Explainer: फॉलोऑन का धर्मसंकट, जीत का शॉर्टकट या गेंदबाजों के लिए आफत? जानें इसकी इंसाइड स्टोरी
IND vs SL: भारत और श्रीलंका के बीच दूसरा और आखिरी टेस्ट मैच कोलंबो के सिंहली स्पोर्ट्स क्लब में खेला जा रहा है. पहले बल्लेबाजी करते हुए टीम इंडिया ने पहली पारी में 9 विकेट पर 503 रन बनाकर पारी घोषित कर दी. इसके जवाब में श्रीलंका ने अपनी पहली पारी में तीसरे दिन का खेल खत्म होने तक 8 विकेट पर 265 रन बनाए हैं. श्रीलंका की टीम अभी भी 238 रनों से पीछे है. इतना ही नहीं, श्रीलंका पर फॉलो-ऑन खेलने का भी खतरा मंडरा रहा है. श्रीलंका को अभी फॉलो-ऑन से बचने के लिए 38 रन बनाने होंगे. तो चलिए इस आर्टिकल में समझते हैं कि फॉलो-ऑन क्या होता है और यह कैसे काम करता है.
क्या होता है टेस्ट क्रिकेट में फोलोऑन?
इंटरनेशनल टेस्ट क्रिकेट में एक सामान्य मैच के दौरान दोनों टीमें बारी-बारी से 2-2 बार बल्लेबाजी करती हैं. भारत बनाम श्रीलंका कोलंबो टेस्ट से फोलोऑन को समझते हैं. इस मैच में भारत ने अपनी पहली पारी में 503 रन बनाकर पारी घोषित की. इसके जवाब में श्रीलंका तीसरे दिन का खेल खत्म होने तक अपनी पहली पारी में 265 रन बना चुकी है. श्रीलंका की टीम अभी भी 238 रनों से पीछे है. जबकि फोलोऑन बचाने के लिए श्रीलंका को 38 रन और बनाने होंगे.
फोलोऑन से बचने के लिए श्रीलंका को अभी बनाने हैं 38 रन
टेस्ट क्रिकेट के नियम के मुताबिक, 5 दिनों के मैच में फॉलो-ऑन से बचने के लिए दूसरी बल्लेबाजी करने वाली टीम को विरोधी टीम के स्कोर से कम से कम 200 रन पीछे तक पहुंचना अनिवार्य होता है. इस हिसाब से श्रीलंका को फॉलो-ऑन टालने के लिए न्यूनतम 303 रन (503 - 200 = 303) बनाने होंगे. चूंकि श्रीलंका अभी 265 रनों पर है, इसलिए उसे फॉलो-ऑन से बचने के लिए अभी भी 38 रन और बनाने होंगे. अगर श्रीलंका की टीम ये 38 रन बनाने से पहले ही ऑल-आउट हो जाती है, तो भारतीय कप्तान शुभमन गिल के पास श्रीलंका को तुरंत अपनी दूसरी पारी शुरू करने के लिए मजबूर करने का अधिकार होगा. ऐसी स्थिति में मैच का सामान्य क्रम बदल जाएगा और श्रीलंका को बिना किसी ब्रेक के लगातार अपनी दूसरी पारी भी खेलनी पड़ेगी.
अगर श्रीलंका अपनी दूसरी पारी में भारत की पहली पारी के बचे हुए 238 रनों (503 - 265 = 238) की बढ़त को पार करने में नाकाम रहता है, तो भारत यह मैच एक पारी और रनों के अंतर से जीत जाएगा. वहीं श्रीलंका की टीम 238 रन बनाने में कामयाब होती है और बढ़त हासिल करती है तो फिर टीम इंडिया को मैच जीतने के लिए दूसरी पारी खेलनी होगी.
