Google AI: चार दिग्गज वैज्ञानिकों ने क्यों छोड़ा गूगल? रिसर्च आधारित AI स्टार्टअप शुरू, अल्फाबेट के शेयर गिरे

गूगल को बड़ा झटका देते हुए उसके चार दिग्गज वैज्ञानिकों जेफ डीन, संजय घेमावत, ओरिओल विन्याल्स और क्वोक ले ने कंपनी छोड़कर डिस्कवरी लूप नामक नया एआई स्टार्टअप शुरू किया है। यह कंपनी वैज्ञानिक अनुसंधान और इंजीनियरिंग को स्वचालित करने पर केंद्रित है। खबर सामने आते ही गूगल की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट के शेयर चार फीसदी तक गिर गए। डिस्कवरी लूप सिर्फ एक और चैटजीपीटी  जैसा चैटबॉट बनाने वाली कंपनी नहीं होगी।



इसका मकसद एआई की मदद से वैज्ञानिक और इंजीनियरिंग रिसर्च को तेज करना है। कंपनी ऐसे एआई सिस्टम तैयार करना चाहती है जो कई स्टेप वाले रिसर्च और इंजीनियरिंग के काम को काफी हद तक अपने आप पूरा कर सकें। यानी नई दवाएं खोजने, नई सामग्री विकसित करने, हार्डवेयर डिजाइन करने और दूसरे वैज्ञानिक कामों में एआई की मदद ली जा सके।  दिलचस्प ये है कि गूगल भी इसमें इन्वेस्टर के तौर पर हिस्सेदारी रखेगा।

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जेफ डीन का जाना सबसे बड़ा झटका : गूगल से जेफ डीन का जाना सबसे बड़ी खबर मानी जा रही है। उन्होंने 1999 में कंपनी जॉइन की थी। गूगल सर्च को बड़े स्तर पर चलाने वाली कई अहम तकनीकों को बनाने में उनका बड़ा योगदान रहा। उन्होंने गूगल ब्रेन की भी शुरुआत की और एआई रिसर्च को आगे बढ़ाया।

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नई खोज-नए प्रयोगों पर चरणबद्ध तरीके से काम करेगी डिस्कवरी लूप


डिस्कवरी लूप वैज्ञानिक और इंजीनियरिंग रिसर्च पर काम करेगी। इसके तहत कंपनी मौजूदा वैज्ञानिक रिसर्च पेपर्स को पढ़ेगी। इसके बाद वह उन क्षेत्रों की पहचान करेगी जहां नई खोज की संभावना है और एक नया वैज्ञानिक विचार या नई थ्योरी तैयार हो सकती है। विचार को साबित करने के लिए एआई खुद ही प्रयोग की रूपरेखा भी तैयार करेगा। कंप्यूटर विज्ञान में यह खुद कोड लिखेगा और वैज्ञानिक भाषा में खुद रोबोटिक आर्म्स को निर्देश देगा। यदि परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं आते, तो एआई अपनी गलती से सीखकर तुरंत नया हाइपोथिसिस बनाेगा और चक्र को दोबारा शुरू करेगा।



कोटा में बीता संजय का बचपन, कंप्यूटर साइंस में की पीएचडी


भारतवंशी संजय घेमावत का जन्म 1966 में वेस्ट लाफायेट, इंडियाना (अमेरिका) में हुआ था। उस समय उनके पिता महीपाल वहां की पर्ड्यू यूनिवर्सिटी से पीएचडी की पढ़ाई कर रहे थे। पिता की पढ़ाई पूरी होने के बाद उनका परिवार कोटा (राजस्थान) लौट आया। कोटा से स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद वे उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका चले गए।


nउन्होंने कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से 1987 में अपनी बैचलर डिग्री पूरी की और एमआईटी (मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी) से 1990 में मास्टर्स और 1995 में कंप्यूटर साइंस में पीएचडी पूरी की। संजय ने कुछ समय डिजिटल इक्विपमेंट कॉर्पोरेशन की रिसर्च लैब में काम किया, जहां उनकी मुलाकात जेफ डीन से हुई और फिर 1999 में वे गूगल से जुड़े।



एआई टैलेंट की कमी से जूझ रहा गूगल


यह बदलाव ऐसे समय पर हुआ है जब गूगल पहले से एआई टैलेंट को बचाए रखने की चुनौती का सामना कर रहा है। पिछले कुछ महीनों में नोआम शजीर, जॉन जंपर और दूसरे कई बड़े एआई रिसर्चर्स भी गूगल छोड़ चुके हैं या दूसरी कंपनियों में चले गए हैं। ऐसे में इन चार दिग्गजों का जाने से कंपनी के लिए समस्याएं और बढ़ जाएंगी।