Explainer: अर्जेंटीना-इंग्लैंड फीफा वर्ल्ड कप सेमीफाइनल को क्यों कहा 'फॉकलैंड वॉर'? जानें वो 5 विवाद जो हमेशा रहेंगे याद

FIFA World Cup 2026: फीफा वर्ल्ड कप 2026 में इंग्लैंड और अर्जेंटीना के बीच खेला गया दूसरा सेमीफाइनल मैच तनावपूर्ण और बेहद रोमांचक होने के कारण फुटबॉल इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया. इंग्लैंड के खिलाफ इस सेमीफाइनल मैच में अर्जेंटीना 85 मिनट तक 1-0 से पिछड़ने के बाद लगातार 2 गोल कर जीत हासिल की और फाइनल में अपनी जगह बनाई. हालांकि यह मैच काफी विवादित रहा. अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी इस मैच में काफी आक्रामक नजर आए और उनकी इंग्लैंड के बेलिंघम से तीखी बहस भी हुई. इंग्लैंड के खिलाड़ी मेसी को गोल करने से रोकने की रणनीति को अपनाया. इंग्लिश खिलाड़ी मेसी को लेकर काफी आक्रामक दिखे हर तरह से घेरे रखा, लेकिन दिग्गज मेसी ने खेल के आखिरी कुछ मिनटों में 2 असिस्ट कर अपनी टीम अर्जेंटीना को फीफा वर्ल्ड कप 2026 के फाइनल में पहुंचाया. इंग्लैंड और अर्जेंटीना के बीच खेले गए सेमीफाइनल मैच ने एक बार फिर से दोनों टीमों के पुराने इतिहास की याद दिलाई. मैच खत्म होने के बाद भी मैदान पर गहमागहमी बना रहा. फैंस सोशल मीडिया पर इस मैच की तुलना 'फॉकलैंड वॉर' से करने लगे, तो चलिए जानते हैं कि इंग्लैंड और अर्जेंटीना के इस सेमीफाइनल मैच में ऐसा कौन-कौन सा विवाद हुआ जो लंबे वक्त तक याद रखा जाएगा.

अर्जेंटीना के एंजो फर्नांडीज की कोहनी मारने से शुरुआती मिनटों में खड़ा हुआ विवाद

अर्जेंटीना और इंग्लैंड के इस सेमीफाइनल मैच की शुरुआत ही बेहद आक्रामक और हिंसक अंदाज में हुई, जिसके बाद से ही इस बात की संभावना बढ़ गई थी कि यह मैच काफी विवादित और तनावपूर्ण होने वाला है. अभी सिर्फ 3 मिनट का ही खेल हुआ था, तभी गेंद छीनने के प्रयास में अर्जेंटीना के मिडफील्डर एंजो फर्नांडीज की कोहनी इंग्लैंड के एलियट एंडरसन के चेहरे पर लगी. एंडरसन दर्द से कराहते हुए मैदान पर गिर पड़े, जिसके बाद इंग्लैंड के खिलाड़ी भड़क गए और फिर मैच में गहमागहमी शुरू हो गई. इंग्लैंड के खिलाड़ियों ने एंजो फर्नांडीज को घेर लिया. देखते ही देखते दोनों टीमों के खिलाड़ी एक-दूसरे को धक्का देने लगे. मैच इतना हिंसक हो गया कि इसे काफी देर तक रोकना पड़ा. इस शुरुआती विवाद ने पूरे मैच को बेहद ही आक्रामक बना दिया. इंग्लैंड के खिलाड़ियों ने लियोनेल मेसी को शारीरिक रूप से निशाना बनाने और पूरे मैच में हर तरफ से घेरकर रखने का आक्रामक रुख अपनाया. 

लियोनेल मेसी और जूड बेलिंघम के बीच तीखी बहस

इसके बाद पहले हाफ में लियोनेल मेसी और इंग्लैंड के युवा स्टार जूड बेलिंघम के बीच भी तीखी नोकझोंक हुई, जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा और इसका वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया. दोनों खिलाड़ियों को मैदान पर एक-दूसरे के करीब आकर बहस करते हुए देखा गया. मेसी काफी आक्रामक नजर आ रहे थे और उन्हें बेलिंघम को बेहद गुस्से में सिर हिलाकर नकारते हुए देखा गया था. माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया था कि एक समय ऐसा लगा कि दोनों के बीच आपस में झड़प न हो जाए. हालांकि, मैच के बाद बेलिंघम ने इस विवाद पर लगाम लगाने की कोशिश की. उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यह कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं थी, बल्कि वे दोनों रेफरी द्वारा दिए गए एक फाउल के फैसले पर अपनी-अपनी टीम का पक्ष रख रहे थे. बेलिंघम ने कहा कि, जब उन्होंने एक फाउल की शिकायत की, तो मेसी ने पलटकर अपने ऊपर हुए फाउल की बात कही, जिस पर बेलिंघम ने मजाकिया लहजे में कहा कि 'आप इतने मजबूत हैं कि इस तरह की चुनौती झेल सकें. 