टीम इंडिया चौथे दिन श्रीलंका को जल्दी करना चाहेगी आउट
ऐसे में भारतीय टीम चौथे दिन की शुरुआत में श्रीलंका को ऑल-आट कर फॉलो-ऑन देना चाहेगी और फिर उनकी दूसरी पारी को भी 200 रनों पर समेट कर एक पारी और रनों से जीत दर्ज करनी चाहेगी. बता दें कि वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के लिहाज से यह सीरीज टीम इंडिया के लिए बेहद ही अहम है. WTC के फाइनल की रेस में बने रहना है तो भारत को दूसरा टेस्ट भी जीतकर अंक हासिल करने होंगे. बता दें कि टीम इंडिया गॉल में खेले गए पहले टेस्ट मैच को जीतकर सीरीज में 1-0 से आगे है.
— BCCI (@BCCI) August 25, 2026
क्या होता है फॉलोऑन देने के मुख्य फायदा?
जब कोई कप्तान विरोधी टीम को फॉलो-ऑन खेलने के लिए मजबूर करता है, तो इसका सबसे बड़ा फायदा समय की बचत और पारी से जीत हासिल करने की ज्यादा संभावना होती है. चूंकि विरोधी टीम पहली पारी में बेहद सस्ते में ऑल-आउट हो चुकी होती है, इसलिए वे भारी मानसिक दबाव में आ जाते हैं. ऐसे में लगातार दूसरी पारी में बल्लेबाजी करने से उनके बल्लेबाजों का आत्मविश्वास डगमगा जाता है, जिससे वे अक्सर दूसरी पारी में भी जल्दी बिखर जाते हैं. इसके अलावा, खेल के तीसरे या चौथे दिन ही मैच खत्म होने की उम्मीद बढ़ जाती है, जिससे खराब मौसम या बारिश के कारण मैच आखिरी दिन तक जाने और ड्रॉ होने का खतरा पूरी तरह समाप्त हो जाता है.
फॉलोऑन देने का क्या होता है नुकसान?
दूसरी ओर फॉलोऑन देने का सबसे बड़ा नुकसान गेंदबाजों की अत्यधिक थकान और उनके चोटिल होने का रिस्क होता है. जब एक टीम विपक्षी टीम को फॉलो-ऑन देती है, तो उनके गेंदबाजों को बिना आराम के लगातार गेंदबाजी करनी पड़ती है. टेस्ट क्रिकेट में 20 विकेट लेने के लिए गेंदबाजों को 100 से 150 ओवर से भी ज्यादा की गेंदबाजी करनी पड़ सकती है. बिना किसी रिकवरी टाइम के तुरंत दोबारा गेंदबाजी करने से तेज गेंदबाजों की रफ्तार कम हो जाती है और उनकी लाइन-लेंथ बिगड़ सकती है. इसके अलावा उनकी मांसपेशियों में खिंचाव जैसी गंभीर चोटों का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ जाता है.
कप्तान कब फॉलो-ऑन देने से कर देता है मना?
बहुत बड़ी बढ़त मिलने के बाद भी फॉलो-ऑन देना जरूरी नहीं होता. कप्तान अक्सर खुद दोबारा बल्लेबाजी चुनते हैं, क्योंकि वे अपने थके हुए तेज गेंदबाजों को आराम देना चाहते हैं. कप्तान चौथी पारी में पिच के और ज्यादा टूटने का इंतजार करना चाहते हैं ताकि उनके स्पिनर पांचवें दिन फायदा उठा सकें. वे खुद बड़े रन बनाकर मैच से हारने के रिस्क को पूरी तरह खत्म करना चाहते हैं.
जब फॉलोऑन का दांव पड़ा उल्टा
टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में सिर्फ 4 बार ऐसा हुआ है जब फॉलोऑन खेलने वाली टीम ने मैच जीता हो. इनमें सबसे फेमस कोलकाता का ईडन गार्डन्स टेस्ट (2001) है, जहां ऑस्ट्रेलिया ने भारत को फॉलोऑन दिया था. इसके बाद वी.वी.एस. लक्ष्मण (281) और राहुल द्रविड़ (180) की ऐतिहासिक साझेदारी की बदौलत भारत ने न सिर्फ मैच में वापसी की, बल्कि ऑस्ट्रेलिया को हराकर इतिहास रच दिया था. हाल ही में 2023 में न्यूजीलैंड ने भी इंग्लैंड के खिलाफ फॉलोऑन खेलने के बाद 1 रन से ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी.
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