दुर्ग में सरकारी योजना के नाम पर ठगी: महिला से लाखों रुपए और जेवर हड़पे, कोर्ट के आदेश पर FIR दर्ज - durg-bhilai News

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दुर्ग-भिलाई11 मिनट पहले

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छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के सुपेला थाना क्षेत्र में सरकारी योजनाओं में निवेश कर मोटा मुनाफा दिलाने का झांसा देकर महिला से लाखों रुपए और सोने-चांदी के जेवर लेने का मामला सामने आया है। पुलिस कार्रवाई नहीं होने पर पीड़िता ने न्यायालय का रुख किया। कोर्ट के निर्देश के बाद सुपेला थाना पुलिस ने आरोपी महिला के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) और 316(2) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

दस्तावेजों और नोटरी इकरारनामे के आधार पर न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी दुर्ग ने प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध माना। इसके बाद सुपेला थाना पुलिस को एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच करने के निर्देश दिए गए।

स्किल ट्रेनिंग के दौरान हुई थी पहचान

परिवाद के अनुसार, फरीद नगर कोहका निवासी रूबी खातून की करीब 18 महीने पहले संजय नगर निवासी सबीना खान से विश्वकर्मा योजना के तहत चल रही स्किल ट्रेनिंग के दौरान पहचान हुई। आरोपी ने खुद को विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकार बताते हुए निवेश के बदले बड़ा आर्थिक लाभ दिलाने का भरोसा दिया।

अलग-अलग योजनाओं के नाम पर ली नकद रकम

शिकायत के अनुसार, आरोपी ने पहले 3 हजार रुपए जमा करने पर प्रशिक्षण के बाद 1 लाख रुपए मिलने का झांसा दिया। इसके बाद बेटे के नाम पर 5 लाख रुपये दिलाने के लिए 15 हजार रुपए जमा कराए। फिर अलग-अलग योजनाओं के नाम पर 50 हजार, 70 हजार, 30 हजार, 20 हजार रुपए सहित कई बार नकद राशि ली।

सोने-चांदी के जेवर भी ले लिए

आरोप है कि आरोपी ने अधिक लाभ का लालच देकर महिला से सोने की चेन, चांदी की पायल, चांदी के छल्ले सहित अन्य आभूषण उनके मूल बिलों के साथ ले लिए। परिवाद के मुताबिक नकद और जेवरों की कुल कीमत 6.33 लाख रुपए से अधिक है।

परिजनों को जानकारी नहीं देने की सलाह

परिवाद में कहा गया है कि आरोपी ने महिला से पूरे लेन-देन की जानकारी पति या परिवार के अन्य लोगों को नहीं बताने के लिए कहा। भरोसा दिलाया गया कि योजना पूरी होने पर मिलने वाली बड़ी रकम देखकर परिवार खुश हो जाएगा। इसी वजह से महिला ने लंबे समय तक यह बात अपने परिजनों से छिपाकर रखी।

नोटरी इकरारनामा बना अहम सबूत

जब महिला ने अपनी रकम और जेवर वापस मांगे तो आरोपी टालमटोल करने लगी। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच 9 जुलाई 2025 को दो गवाहों की मौजूदगी में नोटरी इकरारनामा तैयार किया गया। इसमें आरोपी ने 4.50 लाख रुपए नकद और सोने-चांदी के आभूषण लेने की बात स्वीकार करते हुए एक माह 10 दिन के भीतर सब लौटाने का वादा किया था।

समय बीतने के बाद भी नहीं लौटाई रकम

परिवाद के अनुसार, तय समय सीमा समाप्त होने के बाद भी आरोपी ने न तो नकद राशि लौटाई और न ही जेवर वापस किए। आरोप है कि बाद में कार्रवाई से बचने के लिए आरोपी ने पीड़िता के खिलाफ पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत भी की।

थाने से राहत नहीं मिलने पर पहुंची कोर्ट

पीड़िता ने पहले सुपेला थाना और फिर पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत की, लेकिन एफआईआर दर्ज नहीं हुई। इसके बाद भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 174 के तहत नोटिस देकर उसे न्यायालय जाने की सलाह दी गई। इसके बाद महिला ने न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी दुर्ग की अदालत में परिवाद दायर किया।

दस्तावेज देखकर कोर्ट ने दिए जांच के निर्देश

न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी रवि कुमार महोबिया ने परिवाद, नोटरी इकरारनामा और अन्य दस्तावेजों का अवलोकन किया। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया मामला केवल दीवानी विवाद नहीं बल्कि सरकारी योजनाओं का झूठा प्रलोभन देकर धन और आभूषण हासिल करने से जुड़ी आपराधिक धोखाधड़ी का प्रतीत होता है। इसलिए निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला

अपने आदेश में अदालत ने सर्वोच्च न्यायालय के ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और साकिरी वासू बनाम उत्तर प्रदेश राज्य के फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि संज्ञेय अपराध की सूचना मिलने पर एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है। इसी आधार पर सुपेला थाना पुलिस को विधिवत जांच कर अंतिम प्रतिवेदन न्यायालय में पेश करने के निर्देश दिए गए।

पुलिस ने शुरू की जांच

कोर्ट के आदेश के पालन में सुपेला थाना पुलिस ने आरोपी महिला के खिलाफ बीएनएस की धारा 318(4) और 316(2) के तहत अपराध दर्ज कर लिया है। पुलिस अब इकरारनामा, लेन-देन से जुड़े दस्तावेज, गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पूरे मामले की जांच कर रही है।

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