वक्फ, वन नेशन-वन इलेक्शन के बाद अब FCRA... 2 साल में मोदी सरकार ने JPC में भेजे सबसे ज्यादा 9 विधेयक

मोदी सरकार ने 2 साल में 9 विधेयक भेजे (Getty Image)
संसद में कोई विधेयक पेश होना और उसका सीधे पास हो जाना हमेशा एक ही प्रक्रिया नहीं होती. कई बार सरकार खुद किसी बिल को संसद की संयुक्त संसदीय समिति यानी Joint Parliamentary Committee (JPC) के पास भेजती है, ताकि उस पर विस्तार से चर्चा हो सके. अब विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 यानी FCRA बिल को JPC भेजने का फैसला इसी वजह से चर्चा में है.
12 अगस्त 2026 को लोकसभा में FCRA बिल को संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजने का प्रस्ताव मंजूर हुआ. विपक्ष ने इसका विरोध किया, जबकि सरकार ने इसे संसदीय जांच की सामान्य प्रक्रिया बताया. इस कदम को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि सरकारी सूत्रों के मुताबिक 2024 से अब तक मोदी सरकार करीब 9 विधेयकों को JPC के पास भेज चुकी है, जबकि 2014 से 2024 के बीच ऐसे 8 विधेयक JPC को भेजे गए थे.
जांच का सामना करना पड़ता है
इस अवधि में वक्फ संशोधन विधेयक, वन नेशन-वन इलेक्शन से जुड़े विधेयक और कॉरपोरेट कानून संशोधन विधेयक जैसे बड़े और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कानूनों को संसदीय समिति की जांच का सामना करना पड़ा है. संसद के आधिकारिक रिकॉर्ड में वक्फ बिल और वन नेशन-वन इलेक्शन से जुड़े 2024 के विधेयकों को संयुक्त समिति के पास भेजे जाने की जानकारी दर्ज है.
- जेपीसी यानी संयुक्त संसदीय समिति में लोकसभा और राज्यसभा दोनों के सांसद होते हैं.
- इसमें सरकार के साथ विपक्षी दलों के सांसद भी शामिल होते हैं.
- समिति किसी विधेयक की धाराओं को विस्तार से देख सकती है.
- समिति विशेषज्ञों, संगठनों और दूसरे संबंधित लोगों से सुझाव मांग सकती है.
- जांच के बाद समिति अपनी रिपोर्ट संसद में पेश करती है.
- समिति की सिफारिशें महत्वपूर्ण होती हैं, लेकिन सरकार के लिए उन्हें मानना अनिवार्य नहीं होता.

JPC क्या है और इसका काम क्या होता है (Getty Image)
JPC क्या है और इसका काम क्या होता है?
संयुक्त संसदीय समिति यानी JPC संसद की एक ऐसी समिति है, जिसमें लोकसभा और राज्यसभा दोनों के सांसद शामिल होते हैं. इसका काम किसी महत्वपूर्ण या विवादित विधेयक की बारीकी से जांच करना, उसकी अलग-अलग धाराओं पर चर्चा करना और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों व संबंधित पक्षों की राय लेना होता है. समिति अपनी जांच पूरी करने के बाद अपनी रिपोर्ट और सुझाव संसद के सामने रखती है. हालांकि, JPC की सिफारिशें सरकार के लिए बाध्यकारी नहीं होतीं.
2 साल में कितने बिल JPC में भेजे गए?
2024 में मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल की शुरुआत के बाद कई महत्वपूर्ण विधेयकों को संसदीय समितियों के पास भेजा गया. इनमें वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 सबसे चर्चित मामलों में रहा. इसे अगस्त 2024 में संयुक्त समिति को भेजा गया था. इसके बाद दिसंबर 2024 में संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024 और संघ राज्य क्षेत्र कानून (संशोधन) विधेयक, 2024 को एक संयुक्त समिति के पास भेजा गया. दोनों विधेयक वन नेशन-वन इलेक्शन की व्यवस्था से जुड़े थे. संसद की ऑफिशियल वेबसाइट पर इनके JPC को भेजे जाने की तारीख 20 दिसंबर 2024 दर्ज है.
2025 और 2026 में भी सरकार ने कुछ बड़े विधेयकों को समितियों के पास भेजा. इनमें 2026 का कंपनी कानून (संशोधन) बिल भी शामिल है, जिसे 23 मार्च 2026 को संयुक्त समिति को भेजा गया. केंद्र सरकार ने FCRA संशोधन विधेयक को भी अब JPC को भेजने का फैसला किया है.
2014 से 2024 के बीच कितने बिल JPC में भेजे गए?
2014 से 2024 के बीच मोदी सरकार के दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयकों को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजा गया. इनमें भूमि अधिग्रहण (दूसरा संशोधन) विधेयक, 2015, इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड, 2015, नागरिकता (संशोधन) विधेयक, 2016, वित्तीय समाधान और जमा बीमा (FRDI) विधेयक, 2017, व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक, 2019, जैव विविधता (संशोधन) विधेयक, 2021, बहु-राज्य सहकारी समितियां (संशोधन) विधेयक, 2022, जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक, 2022 और वन (संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2023 शामिल हैं. इस अवधि में कुल 9 विधेयक JPC के पास भेजे गए थे. इनमें से अब तक सिर्फ वक्फ संशोधन विधेयक ही दोनों सदनों से पारित होकर कानून बना है, जबकि बाकी 8 विधेयक अभी संसदीय प्रक्रिया में हैं.

