Explainer: फिल्मों में कैमरा सामने होकर भी क्यों नहीं आता नजर, मिरर शॉट में छिपी होती हैं ये खास ट्रिक
Filmy Mirror Shot Tricks: आपने गौर किया होगा कि कई बार फिल्म देखते समय एक सीन ऐसा आता है जिसमें एक्टर मिरर के सामने खड़ा होता है. वह अपने बाल ठीक कर रहा होता है, चेहरा देख रहा होता है, मेकअप कर रहा होता है या फिर आईने में खुद को देखकर इमोशनल दिखाई देता है. कैमरा भी ऐसा लगता है जैसे बिल्कुल सामने मौजूद है, लेकिन हैरानी की बात यह लगती है कि आईने में कैमरा या कैमरामैन कहीं नजर नहीं आता. आखिर ऐसे कैसे किया जाता है. क्योंकि रियल में मिरर के सामने रखी हर चीज नजर आती है. लेकिन फिल्मों में कैमरा क्यों नहीं दिखाई देता है.
दरअल, यहां फिल्ममेकर्स किसी एक ट्रिक पर डिपेंड नहीं रहते. सीन की जरूरत, कैमरे की मूवमेंट, सेट की बनावट और अपने बजट के हिसाब से अलग-अलग तरीके की ट्रिक अपनाते हैं. कई बार कैमरा सिर्फ एंगल बदलने से ही गायब हो जाता है, कई बार पूरा सेट दो हिस्सों में बनाया जाता है और एक्टर के डुप्लीकेट को सामने खड़ा कर दिया जाता है. आज के दौर में जरूरत पड़ने पर वीएफएक्स की मदद भी ली जाती है. यही वजह है कि जो सीन दर्शक को बिल्कुल नॉर्मल आईने वाला शॉट लगता है, उसके पीछे काफी सोच और तैयारी होती है.
सबसे आसान तरीका क्या होता है?
मिरर शॉट का सबसे बेसिक तरीका उतना सीक्रेट नहीं है जितना स्क्रीन पर दिखाई देता है. कैमरे को आईने के बिल्कुल सामने रखने के हल्का सा साइड में रखा जाता है. फिर कैमरे का एंगल इस तरह सेट किया जाता है कि वह एक्टर और उसका रिफ्लेक्शन तो रिकॉर्ड कर ले, लेकिन कैमरा खुद मिरर में नहीं नजर आता है. कई बार लेंस की लंबी फोकल लेंथ और फ्रेमिंग से भी इस सेटअप को तैयार किया जाता है.
यही वजह है कि फिल्मों में एक्टर आईने के बिल्कुल सामने दिखाई देता है लेकिन कैमरा असल में उसके ठीक पीछे नहीं होता. वह थोड़ा लेफ्ट या राइट, कभी-कभी काफी दूरी पर भी हो सकता है. कैमरा इतनी सूझबूझ से रखा जाता है कि दर्शक को फ्रेम देखकर ऐसा महसूस हो कि वह एक्टर के ठीक सामने मौजूद है.इसमें एक और दिलचस्प बात यह भी है. कई बार एक्टर असल में अपने रिफ्लेक्शन की तरफ नहीं बल्कि कैमरे की तरफ देख रहा होता है. फ्रेमिंग ऐसी रखी जाती है कि दर्शक को लगता है कि वह आईने में खुद को देख रहा है.
आईना थोड़ा टेढ़ा हो तो पूरा गेम बदल जाता है?
बता दें कि आईने की पोजिशन मिरर शॉट में बहुत बड़ा रोल निभाती है. अगर आईना बिल्कुल सीधा कैमरे के सामने है और कैमरा भी उसी लाइन में रखा गया है, तो कैमरे की रिफ्लेक्शन दिखाई दे सकती है. वहीं, अगर आईने को थोड़ा एंगल देकर कैमरे की पोजिशन बदल दी जाए तो रिफ्लेक्शन बदल सकती है. सिनेमैटोग्राफर इसी ट्रिक का यूज करते हैं. कैमरा ऐसी जगह रखा जाता है जहां से एक्टर का रिफ्लेक्शन दिखाई दे, लेकिन कैमरे की रिफ्लेक्शन का ना दिखाई पड़े. दर्शक को आईना सीधा दिखाई देता है, जबकि असल सेटअप में उसके एंगल और कैमरे की पोजिशन के बीच काफी सोच-समझकर दूरी बनाई गई होती है. इसी वजह से कुछ फिल्मों में आईने का एंगल थोड़ा अजीब दिखाई देता है, लेकिन कहानी देखते समय ऑडियंस उस पर ज्यादा ध्यान नहीं देता. कैमरे का काम ही यही है कि तकनीकी चीजें छिपी रहें और स्क्रीन पर सब कुछ नेचुरल लगे.
