इस शहर के स्कूलों में Generative AI पर लगा बैन, जानिए क्यों लिया गया इतना बड़ा फैसला
Sep 04, 2026 02:19 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान

न्यूयॉर्क सिटी ने छोटी कक्षाओं के छात्रों के लिए Generative AI टूल्स पर एक साल का प्रतिबंध लगाया है। आइए आपको इसकी वजह बताते हैं और समझाते हैं कि ऐसा करना क्यों जरूरी था।

पूरे 1 साल तक AI के असर को स्टडी भी किया जाएगा।
New York City ने स्कूलों में छात्रों की ओर से इस्तेमाल किए जाने वाले Generative AI को लेकर बड़ा फैसला लिया है। 2026-27 के स्कूल ईयर में 2-K से लेकर 8वीं कक्षा तक के छात्रों के लिए student-facing Generative AI टूल्स पर एक साल का बैन लगाया गया है। यह फैसला शहर के करीब 6 लाख पब्लिक स्कूल स्टूडेंट्स को प्रभावित करेगा। हालांकि, हाई स्कूल के छात्रों के लिए AI का इस्तेमाल पूरी तरह बंद नहीं किया गया है, बल्कि इसे सीमित और निगरानी के साथ इस्तेमाल करने की अनुमति होगी।
फैसले की सबसे बड़ी वजह यह है कि Generative AI बच्चों के लिए जवाब और पूरा कंटेंट कुछ ही सेकेंड में तैयार कर सकता है। इससे छात्रों के सामने यह खतरा है कि वे किसी सवाल को खुद समझने, लॉजिक लगाने और जवाब तैयार करने के बजाय सीधे AI पर डिपेंड होने लगें।
न्यूयॉर्क एजुकेशन डिपार्टमेंट के मुताबिक, AI से मिलने वाली जानकारी गलत या बायस भी हो सकती है। इसके अलावा, AI छात्रों के लिए वह सोचने का काम कर सकता है जिसे उन्हें खुद करना चाहिए। ऐसे में स्कूल प्रशासन का मानना है कि छोटी उम्र में बच्चों को पहले पढ़ने, लिखने, सवाल पूछने, समस्या हल करने और गलतियों से सीखने जैसी जरूरी क्षमताएं विकसित करनी चाहिए।
AI से ज्यादा जरूरी है शिक्षक और इंसानी कनेक्ट
न्यूयॉर्क का तर्क सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं है। शहर का मानना है कि बच्चों के विकास में शिक्षक और दूसरे छात्रों के साथ बातचीत बेहद जरूरी है। अगर हर सवाल का जवाब chatbot देने लगे तो शिक्षक और छात्रों के बीच होने वाला कनेक्ट, डिस्कशन और कोलैबोरेशन प्रभावित हो सकता है। इसी वजह से 2-K से 8वीं कक्षा तक स्टूडेंट्स-फेसिंग जेनरेटिव AI पर रोक लगाई गई है। इसके साथ ही AI कंपैनियन चैटबॉट्स पर सभी क्लासेज में बैन रहेगा। ऐसे chatbot बच्चों को बातचीत या इमोशनल कनेक्ट जैसा एक्सपीरियंस देने के लिए डिजाइन किए जाते हैं।
सिर्फ AI ही नहीं, Screen Time भी घटेगा
न्यूयॉर्क ने AI के साथ-साथ बच्चों के क्लासरूम स्क्रीन टाइम को भी कम करने की नीति लागू की है। 2-K से दूसरी कक्षा तक इंडिविजुअल स्क्रीन यूज की परमिशन नहीं होगी। तीसरी से पांचवीं कक्षा के छात्रों के लिए रोजाना 30 मिनट तक और छठी से आठवीं कक्षा के छात्रों के लिए 45 मिनट तक इंडिविजुअल स्क्रीन टाइम की सिफारिश की गई है। हालांकि, जरूरी एसिस्टिव टेक्नोलॉजी, असेसमेंट्स, कोडिंग, रोबोटिक्स और कुछ अन्य अप्रूव्ड एजुकेशनल एक्टिविटीज इसके एक्सेप्शन हैं।
एक साल तक होगा AI के असर की स्टडी
फैसला हमेशा के लिए AI बैन करने का ऐलान नहीं है। न्यूयॉर्क ने फिलहाल एक साल का प्रतिबंध लगाया है। 2026-27 के दौरान टेक्नोलॉजी इन स्कूल्स कोएलिशन छात्रों, शिक्षकों, अभिभावकों, एक्सपर्ट्स और अन्य स्टेकहोल्डर्स के साथ मिलकर AI के असर को स्टडी करेगी। इसके बाद भविष्य की नीति को लेकर फैसले लिए जाएंगे।
लेखक के बारे में
Pranesh Tiwari
प्राणेश वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां वे पिछले चार वर्षों से टेक्नोलॉजी सेक्शन का अहम हिस्सा हैं। खुद को दिल से लेखक और पेशे से पत्रकार मानने वाले प्राणेश के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में आठ वर्षों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने अपने पूरे करियर में साइंस और टेक्नोलॉजी की जटिलताओं को आम पाठकों के लिए सरल, सहज और रोचक भाषा में प्रस्तुत करने पर विशेष ध्यान दिया है।
विशेषज्ञता और कार्यशैली
प्राणेश की विशेषज्ञता गैजेट्स, टेक इनसाइट्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे विषयों में है। वे तकनीकी बारीकियों और
कठिन शब्दावली को इस तरह प्रस्तुत करते हैं कि एक सामान्य पाठक भी तेजी से बदलती डिजिटल दुनिया को आसानी से समझ सके। लेटेस्ट
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रिसर्च और कहानी कहने का संतुलन देखने को मिलता है।
अब तक का सफर और उपलब्धियां
प्राणेश ने अपने प्रोफेशनल करियर की शुरुआत नवभारत टाइम्स ऑनलाइन से की। इसके बाद उन्होंने न्यूजबाइट्स (NewsBytes) में
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चाहे वह किसी नए AI टूल की पड़ताल हो या किसी अनदेखी जगह की यात्रा.. प्राणेश का लक्ष्य हमेशा एक बेहतरीन कहानी बुनना ही होता है।
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