Gandhari Review: न थ्रिल, न कहानी में दम! कैसी है नेटफ्लिक्स पर आई तापसी की गांधारी?

Sep 04, 2026 05:51 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान

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Netflix Film Review: नेटफ्लिक्स पर 3 सितंबर को गांधारी रिलीज हुई है। फिल्म में तापसी का एक्शन तो है, लेकिन फिल्म की कमजोर कहानी काफी निराश करती है। आइए जानते हैं इस फिल्म के बारे में।  

Netflix Gandhari Review

कैसी है तापसी की गांधारी?

नेटफ्लिक्स पर तापसी पन्नू की क्राइम थ्रिलर फिल्म ‘गांधारी’ रिलीज हो चुकी है। फिल्म भले ही क्राइम थ्रिलर श्रेणी में आती हो, लेकिन फिल्म से थ्रिल पूरी तरह से लापता है। ‘गांधारी’ एक ऐसी मां की कहानी है जिसकी बच्ची किडनैप हो जाती है, फिर अपनी बच्ची को बचाने के लिए मां पूरी दुनिया से लड़ने को तैयार है। फिल्म का प्लॉट तो अच्छा है, लेकिन फिल्म की कहानी को जिस तरह से लिखा गया है, ये फिल्म बेदम लगती है।

फिल्म का नाम: गांधारी

कहां देखें: नेटफ्लिक्स

स्टार: 2/5

कास्ट: तापसी पन्नू, इश्वाक सिंह, मीता वसिष्ठ और प्रशांत नारायणन

क्या है तापसी पन्नू की गांधारी की कहानी?

फिल्म की कहानी शुरू होती है एक मां और बेटी के खूबसूरत रिश्ते को दर्शाते हुए। रेलवे स्टेशन से बानी (तापसी) की बेटी मिष्टी किडनैप हो जाती है। एक ही पल में बानी के जीवन में उथल-पुथल मच जाती है। अपनी बेटी को बचाने की जद्दोजहद में बानी अपनी आंखों की रोशनी खो देती है। कहानी जैसे-जैसे आगे बढ़ती है, समझ आता है कि जॉयपुरा में बच्चियों को गायब करने का एक बड़ा रैकेट चल रहा है।

फिल्म में नजर आई है तापसी की मेहनत

गांधारी की कहानी में नहीं है दम

बीना अपनी बच्ची को ढूंढने की कसम खाती है। फिल्म जब शुरू होती है तो लगता है कि फिल्म में काफी दमदार सीक्वेंस होंगे, डायलॉग्स होंगे और थ्रिल होगा। लेकिन फिल्म की कहानी जैसे-जैसे आगे बढ़ती है समझ आता है कि कहानी में कोई दम नहीं है।

कहानी के सस्पेंस करेंगे निराश

फिल्म देखते हुए आप इंतजार करते रह जाएंगे कि कोई ऐसा ट्विस्ट फिल्म में आए जिससे कहानी दिलचस्प और थ्रिलिंग बने, लेकिन आपको वो इंतजार इंतजार ही रह जाएगा। कहानी में सस्पेंस तो है, लेकिन वो सस्पेंस जबरदस्ती कहानी में घुसाए हुए लगते हैं। इन सस्पेंस को देख काफी निराशा होगी आपको।

नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई है गांधारी

तापसी का न देख पाने वाला अधूरा सच

जब फिल्म का ऐलान हुआ था तब ऐसी चर्चा थी कि फिल्म में तापसी एक ऐसी मां का किरदार निभाेंगी जो देख नहीं सकती हैं। आंखों की रोशनी जाने के बाद भी वो बड़े-बड़े दुश्मनों से पंगा लेंगी, लेकिन जब आप फिल्म देखेंगे तो पाएंगे की तापसी का न देख पाने वाला ट्विस्ट आधा सच है।

फिल्म में कमजोर विलेन

प्रशांत नारायणन ने फिल्म में विलेन का किरदार निभाया है। ब्लैकहोल का जब पहला शॉट स्क्रीन पर आता है तो लगता है कि फिल्म में विलेन ही थ्रिल लेकर आएगा, लेकिन फिल्म क्लाइमेक्स तक पहुंच जाती है और विलेन कहीं भी अपना दम दिखाता नजर नहीं आता है। विलेन के रूप में प्रशांत नारायणन से उम्मीदें बढ़ जाती हैं, लेकिन फिल्म के अंत तक आपकी उम्मीदों पर पानी फिर जाएगा।

फिल्म में क्या अच्छा?

फिल्म में तापसी ने अपने इमोशन्स और एक्शन सीक्वेंस को ईमानदारी से दर्शाया है, लेकिन फिर भी ये फिल्म आपको खुद से बांधे रहने में फेल होती है। तापसी को उनकी मेहनत के लिए मार्क्स मिलने चाहिए। तापसी की एक्टिंग के साथ-साथ फिल्म का विजुअल टोन अच्छा है। फिल्म के कुछ शॉट्स ऐसे हैं जो जब पर्दे पर आते हैं तो आप खुद ब खुद उसकी तारीफ करेंगे।

क्यों दिए हैं 2 स्टार?

फिल्म की कहानी में दम नहीं है, सस्पेंस ही दमदार लगते हैं। हालांकि, फिल्म में तापसी की एक्टिंग और इसकी विजुअल टोन अच्छी है। इसी वजह से फिल्म को दो स्टार दिए गए हैं। अगर आप सोच रहे हैं कि आप फिल्म देखें या नहीं? तो इसका जवाब होगा कि अगर आप ये फिल्म नहीं भी देखेंगे तो चलेगा। फिल्म में कुछ भी खास नहीं है। फिल्म का मुद्दा बेशक एक गंभीर मुद्दा है, लेकिन फिल्म काफी कमजोर है।