किसी बिल को JPC में क्यों भेजा जाता है? (Getty Image)
JPC में बिल भेजना क्या दिखाता है?
किसी विधेयक को JPC में भेजने का मतलब यह नहीं होता कि सरकार बिल वापस ले रही है या उसे पास नहीं करना चाहती. इसका सीधा मतलब है कि विधेयक पर संसद के दोनों सदनों के सदस्यों के जरिए और ज्यादा विस्तार से जांच और चर्चा की जाएगी. ऐसा खासकर तब देखने को मिलता है जब किसी बिल के प्रावधान जटिल हों, राजनीतिक मतभेद ज्यादा हों या अलग-अलग पक्षों से सुझाव लेने की जरूरत हो. JPC विशेषज्ञों और हितधारकों से राय ले सकती है और बिल की अलग-अलग धाराओं की समीक्षा कर सकती है.
संसदीय मामलों के जानकारों के मुताबिक किसी बिल को समिति के पास भेजने से उसकी विधायी प्रक्रिया कुछ समय के लिए धीमी हो जाती है, लेकिन इससे बिल की ज्यादा विस्तृत जांच का मौका मिलता है. समिति अपनी रिपोर्ट में बदलाव सुझा सकती है. हालांकि उसकी सिफारिशें अंतिम फैसला नहीं होतीं.
FCRA बिल को JPC भेजने का क्या मतलब है?
FCRA यानी विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक से जुड़े संशोधन विदेशी चंदे और विदेशी फंड प्राप्त करने वाले संगठनों से संबंधित हैं. 2026 के प्रस्तावित बदलावों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद हैं. सरकार का कहना है कि कानून में बदलाव से विदेशी फंड के इस्तेमाल में पारदर्शिता और नियंत्रण मजबूत होगा, जबकि विरोध करने वाले दलों और कुछ संगठनों ने इसके संभावित असर पर सवाल उठाए हैं. इसी पृष्ठभूमि में बिल को JPC भेजने से अलग-अलग पक्षों को अपनी बात रखने का ज्यादा मौका मिलेगा.

अंकिता
शिव की नगरी काशी से अपने करियर की शुरुआत करने वाली अंकिता पाण्डेय ने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से पत्रकारिता में अपनी मास्टर्स की डिग्री पूरी की है. पत्रकारिता में आने के लिए उन्होंने बनारस के लोकल न्यूज पेपर "काशीवार्ता" से अपनी शुरुआत की, बाद में दिल्ली जैसे महानगरी का रुख करते हुए उन्होंने TV9 भारतवर्ष में अक्टूबर साल 2023 से जुड़ी. आज वह इस ऑर्गनाइजेशन में बतौर सब-एडिटर काम कर रही हैं. क्राइम, एंटरटेनमेंट और अन्य सभी को न्यूज के साथ विजुअल तरीके से पेश करने में रुचि है. पत्रकारिता के अलावा कविताएं लिखना, फोटोग्राफी करना और म्यूजिक का भी शौक रखती हैं.
Read More