FCRA बिल पर सरकार का बड़ा फैसला! विपक्ष के नेताओं को बड़ी जिम्मेदारी

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल, 2026 यानी विदेशी अंशदान (FCRA) संशोधन विधेयक, 2026 की जांच के लिए एक संयुक्त समिति बनाई है. इस समिति की जिम्मेदारी बिहार से बीजेपी सांसद और लोकसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक डॉ. संजय जायसवाल को दी गई है. उन्हें समिति का चेयरपर्सन बनाया गया है.

यह संयुक्त समिति लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों से मिलकर बनाई गई है. समिति का काम FCRA Amendment Bill 2026 पर विचार करना और इससे जुड़े अलग-अलग पहलुओं की जांच करना होगा.

Lok Sabha Speaker Shri @ombirlakota has constituted the Joint Committee on the Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill, 2026.

Dr. @sanjayjaiswalMP, MP, has been appointed as Chairperson of the Committee.

The composition of the Joint Committee is as follows:… pic.twitter.com/NuopPfQrhS

— LOK SABHA (@LokSabhaSectt) September 4, 2026

लोकसभा से ये सांसद समिति में शामिल

संयुक्त समिति में लोकसभा से BJP की तरफ से डॉ. संजय जायसवाल   के अलावा भर्तृहरि महताब, तेजस्वी सूर्या, कमलेश जांगड़े, मुकेशकुमार चंद्रकांत दलाल, डॉ. निशिकांत दुबे, विष्णु दयाल राम, अनंत नायक, अरविंद धर्मपुरी. इसके अलावा कांग्रेस के एंटो एंटनी, कैप्टन विरियाटो फर्नांडीस, मुहम्मद हमदुल्ला सईद, काली चरण मुंडा है, समाजवादी पार्टी से जिया उर रहमान TMC की तरफ से कल्याण बनर्जी, DMK से ए. राजा, TDP से लवू श्री कृष्ण देवरयालु, शिवसेना से नरेश गणपत म्हस्के, JD(U) कौशलेन्द्र कुमार, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी–शरदचंद्र पवार (NCP-SP) से सुप्रिया सुले और IUML से ई. टी. मोहम्मद बशीर को सदस्य बनाया गया है.

राज्यसभा से भी सांसदों को मिली जगह

राज्यसभा से सी. सदानंदन मास्टर, हर्षवर्धन श्रृंगला, उज्ज्वल देवराव निकम, डॉ. अलका गुर्जर, सत पॉल शर्मा, प्रफुल्ल पटेल, संजय कुमार झा, क्रिस्टोफर मणिकम, डॉ. मेनका गुरुस्वामी और पी. विल्सन को समिति में शामिल किया गया है.

FCRA बिल क्या है?

FCRA कानून भारत में विदेश से मिलने वाले पैसे, सामान या विदेशी प्रतिभूतियों को लेने और इस्तेमाल करने के नियम तय करता है. इसका मकसद यह देखना है कि विदेशी पैसा देश की सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक हित के खिलाफ इस्तेमाल न हो. भारत में मौजूदा FCRA कानून 2010 का है. इसे गृह मंत्रालय लागू करता है. इसके तहत NGO, ट्रस्ट, संस्थान और दूसरी पात्र संस्थाओं को विदेशी चंदा लेने के लिए FCRA रजिस्ट्रेशन या अनुमति की जरूरत होती है. विदेशी पैसा मिलने के बाद उसके इस्तेमाल और हिसाब-किताब की भी जानकारी देनी होती है.