Explainer: दुनिया पर क्यों मंडरा रहा तेल की कमी का खतरा? सऊदी अरब में पाइपलाइन फटने से 4% नुकसान का खतरा
Saudi Arabia Oil Pipeline: दुनिया में तेल की कमी का खतरा मंडरा रहा है. ये चर्चा तब शुरू हुई जब सऊदी में पाइपलाइन पर ड्रोन हमला हुआ और आपूर्ति बंद हो गई. सऊदी अरब में 1,200 किलोमीटर लंबी मुख्य ईस्ट-वेस्ट (East-West) तेल पाइपलाइन पर भीषण ड्रोन हमला हुआ है. इसके बाद सुरक्षा कारणों से इसे अस्थायी रूप से पूरी तरह बंद कर दिया गया है. यह हमला रियाद और मदीना क्षेत्रों में हुआ है, जिससे कई लोग घायल हुए हैं और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है. अब ऐसे में दुनिया में तेल की कमी का खतरा मंडराने की चर्चा शुरू हो गई है.
सऊदी विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह हमला इराक की ओर से आए कई ड्रोनों द्वारा किया गया है. हालांकि, यमन के हूती विद्रोही भी लगातार क्षेत्र में तेल और सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहे हैं. ये पाइपलाइन सऊदी अरब की सबसे महत्वपूर्ण पाइपलाइन है जो रोजाना 50 से 70 लाख बैरल कच्चा तेल ले जा सकती है. यह सऊदी को फारस की खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के विवादित समुद्री रास्ते से बचाकर लाल सागर के यानबू बंदरगाह तक सीधे तेल पहुंचाने का मुख्य वैकल्पिक जरिया देती है.
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4 प्रतिशत नुकसान तक खतरा
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब की एक अहम तेल पाइपलाइन ड्रोन हमले के बाद बंद होने से वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है. तेल कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि अगर सऊदी अरब ने कुछ दिनों में पाइपलाइन दोबारा शुरू नहीं की, तो लाल सागर के रास्ते निर्यात के लिए उसके पास तेल का भंडार कम पड़ सकता है. इससे दुनिया में तेल की सप्लाई करीब 4% तक घटने का खतरा है.
ड्रोन हमलों के बाद बंद हुई पाइपलाइन
ड्रोन हमलों के बाद सऊदी अरब ने शुक्रवार को अपनी ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन बंद कर दी थी. यह पाइपलाइन देश के तेल को रेगिस्तान के रास्ते लाल सागर के तट तक पहुंचाती है. हालांकि, सऊदी सरकार ने अभी यह साफ नहीं किया है कि पाइपलाइन को कितना नुकसान हुआ है और इसे पूरी तरह ठीक होने में कितना समय लगेगा.
कब तक हो सकती है शुरू
तेल उद्योग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, पाइपलाइन की मरम्मत में 5 से 6 सप्ताह तक का समय लग सकता है. वहीं, कुछ अन्य सूत्रों का कहना है कि इसे जल्द ठीक किया जा सकता है और मरम्मत के दौरान पाइपलाइन से सीमित मात्रा में तेल भेजना भी शुरू किया जा सकता है.
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यानबू में सिर्फ 5-7 दिन का तेल भंडार
सऊदी अरब दुनिया का सबसे बड़ा तेल निर्यातक देश है. इस पाइपलाइन के जरिए वह रोजाना करीब 40 लाख बैरल तेल लाल सागर के किनारे स्थित यानबू बंदरगाह तक पहुंचाता था. यह मात्रा दुनिया की कुल तेल सप्लाई का करीब 4% है. तीन उद्योग सूत्रों के मुताबिक, पाइपलाइन बंद होने के बाद यानबू बंदरगाह के पास सिर्फ 5 से 7 दिनों तक निर्यात जारी रखने के लिए तेल का भंडार बचा है.
हालांकि, सऊदी अरब के पास मिस्र के लाल सागर स्थित ऐन सुखना और भूमध्य सागर स्थित सिदी केरीर बंदरगाहों पर भी कुछ तेल भंडार मौजूद है. इससे कुछ दिनों तक ग्राहकों को तेल की सप्लाई जारी रखी जा सकती है.
Saudi Arabia's East West pipeline, which carries about 4 million barrels a day to the Red Sea port of Yanbu, was shut down Friday.
The number that should worry people isn't the 4%, it's the 5 to 7 days. A damaged pipeline is a supply problem with a known fix; a stockpile that… pic.twitter.com/EwDst3k5wo
— Donald J Trump Posts TruthSocial (@TruthTrumpPost) September 13, 2026
उद्योग के अनुमान के अनुसार, यानबू की तेल भंडारण क्षमता करीब 3.5 करोड़ बैरल है. वहीं, ऐन सुखना और सिदी केरीर की क्षमता क्रमशः करीब 1.8 करोड़ और 2 करोड़ बैरल है. हालांकि, ये भंडार पूरी तरह भरे हुए नहीं हैं. अगर ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन लंबे समय तक बंद रहती है तो ये भंडार भी धीरे-धीरे खत्म हो सकते हैं.
वैश्विक तेल सप्लाई पर पहले से दबाव
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण पहले से ही तेल की सप्लाई पर दबाव है. अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर के रास्ते तेल की आवाजाही घटने से अगस्त में सऊदी अरब की तेल सप्लाई 30 साल से ज्यादा समय के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई.
आईईए का अनुमान है कि इस साल दुनिया की तेल सप्लाई में करीब 57 लाख बैरल प्रतिदिन यानी लगभग 6% की कमी आ सकती है. युद्ध शुरू होने से पहले मध्य पूर्व से रोजाना करीब 2.2 करोड़ बैरल तेल की सप्लाई होती थी. उद्योग सूत्रों के अनुसार, अब होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल का प्रवाह घटकर करीब 60 लाख से 90 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया है.
सऊदी अरब का तेल उत्पादन भी घटा
सऊदी अरब ने पिछले सप्ताह ओपेक को बताया कि युद्ध शुरू होने से पहले फरवरी में उसका तेल उत्पादन करीब 1.09 करोड़ बैरल प्रतिदिन था. अगस्त में यह घटकर करीब 62 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया. ऐसे में पाइपलाइन लंबे समय तक बंद रहने से सऊदी अरब के सामने तेल निर्यात बनाए रखने की चुनौती और बढ़ सकती है. इसका असर वैश्विक तेल बाजार और ईंधन की कीमतों पर भी पड़ने की आशंका है.
वैश्विक तेल संकट का खतरा
इस पाइपलाइन के बंद होने से दुनिया की 4% से 5% तेल सप्लाई रुकने का खतरा पैदा हो गया है. यानबू बंदरगाह पर केवल 5 से 7 दिनों का तेल स्टॉक बचा है. यदि इसे जल्द ठीक नहीं किया गया, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें आसमान छू सकती हैं. वर्तमान में कच्चे तेल की कीमत 108 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी है।.
भारत पर क्या असर होगा?
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कमी और बढ़ती कीमतों के कारण भारत में भी पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने की पूरी आशंका है.
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