कई बार आईना भी नहीं होता
यह मिरर शॉट की सबसे दिलचस्प ट्रिक्स में से एक है. पर्दे पर फिल्म को देख रही ऑडियंस को लगता है कि एक्टर आईने में खुद को देख रहा है, लेकिन असल में वहां आईना होती ही नहीं है. कैमरे और एक्टर के बीच खाली जगह होती है और दूसरी तरफ दूसरा कलाकार या डुप्लीकेट खड़ा होता है.
इस टेक्नॉलॉजी का यूज खासतौर पर तब किया जा सकता है जब डायरेक्टर को कैमरे को ऐसी जगह से गुजारना हो जहां असली आईना कैमरा दिखाई देगा. सेट को दो हिस्सों में तैयार किया जाता है और दोनों हिस्सों को बिल्कुल मैच कराया जाता है. जिसके बाद कैमरा एक हिस्से को शूट करता है और फिर एडिटिंग के जरिए कैमरा को आईने के पार दिखाया जाता है. कुछ फिल्मों में इस तरह के शॉट के लिए एक्टर के डुप्लीकेट का यूज किया जाता है.
वन-वे मिरर भी आता है काम
इनता ही नहीं कुछ खास शॉट्स में वन-वे मिरर या टू-वे मिरर जैसी टेक्नॉलॉजी का भी यूज किया जाता है. इसका बेसिक आइडिया यह होता है कि हर तरफ आईने की तरह दिखाई दे और दूसरी तरफ से कैमरे को शूट करने की जगह मिल जाए. इसका यूज यह है कि कैमरा ऐसी जगह छिप सकता है जहां ऑडियंस उसे देख ही नहीं सकता. ब्लैक स्वान जैसे कुछ फेमस मिरर शॉट्स में वन-वे मिरर जैसी टेक्नॉलॉजी के यूज की चर्चा हुई है. यानी यहां सिर्फ आईना लगाकर कैमरा छिपाना काफी नहीं होता. लाइट कहां से आ रही है, एक्टर किस डायरेक्शन में देख रहा है और बैकग्राउंड कितना चमकीला है, इन सभी चीजों को कंट्रोल करना पड़ता है.
वीएफएक्स का भी किया जाता है यूज
आज के दौर में सबसे बढ़िया ऑप्शन वीएफएक्स है. अगर किसी शॉट में कैमरा आईने में दिखाई दे रहा है और उसे सेट पर गायब करना पॉसिबल नहीं होता है तो फिल्ममेकर्स कैमरे को वीएफएक्स को हटा देते हैं. इसके लिए पहले पूरा सीन शूट किया जाता है. फिर जरूरत के हिसाब से बैकग्राउंड या खाली फ्रेम भी रिकॉर्ड किया जा सकता है. पोस्ट-प्रोडक्शन में वीएफएक्स आर्टिस्ट रिफ्लेक्शन वाले हिस्से को ध्यान से देखकर कैमरा और जरूरत पड़ने पर कैमरा ऑपरेटर को डिजिटल तरीके से हटा देते हैं.
हालांकि, स्थिर शॉट में यह काम थोड़ा आसान हो सकता है, लेकिन कैमरा घूम रहा हो, एक्टर उसके सामने से गुजर रहा हो या आईने में लगातार बदलता रिफ्लेक्शन दिखाई दे रहा हो तो काम काफी कठिन हो जाता है. ऐसे शॉट में फ्रेम-दर-फ्रेम काम और ट्रैकिंग की जरूरत पड़ सकती है. आपको बता दें कि फिल्ममेकिंग में मूवी से आईने के सामने से कैमरे को छिपाने के लिए कई और भी ट्रिक का यूज किया जाता है.
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