि यह एक संवैधानिक मामला है, जिस पर बड़ी बेंच में सुनवाई होनी चाहिए। इस दौरान तुषार मेहता ने अनुच्छेद 145 (3) का हवाला भी दिया। वहीं याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ वकील विजय हंसरिया ने सरकार की मंशा को लेकर सवाल उठाया।

28वें दिन की सुनवाई में केस ट्रांसफर की मांग

हंसरिया ने कोर्ट में कहा कि सरकार ने 28वें दिन की सुनवाई में केस ट्रांसफर करने की मांग की है। उन्होंने सरकार की मंशा को गलत ठहराया। बता दें कि डॉक्टर जया गुप्ता और एडीआर ने 2023 में सुप्रीम कोर्ट में इसको लेकर याचिका दाखिल की थी। इस याचिका में कहा गया था कि सरकार ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर जो कानून बनाए हैं, उसमें CJI को नहीं रखा गया है। एडीआर की तरफ से सुनवाई के दौरान वकील प्रशांत भूषण पेश हुए।

सम्बंधित ख़बरें

बड़ी बेंच में सुनवाई क्यों चाहती है सरकार?

1. सुप्रीम कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि अनुच्छेद 324 (2) के तहत संसद को चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए कानून बनाने का अधिकार है। उन्होंने दलील दी कि इसी तरह अनुच्छेद 327 और 324 एक दूसरे के पूरक हैं। ये एक संवैधानिक मामला है, जिसे केवल 5 जजों की बेंच ही सुन सकती है।

2. तुषार मेहता ने अदालत में कहा कि प्रधानमंत्री अगर किसी को चुनेंगे और वो गलत करेगा, ये सवाल ही नहीं उठना चाहिए। तुषार मेहता ने कहा कि उनकी पवित्रता पर शक नहीं किया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री कार्यपालिका के प्रमुख हैं और वे विधायिका के प्रति भी जिम्मेदार हैं।

3. तुषार मेहता ने आगे कहा कि जज ही जज को चुनते हैं और इस पर पूरा देश विश्वास करता है। उन्होंने कहा कि ये नहीं कहा जा सकता है कि जज ने जो जज को चुना वह गलत है। मेहता की इस दलील पर जस्टिस दीपांकर दत्ता ने भी टिप्पणी की। उन्होंने पूछा कि आप यह बता सकते हैं कि देश में कितने दागी मंत्री हैं?

4. सुनवाई के दौरान सरकार ने 2023 के अनूप वर्णवाल केस का भी हवाला दिया। सरकार ने दलील दी कि इस मामले की सुनवाई 5 जजों की बेंच में हुई थी, जिसने फैसला सुनाया था कि संसद को कानून बनाने का अधिकार है। तुषार मेहता ने दलील दी कि अगर इस मामले का किसी तरह से उल्लंघन हुआ है, तो 5 जजों की बेंच के सामने ही इसको रखा जाना चाहिए।
5. वहीं, 2029 के लोकसभा चुनाव से भी इसका कनेक्शन है। वकील विजय हंसरिया ने कहा कि 28 सुनवाई के बाद सरकार ने इस मामले को ट्रांसफर के लिए कहा है। हंसरिया ने सवाल उठाया कि अभी पुरानी व्यवस्था चल रही है, जिसमें चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रधानमंत्री, उनके द्वारा चुना हुआ एक कैबिनेट मंत्री और नेता प्रतिपक्ष कर रहे हैं।

6. बता दें कि 2029 का लोकसभा चुनाव मार्च में प्रस्तावित है। उससे पहले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार(जनवरी 2029) रिटायर हो रहे हैं। साथ ही चुनाव आयुक्त सुखबीर संधू (जुलाई 2028) भी रिटायर होने वाले हैं। अगर इस केस को बड़ी बेंच को भेजा जाता है तो मामले की सुनवाई में वक्त लग सकता है। ऐसे में सरकार अभी की प्रक्रिया से ही 2029 चुनाव से पहले चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति कर सकती है।

यह भी पढ़ें- महाराष्ट्र में दिसंबर में होंगे जिला परिषद चुनाव! जानें सुप्रीम कोर्ट में फडणवीस सरकार ने क्या दिया जवाब

सुनवाई के आखिरी में जस्टिस दत्ता ने एक कहावत का जिक्र करते हुए कहा कि न्याय सिर्फ होना ही नहीं चाहिए, बल्कि होता हुआ दिखना भी चाहिए। उन्होंने कहा कि उसी तरह पारदर्शी नियुक्ति केवल होनी ही नहीं चाहिए, बल्कि होती हुई दिखनी भी चाहिए। जस्टिस दत्ता ने सभी पक्षों से लिखित हलफनामा मांगा है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट इस मामले में फैसला सुनाएगा।

Follow Navbharatlive whatsapp