Explainer: ओटीटी पर 'Trending No.1' का मतलब क्या है? जानिए इसके पीछे का असली गणित और एल्गोरिदम का खेल

What Does Mean OTT Trending Number One: जब भी वीकेंड आता है तो ज्यादा लोग अक्सर नेटफ्लिक्स, प्राइम वीडियो या जियोहॉटस्टार जैसे OTT प्लेटफॉर्म पर कुछ ना कुछ अपना पंदीदा कंटेंट खोजने लगते हैं. हालांकि, स्क्रीन पर सबसे पहले नजर जाती है उन फिल्मों और वेब सीरीज पर, जिनके साथ 'ट्रेंडिंग No.1', 'टॉप 10 इन इंडिया टुडे' या इसी तरह के टैग दिखाई देते हैं. इसे देखकर हमारे मन में तुरंत सवाल आता है कि शायद इस समय देश में सबसे ज्यादा लोग यही फिल्म या सीरीज देख रहे हैं. कई बार हम बिना ज्यादा सोचे उसी को देखने लग जाते हैं.  

लेकिन क्या 'ट्रेंडिंग No.1' का मतलब सच में सबसे ज्यादा देखी जाने वाली फिल्म ही होता है? आपको बता दें यह जरूरी नहीं है कि OTT की दुनिया में ट्रेंडिंग, मोस्ट वॉच्ड और रिकमेंडेड तीनों अलग चीजें हो सकती हैं. इनके पीछे व्यूज के साथ-साथ वॉच टाइम, देखने की रफ्तार, ऑडियंस का फीडबैक और कई तरह के डेटा सिग्नल्स काम कर सकते हैं. हालांकि हर OTT प्लेटफॉर्म अपना पूरा रैंकिंग एल्गोरिदम पब्लिक नहीं करता. इसलिए इससे जुड़ी हर बात को एक तय और समान फॉर्मूला मानना सही नहीं होगा. तो आइए जानते हैं कि आखिर यह रैंकिंग कैसे काम करती है? 

'ट्रेंडिंग No.1' और 'मोस्ट वॉच्ड' में क्या अंतर है?

सबसे पहले यही समझना जरूरी है कि ट्रेंडिंग और मोस्ट वॉच्ड दोनों एक चीज नहीं है. मोस्ट वॉच्ड का सीधा मतलब इस बात से हो सकता है कि किसी तय टाइम में किसी कंटेंट को कितने लोगों ने देखा या कितने टाइम वॉच्ड किया. वहीं ट्रेंडिंग का मतलब आम तौर पर यह बताना होता है कि किसी कंटेंट पर इस समय लोगों की दिलचस्पी और एक्टिविटी काफी ज्यादा है. मान लीजिए एक पुरानी फिल्म पिछले कई महीनों से लगातार ओटीटी पर देखी जा रही है. उसके पास कुल वॉच टाइम बहुत ज्यादा है. दूसरी तरफ एक नई फिल्म आज OTT पर आई और कुछ ही घंटों में बड़ी संख्या में लोगों ने उसे प्ले करना शुरू कर दिया. नई फिल्म की कुल व्यूअरशिप पुरानी फिल्म से कम हो सकती है, लेकिन उसकी व्यूअरशिप वेलोसिटी, यानी देखने की रफ्तार, बहुत तेज हो सकती है. ऐसी सिचुएशन में नई फिल्म ट्रेंडिंग में ऊपर दिखाई दे सकती है. इसलिए 'ट्रेंडिंग No.1' को यह मान लेना सही नहीं है कि उस फिल्म ने OTT के इतिहास में सबसे ज्यादा व्यूज हासिल कर लिए हैं.

OTT का रैंकिंग एल्गोरिदम कैसे काम करता है?

OTT प्लेटफॉर्म्स अपने यूजर्स के बिहेवियर से बहुत बड़ा डेटा हासिल करते हैं. कौन सी फिल्म कितनी बार प्ले हुई, लोगों ने उसे कितनी देर देखा, किस समय ज्यादा लोग देख रहे हैं, किस तरह के कंटेंट को ज्यादा सर्च किया जा रहा है और किस कंटेंट को बीच में क्विट कर दिया. जैसे कई सिग्नल्स सिस्टम के लिए जरूरी हो सकते हैं. लेकिन यहां एक जरूरी बात है. नेटफ्लिक्स, प्राइम वीडियो, जियोहॉटस्टार जैसे प्लेटफॉर्म अपने पूरे रैंकिंग फॉर्मूला को पब्लिक नहीं करते. इसलिए इंटरनेट पर बताए जाने वाले किसी एक फॉर्मूला को सभी OTT के ट्रेंड को समझना सही नहीं होगा.  फिर भी कुछ ऐसे मेट्रिक्स हैं, जिनसे यह समझने में मदद मिलती है कि किसी कंटेंट की पॉपुलैरिटी को किस तरह समझा जाता है. 