रेफरी इस्माइल एलफथ पर इंग्लैंड के प्रति पक्षपात के आरोप

इस मैच में एक बार फिर से रेफरी विवादों में घिरे. रेफरी इस्माइल एलफथ पर अर्जेंटीना का पक्ष लेने का आरोप लगा. मैच के दौरान पूरा समय खिलाड़ियों के बीच फाउल और धक्कमधुक्की का सिलसिला चलता रहा, जिसे लेकर रेफरी के कई फैसलों पर भी सवाल उठे. अर्जेंटीना के प्लेयर्स ने पहले हाफ में ही रिकॉर्ड 12 फाउल किए, लेकिन रेफरी ने उन्हें सिर्फ एक पीला कार्ड दिखाया. एंजो फर्नांडीज और गियुलियानो सिमीओन जैसे खिलाड़ियों ने कई बार इंग्लिश खिलाड़ियों पर खतरनाक टैकल किए, लेकिन उन्हें ना तो कोई चेतावनी दी गई ना कोई कार्ड मिला. इतना ही नहीं लियोनेल मेसी के द्वारा जूड बेलिंघम को कथित तौर पर 'हेडलॉक' (गले से जकड़ने) जैसी गंभीर स्थिति पर भी रेफरी ने मेसी को कार्ड नहीं दिखाया. जबकि IFAB के नियम 12 के तहत यह गंभीर फाउल प्ले या रेड कार्ड की कैटेगरी में आता है. इन्हीं सब कारणों की वजह से रेफरी पर इंग्लैंड के साथ पक्षपात करने का आरोप लगा.

फुल-टाइम सीटी के बाद बेलिंघम और वैलेंटीना बार्को की हाथापाई

मैच खत्म होने के बाद जब अर्जेंटीना के खिलाड़ी फाइनल में पहुंचने का जश्न मना रहे थे, तब मैदान पर ही दोनों टीमों के खिलाड़ी आपस में भिड़ गए. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा गया कि गुस्से से तमतमाए इंग्लैंड के बेलिंघम ने अर्जेंटीना के खिलाड़ी बार्को को मैदान पर थप्पड़ या धक्का मारा, जिसके बाद अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी और रोड्रिगो डी पॉल समेत कई खिलाड़ी बार्को के बचाव में कूद पड़े, जिसके बाद दोनों टीमों के खिलाड़ी और सहयोगी स्टाफ ने बीच-बचाव कर बेलिंघम और बार्को को एक-दूसरे से अलग किया. रिपोर्ट के आधार पर फीफा इस पोस्ट-मैच हिंसा के लिए इंग्लैंड और अर्जेंटीना के कई खिलाड़ियों पर कड़ा एक्शन ले सकता है.

फॉकलैंड्स 'लास मालविनास' राजनीतिक बैनर विवाद

मैच खत्म होने के तुरंत बाद अर्जेंटीना के डिफेंडर लिसांद्रो मार्टिनेज और जियोवानी लो सेल्सो ने जीत का जश्न मनाते हुए मैदान पर ही एक बड़ा बैनर लहराया, जिस पर स्पेनिश भाषा में "Las Malvinas Son Argentinas" (फॉकलैंड द्वीप अर्जेंटीना का है) लिखा हुआ था. यह नारा 1982 में ब्रिटेन और अर्जेंटीना के बीच हुए ऐतिहासिक फॉकलैंड वॉर से जुड़ा हुआ है. आपको बता दें कि फीफा के कोड ऑफ कंडक्ट के अनुसार, मैदान के भीतर किसी भी प्रकार के राजनीतिक, अपमानजनक या नस्लीय संदेशों, नारों और बैनरों के प्रदर्शन पर पूरी तरह से बैन है. इस घटना के बाद इंग्लिश मीडिया ने अर्जेंटीना के इस जश्न को बेहद "अहंकारी" बताया. वहीं फीफा अब इस मामले में अर्जेंटीना फुटबॉल एसोसिएशन (AFA) और इसमें शामिल खिलाड़ियों पर भारी जुर्माना या भविष्य के लिए सस्पेंशन जैसी बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करने पर विचार कर रहा है. 

🇦🇷 | Argentina players after the game with banner stating: “Las Malvinas Son Argentinas” 👀😅#FIFAWorldCuppic.twitter.com/yCMGvuXmlK

— ULTRA ATTACKIVE (@UltraAttackive) July 15, 2026

क्या है फॉकलैंड युद्ध?

आपको बता दें कि 1982 में फॉकलैंड द्वीपों पर कब्जे को लेकर ब्रिटेन और अर्जेंटीना के बीच 74 दिनों तक चला एक भीषण सैन्य युद्ध चला था.  2 अप्रैल को अर्जेंटीना द्वारा आक्रमण के बाद, ब्रिटिश प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर ने टास्क फोर्स भेजकर जवाबी कार्रवाई की. यह अघोषित युद्ध, जिसमें 649 अर्जेंटीनाई और 255 ब्रिटिश सैनिक मारे गए. फिर 14 जून 1982 को अर्जेंटीना ने आत्मसमर्पण किया और इसपर ब्रिटिश का नियंत्रण हुआ. लेकिन इसने दोनों देशों के बीच स्थायी कूटनीतिक कड़वाहट छोड़ दी, जो फीफा वर्ल्ड कप के मैदान पर भी देखने को मिलता आया है. 

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