क्रिप्टो पर भारत सरकार का बड़ा एक्शन: FIU ने 15 विदेशी एक्सचेंजों पर कसा शिकंजा; ऐप और वेबसाइट्स ब्लॉक करने का भेजा नोटिस

क्रिप्टो पर भारत सरकार का बड़ा एक्शन: FIU ने 15 विदेशी एक्सचेंजों पर कसा शिकंजा; ऐप और वेबसाइट्स ब्लॉक करने का भेजा नोटिस

भारत में अवैध और बिना पंजीकरण के कारोबार कर रहे विदेशी क्रिप्टो एक्सचेंजों के खिलाफ केंद्रीय वित्त मंत्रालय के तहत कार्यरत वित्तीय खुफिया इकाई (Financial Intelligence Unit - FIU-IND) ने बड़ा अभियान शुरू किया है। वित्तीय कानूनों की अनदेखी करने वाले 15 अंतरराष्ट्रीय वर्चुअल डिजिटल एसेट सर्विस प्रोवाइडर्स (VDASPs / Crypto Exchanges) को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 की धारा 13 के तहत कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी किया गया है।

इसके साथ ही, भारतीय निवेशकों के हितों और देश की वित्तीय अखंडता की सुरक्षा के लिए एफआईयू ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) को इन सभी 15 प्लेटफॉर्म्स के आधिकारिक यूआरएल (वेबसाइट्स) और मोबाइल एप्लिकेशन को देश भर में ब्लॉक करने की औपचारिक सिफारिश भेजी है।

क्यों हुई यह कार्रवाई? एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग नियमों की खुली अवहेलना

मार्च 2023 में केंद्र सरकार ने वर्चुअल डिजिटल एसेट (VDA) कारोबारियों और क्रिप्टो एक्सचेंजों को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) के कानूनी दायरे में शामिल किया था। इसके तहत भारत में सेवाएं देने वाले प्रत्येक घरेलू और विदेशी प्लेटफॉर्म के लिए कड़े नियम तय किए गए थे:

  • अनिवार्य पंजीकरण (Mandatory Registration): प्रत्येक प्लेटफॉर्म को एक 'रिपोर्टिंग एंटिटी' के रूप में एफआईयू-आईएनडी के साथ पंजीकृत होना अनिवार्य था।

  • सख्त केवाईसी मानक (Strict KYC Compliance): हर ग्राहक की पहचान की पुष्टि और लेन-देन का विस्तृत डिजिटल रिकॉर्ड रखना अनिवार्य था।

  • संदिग्ध लेन-देन की रिपोर्टिंग (STR): हवाला, आतंकी वित्तपोषण या काले धन से जुड़े किसी भी संदिग्ध लेन-देन की त्वरित सूचना एफआईयू को देना कानूनन जरूरी था।

  • टैक्स और टीडीएस अनुपालन: भारतीय उपयोगकर्ताओं द्वारा किए जाने वाले क्रिप्टो सौदों पर 1% टीडीएस (TDS under Section 194S) और 30% फ्लैट कैपिटल गेन टैक्स की निगरानी सुनिश्चित करना।

जांच में पाया गया कि ये 15 विदेशी कंपनियां भारत में बड़े पैमाने पर अपने ऑपरेशंस चला रही थीं और भारी मात्रा में भारतीय निवेशकों से फंड जुटा रही थीं, लेकिन उन्होंने न तो एफआईयू के साथ पंजीकरण कराया और न ही स्थानीय कानूनों का पालन किया।

ब्लॉक होने के बाद भारतीय यूजर्स और उनके फंड्स पर क्या होगा असर?

इस सख्त कार्रवाई के बाद देश के उन लाखों निवेशकों में चिंता बढ़ गई है जो इन प्लेटफॉर्म्स पर ट्रेडिंग कर रहे थे:

  • ऐप स्टोर और वेबसाइट एक्सेस बंद: सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69A के तहत इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्रालय इन कंपनियों की वेबसाइटों को भारतीय इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स (ISPs) के जरिए ब्लॉक करेगा और गूगल प्ले स्टोर व एप्पल ऐप स्टोर से इनके ऐप्स हटवाए जाएंगे।

  • क्रिप्टो विड्रॉल और ट्रांसफर में अड़चन: यूआरएल ब्लॉक होने पर यूजर्स को अपने अकाउंट लॉगिन करने में तकनीकी कठिनाई आ सकती है। हालांकि, तकनीकी रूप से वॉलेट में मौजूद क्रिप्टो एसेट्स जब्त नहीं होते, लेकिन भारतीय बैंक खातों में सीधे रुपये (INR) की निकासी या फिएट लेन-देन तुरंत रुक जाएगा।

  • घरेलू एक्सचेंजों की ओर रुख: सरकार और नियामकों की सलाह है कि निवेशक केवल उन्हीं भारतीय या विदेशी प्लेटफॉर्म्स पर ट्रेड करें जो एफआईयू के साथ रजिस्टर्ड हैं और पूर्ण केवाईसी व टैक्स नियमों का पालन करते हैं।

गैर-अनुपालन वाले प्लेटफॉर्म्स पर कानूनी शिकंजा रहेगा जारी

एफआईयू-आईएनडी ने स्पष्ट किया है कि भारत के भीतर स्थित ग्राहकों को लक्षित करने वाले किसी भी डिजिटल एसेट प्लेटफॉर्म को देश के कानूनों से छूट नहीं दी जा सकती। यदि नोटिस पाने वाली कंपनियां संतोषजनक जवाब और अनुपालन योजना पेश करने में विफल रहती हैं, तो उनके खिलाफ दंडात्मक आर्थिक जुर्माने और डिजिटल संपत्तियों को फ्रीज करने जैसी अग्रिम विधिक कार्रवाई की जाएगी।