वॉच टाइम और कंप्लीशन रेट का क्या रोल है?

अगर कोई शख्स ओटीटी पर कोई फिल्म देखना शुरू करता है और कुछ देर बाद उसे बंद कर देता है, तो उसका बिहेवियर उस व्यक्ति से अलग है जो फिल्म को आखिर तक देखता है. इसीलिए OTT प्लेटफॉर्म्स यूजर एंगेजमेंट को समझने के लिए वॉच टाइम और कंप्लीशन जैसे सिग्नल्स को जरूरी समझता है. अगर किसी सीरीज के एपिसोड्स को लोग लगातार देखते हैं और आगे के एपिसोड्स भी प्ले करते हैं, तो यह स्ट्रॉन्ग एंगेजमेंट का संकेत हो सकता है. उदाहरण के लिए किसी वेब सीरीज का पहला एपिसोड लाखों लोगों ने देखा. लेकिन अगर बहुत बड़ी संख्या में लोग पहले एपिसोड के बीच में ही छोड़ देते हैं, तो यह एक तरह का सिग्नल है. वहीं अगर ज्यादातर लोग पूरा एपिसोड देखते हैं और तुरंत दूसरा एपिसोड प्ले करते हैं, तो यह ज्यादा स्ट्रॉन्ग एंगेजमेंट शो करता है. इसलिए सिर्फ क्लिक या प्ले नहीं, उसके बाद यूजर क्या करता है, यह भी अहम होता है.

लोकेशन के हिसाब से बदल सकती है आपकी ट्रेंडिंग लिस्ट

क्या आपने कभी सोचा है कि इंडिया और अमेरिका में नेटफ्लिक्स खोलने पर आपको एक जैसी टॉप 10 लिस्ट क्यों नहीं दिखती? इसका कारण सिर्फ भाषा का नहीं है. OTT प्लेटफॉर्म्स अलग-अलग मार्केट्स में अलग कंटेंट दिखाते हैं. ऑडियंस की पसंद, भाषा, लोकेशन और लोकल पॉपुलैरिटी के बेस्ड पर दिखाया जाना वाला कंटेंट बदल सकता है. इंडिया में कोई हिंदी फिल्म ट्रेंडिंग कर सकती है, जबकि उसी टाइम अमेरिका में कोई इंग्लिश सीरीज टॉप पर हो सकती है. इसी तरह इंडिया के अंदर भी ओटीटी ऑडियंस की अलग भाषाओं के दर्शकों की पसंद अलग हो सकती है. यानी आपकी स्क्रीन पर दिखाई दे रही ट्रेंडिंग लिस्ट को पूरे दुनिया में एक जैसी नहीं होती है. 

क्या OTT प्लेटफॉर्म खुद भी किसी फिल्म को पुश करता है?

अब आता है सबसे ज्यादा क्यूरियोसिटी वाला सवाल. अगर कोई फिल्म होम स्क्रीन पर टॉप पर दिखाई दे रही है तो क्या वह सिर्फ इसलिए वहां है क्योंकि वह सबसे ज्यादा पॉपुलर है? आपको बता दें कि ऐसा जरूरी नहीं होता है.  OTT प्लेटफॉर्म्स अपने कंटेंट को प्रमोट भी करते हैं. किसी नए ओरिजिनल की रिलीज होने पर उसका बड़ा बैनर होम पेज पर भी लगाया जा सकता है. इतना ही नहीं किसी बड़े स्टार को फीचर्ड सेक्शन में जगह मिल सकती है. किसी नए शो का ट्रेलर या प्रीव्यू भी ज्यादा प्रोमिनेंटली दिखाया जा सकता है.

सोशल मीडिया भी बदल सकता है फिल्म की पॉपुलैरिटी

आज OTT और सोशल मीडिया एक-दूसरे से काफी जुड़े हुए हैं. अगर किसी फिल्म का एक सीन इंस्टाग्राम रील्स या यूट्यूब शॉर्ट्स पर वायरल हो गया, कोई डायलॉग मीम बन गया या किसी एक्टर की परफॉर्मेंस की तारीफ होने लगी तो  लोग उस फिल्म को OTT पर सर्च करना शुरू कर देते हैं.  इससे अचानक व्यूइंग एक्टिविटी बढ़ सकती है.ऐसे में समझा जा सकता है कि कई बार फिल्म पहले सोशल मीडिया पर ट्रेंड होती है और फिर OTT पर उसकी व्यूअरशिप बढ़ती है. हालांकि कभी इसका उल्टा भी हो जाता है  लोग OTT पर कोई सीन देखते हैं और फिर उसके क्लिप्स सोशल मीडिया शेयर कर देते हैं, जिससे वह कंटेंट वायरल हो जाता है. 

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