रॉयल चैलेंज, ओल्ड मंक समेत कई शराब ब्रांडों पर लगी रोक, FSSAI जांच में सामने आई गड़बड़ी!
Aug 03, 2026 11:08 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
मुख्य बातें
- FSSAI ने आर्टिफिशियल फ्लेवर के इस्तेमाल को लेकर बड़ी कार्रवाई की है
- डियाजियो इंडिया, Inbrew और कुछ अन्य कंपनियों के लोकप्रिय व्हिस्की और रम ब्रांडों की बिक्री पर रोक लगा दी है
- नियामक का कहना है कि इन उत्पादों में आर्टिफिशियल या नेचर-आइडेंटिकल फ्लेवर का इस्तेमाल किया गया है

FSSAI ने आर्टिफिशियल फ्लेवर के इस्तेमाल को लेकर की बड़ी कार्रवाई।
भारत के शराब बाजार में एक बड़ा नियामकीय कदम सामने आया है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने कुछ लोकप्रिय व्हिस्की और रम ब्रांडों की बिक्री पर रोक लगा दी है। आरोप है कि इन उत्पादों में स्वाद और खुशबू लाने के लिए प्राकृतिक तरीके से एजिंग करने या कच्चे माल का उपयोग करने के बजाय कृत्रिम (Artificial) या नेचर-आइडेंटिकल फ्लेवर का इस्तेमाल किया गया। FSSAI का कहना है कि रम में रम फ्लेवर या व्हिस्की में व्हिस्की फ्लेवर मिलाना ग्लोबल लेवल पर वैलिड मैन्युफैक्चरिंग प्रॉसेस नहीं है और इससे नेचुरल मैन्युफैक्चरिंग प्रॉसेस को दरकिनार किया जाता है।
भारत दुनिया के सबसे बड़े शराब बाजारों में शामिल है, जहां हर साल करीब 40 अरब डॉलर (लगभग ₹3 लाख करोड़ से अधिक) का कारोबार होता है। ऐसे में एफएसएसएआई का यह फैसला पूरे शराब उद्योग के लिए काफी अहम माना जा रहा है। यह कार्रवाई खास तौर पर डियाजियो इंडिया (United Spirits), इनब्रू बेवरेजेज और कुछ अन्य कंपनियों के चुनिंदा उत्पादों पर की गई है। इन कंपनियों के कई ब्रांड देशभर में काफी लोकप्रिय हैं और इनकी बिक्री बड़े पैमाने पर होती है।
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यह कार्रवाई डियाजियो इंडिया (United Spirits) और इनब्रू बेवरेजेज के कुछ उत्पादों पर की गई है। प्रभावित ब्रांडों में एंटीक्विटी ब्लू व्हिस्की (Antiquity Blue Whisky), रॉयल चैलेंज व्हिस्की (Royal Challenge Whisky), मैकडॉवेल्स नंबर 1 रम (McDowell’s No.1 Rum), बैगपाइपर डीलक्स व्हिस्की (Bagpiper Deluxe Whisky), ओल्ड कास्क डीलक्स XXX रम (Old Cask Deluxe XXX Rum) और ओल्ड मंक (Old Monk) के कुछ वैरिएंट शामिल हैं, जो अलग-अलग राज्यों की फैक्ट्रियों में तैयार किए जाते हैं। FSSAI की जांच में इन उत्पादों में बाहरी कृत्रिम या नेचर-आइडेंटिकल फ्लेवर पाए गए, जिसके आधार पर इन्हें "सब-स्टैंडर्ड" कैटेगिरी में रखा गया।
हालांकि, यूनाइटेड स्प्रिट (United Spirits) ने FSSAI के इस फैसले पर आपत्ति जताई है। कंपनी का कहना है कि उसके उत्पादों के लेबल मौजूदा भारतीय नियमों के अनुरूप हैं और यह केवल उसकी नहीं, बल्कि पूरे उद्योग से जुड़ा मुद्दा है। कंपनी ने अपने एक रम उत्पाद को लेकर अदालत का भी रुख किया है और व्हिस्की से जुड़े आदेशों को भी चुनौती देने की तैयारी कर रही है। दूसरी ओर FSSAI का कहना है कि उसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उपभोक्ताओं को तय मानकों के अनुसार बने उत्पाद ही मिलें। इस कार्रवाई को भारत में खाद्य और पेय पदार्थों की गुणवत्ता पर बढ़ती नियामकीय सख्ती के रूप में देखा जा रहा है।
